Mantha Cyclone: चक्रवात 'मोंथा'; बंगाल की खाड़ी में उभरता खतरा, पश्चिम बंगाल में भारी बारिश की आशंका!

Rajeev
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चक्रवात 'मोंथा': बंगाल की खाड़ी में उभरता खतरा, पश्चिम बंगाल में भारी बारिश की आशंका

नमस्कार दोस्तों! आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे मौसमी घटनाक्रम की जो पूर्वी भारत, खासकर पश्चिम बंगाल के लिए चिंता का विषय बन रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने रविवार, 26 अक्टूबर 2025 को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर विकसित हो रहा निम्न दबाव का क्षेत्र तेजी से एक चक्रवाती तूफान में बदलने की कगार पर है। इस तूफान को 'मोंथा' नाम दिया गया है, जो थाईलैंड द्वारा सुझाया गया नाम है। IMD के अनुसार, इस चक्रवात के प्रभाव से 28 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक पश्चिम बंगाल के कई जिलों में जोरदार बारिश होने की संभावना है। यह ब्लॉग इस चक्रवात के बारे में विस्तार से चर्चा करेगा, इसके गठन, प्रभाव, तैयारी और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों पर। आइए, गहराई में उतरते हैं।

चक्रवात 'मोंथा' का गठन और विकास

चक्रवात मौसम विज्ञान की एक जटिल प्रक्रिया है, जहां समुद्र की गर्म सतह पर निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है और हवाओं की गति बढ़ने से यह तूफान का रूप ले लेता है। IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में दक्षिण-पूर्वी हिस्से में एक निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित हुआ है। यह क्षेत्र पिछले कुछ दिनों से सक्रिय था, लेकिन रविवार को इसकी तीव्रता में तेजी आई है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 24-48 घंटों में यह एक डिप्रेशन में बदल सकता है और फिर चक्रवाती तूफान 'मोंथा' का रूप ले लेगा।

बंगाल की खाड़ी चक्रवातों के लिए जाना जाता है क्योंकि यहां का पानी साल भर गर्म रहता है, जो तूफानों को ऊर्जा प्रदान करता है। उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवातों की नामकरण प्रक्रिया क्षेत्रीय देशों द्वारा की जाती है। 'मोंथा' नाम थाईलैंड से आया है, जो एक प्रकार के फूल को दर्शाता है। यह नामकरण विश्व मौसम संगठन (WMO) के तहत होता है ताकि तूफानों की पहचान आसान हो। पिछले सालों में हमने चक्रवात 'डाना', 'फेंगल' जैसे तूफानों को देखा है, जो इसी क्षेत्र में बने थे। 'मोंथा' की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, IMD ने इसे 'गंभीर चक्रवाती तूफान' की श्रेणी में रखने की संभावना जताई है, जहां हवाओं की गति 80-100 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

IMD के बुलेटिन में कहा गया है कि यह तूफान उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है और संभवतः ओडिशा या पश्चिम बंगाल की ओर मुड़ सकता है। हालांकि, अभी लैंडफॉल की सटीक जगह確定 नहीं है, लेकिन मॉडल्स बंगाल तट की ओर इशारा कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे तूफान अधिक तीव्र हो रहे हैं, जैसा कि IPCC की रिपोर्ट्स में उल्लेखित है। बढ़ते समुद्री तापमान से चक्रवातों की संख्या और शक्ति दोनों बढ़ रही हैं।

प्रभावित क्षेत्र और बारिश का अनुमान

IMD की चेतावनी के अनुसार, चक्रवात 'मोंथा' के प्रभाव से पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। विशेष रूप से 28 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक यह प्रभाव सबसे ज्यादा रहेगा। प्रभावित जिलों में दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, हावड़ा, हुगली, कोलकाता, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, नादिया और मुर्शिदाबाद शामिल हैं। इन क्षेत्रों में 100-200 मिमी तक बारिश हो सकती है, जो बाढ़ की स्थिति पैदा कर सकती है।

तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं और ऊंची लहरें उठ सकती हैं, जो मछुआरों के लिए खतरा हैं। IMD ने मछुआरों को 28 अक्टूबर से समुद्र में न जाने की सलाह दी है। इसके अलावा, ओडिशा के कुछ हिस्सों जैसे बालासोर और भद्रक में भी हल्की प्रभाव पड़ सकता है। बारिश के कारण नदियां उफान पर आ सकती हैं, जैसे गंगा, दामोदर और रूपनारायण। पिछले चक्रवात 'डाना' में हमने देखा था कि कैसे भारी बारिश से बाढ़ आई और हजारों लोग प्रभावित हुए। 'मोंथा' भी इसी तरह की चुनौती पेश कर सकता है।

संभावित प्रभाव और जोखिम

चक्रवात न केवल बारिश लाते हैं बल्कि कई अन्य जोखिम भी। तेज हवाओं से पेड़ उखड़ सकते हैं, बिजली के खंभे गिर सकते हैं, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो। तटीय इलाकों में स्टॉर्म सर्ज हो सकता है, जहां समुद्र का पानी 2-3 मीटर तक ऊपर उठ सकता है, जिससे गांव डूब सकते हैं। कृषि पर प्रभाव पड़ेगा – धान की फसल, जो इस मौसम में तैयार होती है, बर्बाद हो सकती है। पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा योगदान है, इसलिए किसानों को नुकसान होगा।

स्वास्थ्य के लिहाज से, बारिश से मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। बाढ़ वाले क्षेत्रों में पीने का पानी दूषित हो सकता है। इसके अलावा, परिवहन प्रभावित होगा – ट्रेनें और बसें रद्द हो सकती हैं, एयरपोर्ट बंद हो सकते हैं। कोलकाता जैसे शहर में ट्रैफिक जाम और जलभराव आम समस्या है, जो और गंभीर हो जाएगी।

तैयारी और सलाह

सरकार और IMD की सलाह मानना जरूरी है। पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले से ही अलर्ट जारी कर दिया है। NDRF की टीमें तैनात की जा रही हैं, राहत सामग्री तैयार है। लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने, आवश्यक सामान स्टॉक करने की सलाह दी गई है। मोबाइल ऐप्स जैसे 'उमंग' या IMD की वेबसाइट से अपडेट लेते रहें।

व्यक्तिगत स्तर पर, घरों में पानी निकासी की व्यवस्था करें, बैटरी, टॉर्च, दवाइयां रखें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। अगर आप तटीय क्षेत्र में रहते हैं, तो निकासी योजना बनाएं। इतिहास से सीखें – 2009 के 'आइला' या 2020 के 'अम्फान' जैसे चक्रवातों से हमने जाना कि तैयारी कितनी महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष: सतर्कता है बचाव

चक्रवात 'मोंथा' एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन मानवीय तैयारी से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। IMD की समय पर चेतावनी से लाखों जीवन बच सकते हैं। जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसे तूफान बढ़ेंगे, इसलिए हमें पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना होगा – वनों की रक्षा, कार्बन उत्सर्जन कम करना। उम्मीद है कि 'मोंथा' ज्यादा नुकसान न पहुंचाए, लेकिन सतर्क रहें। अगर आप प्रभावित क्षेत्र में हैं, तो सुरक्षित रहें और अपडेट्स फॉलो करें।

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