SEBI New Rules and SEBI chief says need to raise tenure of F&O: सेबी नए नियम

Rajeev
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हाल ही में, सेबी (SEBI) ने इक्विटी डेरिवेटिव (F&O) बाजार में निगरानी और जोखिम प्रबंधन को सुधारने के लिए कुछ नए नियम निकाले हैं। ये नियम इंडेक्स और व्यक्तिगत स्टॉक पोजीशन पर ज्यादा ध्यान देंगे। इन बदलावों में पोजीशन की लिमिट को सख्त करना और निगरानी को बेहतर बनाना शामिल है। इसका मकसद है कि ट्रेडिंग में रिस्क कम हो और बाजार में स्थिरता बनी रहे।

यहां मुख्य बदलावों का ब्योरा दिया गया है:

1.  इंडेक्स (Index) पोजीशन लिमिट:

    *   नेट एक्सपोजर लिमिट: इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, इंडेक्स ऑप्शन के लिए, हर इकाई के लिए ₹1,500 करोड़ की नेट एक्सपोजर लिमिट तय की गई है।

    *   ग्रॉस पोजीशन लिमिट: एंजेल वन के अनुसार, हर इकाई के लिए ₹10,000 करोड़ की ग्रॉस पोजीशन लिमिट (लॉन्ग + शॉर्ट) भी तय की गई है।

    *   इंडेक्स फ्यूचर (Index Future): इंडेक्स फ्यूचर के लिए लिमिट बाजार प्रतिभागी के हिसाब से अलग-अलग होगी।

    *   पैसिव ब्रीच (Passive Breach): इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, अगर बाजार में ओपन इंटरेस्ट कम होने की वजह से कोई उल्लंघन होता है, तो उसे उल्लंघन नहीं माना जाएगा।

2.  नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स (Non-Benchmark Index):

    *   न्यूनतम घटक: नए नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स में कम से कम 14 घटक होने चाहिए तभी वे डेरिवेटिव(F&O) कॉन्ट्रैक्ट के लिए योग्य होंगे।

    *   वेटेज (Weightage) लिमिट: टॉप घटक का वेटेज 20% तक सीमित है, और टॉप तीन घटकों का कुल वेटेज 45% से ज्यादा नहीं हो सकता।

3.  व्यक्तिगत इकाई स्तर पर पोजीशन लिमिट:

    *   रिटेल ग्राहक: व्यक्तिगत रिटेल ग्राहकों के लिए सिंगल स्टॉक में मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट (MWPL) का 10% लिमिट है।

    *   प्रोप्राइटरी ब्रोकर: प्रोप्राइटरी ब्रोकर के लिए ट्रेडिंग लिमिट 20% है।

    *   एफपीआई (FPI) और ब्रोकर: एफपीआई और ब्रोकर के लिए कुल लिमिट 30% है।

4.  बेहतर निगरानी:

    *   रैंडम चेक: एक्सचेंज अब ट्रेडिंग के दिन में कम से कम चार बार रैंडम तरीके से MWPL के उपयोग की निगरानी करेंगे।

    *   उल्लंघन की रिपोर्टिंग: एक्सचेंज को हर पखवाड़े होने वाली निगरानी मीटिंग में सेबी (SEBI) को MWPL के उपयोग या उल्लंघन की जानकारी देनी होगी।

    *   सुधारात्मक कार्रवाई: प्रतिभागियों को किसी भी उल्लंघन को ठीक करने का मौका दिया जाएगा, और एक्सचेंज अतिरिक्त निगरानी मार्जिन भी लगा सकते हैं।

5.  अन्य बदलाव:

    *   प्री-ओपन सेशन: प्री-ओपन सेशन को सिंगल स्टॉक और इंडेक्स दोनों के लिए मौजूदा महीने के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट तक बढ़ाया जाएगा।

    *   कैलेंडर स्प्रेड बेनिफिट: आईसीआईसीआई डायरेक्ट के अनुसार, एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड पर कोई मार्जिन बेनिफिट नहीं मिलेगा।

*   नियम कब से लागू होंगे:

    *   1 जुलाई, 2025: इंडेक्स पोजीशन लिमिट लागू होगी।

    *   1 अक्टूबर, 2025: व्यक्तिगत इकाई-स्तर पर सिंगल स्टॉक के लिए पोजीशन लिमिट लागू होगी।

    *   3 नवंबर, 2025: नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स पर डेरिवेटिव के नियम लागू होंगे।


अभी हल में मुंबई में सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि डेरिवेटिव सेगमेंट में और पाबंदियां लगाने की जरूरत है, क्योंकि पिछले नवंबर से कई उपाय किए जाने के बाद भी वॉल्यूम अभी भी हाई बना हुआ है. उनका कहना है कि इक्विटी डेरिवेटिव की अवधि और मैच्योरिटी बढ़ाने(Weekly Expiry) की जरूरत है.

उद्योग लॉबी फिक्की द्वारा ऑर्गनाइज्ड वार्षिक कैपिटल मार्केट समिट को संबोधित करते हुए, सेबी चेयरमैन ने कहा कि अभी यह प्रपोजल सिर्फ एक विचार प्रक्रिया है और कोई भी डिसीजन लेने से पहले इंडस्ट्री से सलाह ली जाएगी. पांडे ने आगे कहा, इस बारे में एक सलाह पत्र(Consultation Paper) शुरू किया जाएगा। पांडे ने बाद में रिपोर्टर्स से कहा, यह सब सलाह-मशविरे से किया जाएगा। 

इस कदम से इक्विटी मार्केट पर आगे चलकर असर पड़ सकता है, और रेगुलेटर ने वादा किया कि सलाह-मशविरा होगा, और सेबी अभी सिर्फ विचार-विमर्श के लिए एक आइडिया दे रहा है। 

उन्होंने कहा, एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट की अवधि में सुधार की आवश्यकता है।  और कहा कि क्या हमारे पास और लंबे समय के डेरिवेटिव हो सकते हैं।  उन्होंने आगे कहा, हमें कॉन्ट्रैक्ट की अवधि को क्वालिटेटिवली देखना होगा, लेकिन हमें इसे कैलिब्रेट करना होगा।  यह सिर्फ इन-प्रिंसिपल है जो हम कह रहे हैं, कि हमें क्या करना चाहिए। 

इक्विटी डेरिवेटिव का मैदान हाल ही में फोकस में रहा है, और रेगुलेटर ट्रेडिंग की मात्रा को कम करने के लिए अलग-अलग कदम उठा रहा है. उदाहरण के लिए, सेबी ने वीकली कॉन्ट्रैक्ट को घटाकर एक प्रति एक्सचेंज कर दिया है और कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायरी डे भी फिक्स कर दिए हैं। 


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