Hurricane Montha wreaked havoc, while Melissa brought a deadly tornado: इधर 'तूफान मोंथा' का मचा कहर, उधर 'मेलिसा' लाया मौत का बवंडर!

Rajeev
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इधर 'तूफान मोंथा' का मचा कहर, उधर 'मेलिसा' लाया मौत का बवंडर

प्रकृति के कोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। एक तरफ बंगाल की खाड़ी में जन्मा चक्रवात 'मोंथा' भारत के पूर्वी तट पर अपनी दहशत बिखेर रहा है, तो दूसरी तरफ कैरेबियन सागर में उठा तूफान 'मेलिसा' हैती, जमैका और क्यूबा में मौत का तांडव कर चुका है। 'मोंथा' ने आंध्र प्रदेश के तटों पर लैंडफॉल कर तबाही मचाई, जिसमें दो जिंदगियां गईं और लाखों हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गईं। वहीं, 'मेलिसा' ने कैरेबियन द्वीपसमूह को रौंदते हुए कम से कम 25 लोगों की जान ले ली, जिसमें ज्यादातर हैती में बाढ़ से डूब गए। अब सवाल उठ रहा है—30 अक्टूबर को भारत के किन शहरों की बारी? क्या यह मौसमी सिस्टम फिर से कहर बरपाएगा? आइए, इस वैश्विक आपदा की पूरी कहानी को समझते हैं।

'मोंथा' का भारत पर प्रहार: तबाही की शुरुआत

भारत में मानसून के बाद भी मौसम करवट ले रहा है। 25 अक्टूबर को दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दाब का क्षेत्र धीरे-धीरे चक्रवात 'मोंथा' में तब्दील हो गया। थाईलैंड द्वारा नामित यह तूफान (जिसका अर्थ है 'सुगंधित फूल') किसी फूल की तरह महकने के बजाय विनाश का प्रतीक बन गया। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 28 अक्टूबर की रात को यह आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम और काकीनाड़ा के बीच लैंडफॉल कर चुका था। हवाओं की रफ्तार 90-100 किमी/घंटा रही, जो 110 किमी/घंटा तक पहुंच गई।

लैंडफॉल के तुरंत बाद 'मोंथा' कमजोर होकर चक्रवाती तूफान बन गया, लेकिन इसका असर कम नहीं हुआ। आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों—कृष्णा, वेस्ट गोदावरी, ईस्ट गोदावरी और काकीनाड़ा—में भारी बारिश ने जलप्रलय ला दिया। प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, 87,000 हेक्टेयर से ज्यादा फसलें (खासकर धान) बर्बाद हो गईं। दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है—एक कोनसीमा जिले में बिजली गिरने से और दूसरी घटना में। पेड़ उखड़ गए, सड़कें टूट गईं, और बिजली के खंभे ढह गए। विशाखापट्टनम हवाई अड्डे पर 32 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि ओडिशा में 2,000 से ज्यादा राहत केंद्र खोले गए।

तेलंगाना के 14 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा मंडरा रहा है। हैदराबाद और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश जारी है। ओडिशा के गजपति जिले में भूस्खलन से स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए। मुख्यमंत्री मोहन चरण माजी ने 11,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। तमिलनाडु के चेन्नई में जलभराव ने यातायात ठप कर दिया। आईएमडी के अनुसार, 'मोंथा' अब उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है और अगले 12 घंटों में गहरे निम्न दाब में बदल सकता है। लेकिन इसका असर 30 अक्टूबर तक बना रहेगा।

कैरेबियन में 'मेलिसा' का रौद्र रूप: 25 मौतें, हाहाकार मचा

जब भारत 'मोंथा' से जूझ रहा था, उसी वक्त कैरेबियन में 'मेलिसा' नामक तूफान ने अपना असली रंग दिखाया। यह 2025 का सबसे ताकतवर तूफान है, जो कैटेगरी 5 तक पहुंच गया था—हवाओं की रफ्तार 175 मील प्रति घंटा (लगभग 280 किमी/घंटा)! 21 अक्टूबर को उभरा यह सिस्टम धीमी गति से बढ़ा, जिससे बारिश का कहर लंबा खिंचा।

हैती सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। पेटी-गोएव जैसे इलाकों में बाढ़ ने 20 से ज्यादा लोगों को लील लिया। नदियां उफान पर आ गईं, घर बह गए, और 160 से ज्यादा आवास जलमग्न हो गए। जमैका में 8 मौतें हुईं—एक नवजात शिशु पर पेड़ गिरने से। वेस्टमोरलैंड में अस्पताल की छत उड़ गई। डोमिनिकन गणराज्य में एक मौत और बाढ़ ने सड़कें बंद कर दीं। क्यूबा के सैंटियागो डे क्यूबा में बाढ़ पानी घुस गया, जहां लोग कुत्तों और सामान के साथ पानी में तैरते नजर आए।

अमेरिकी नेशनल हरिकेन सेंटर (एनएचसी) ने चेतावनी दी थी कि 40 इंच तक बारिश और 13 फीट ऊंची स्टॉर्म सर्ज 'विनाशकारी' होगी। 'मेलिसा' अब कैटेगरी 1 बन चुका है, बहामास से गुजर रहा है, और बरमूडा की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका ने जमैका, हैती और बहामास के लिए राहत टीम भेजी है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे 'मानवीय संकट' करार दिया है। हैती, जो पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है, अब बाढ़ और भूस्खलन से त्रस्त है।

30 अक्टूबर को भारत के किन शहरों पर संकट?

'मोंथा' का केंद्र अब नरसापुर के पास है, जो उत्तर की ओर बढ़ रहा है। आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक, 30 अक्टूबर को इसका असर कई राज्यों में दिखेगा। बिहार, झारखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, तेलंगाना और सौराष्ट्र-कच्छ में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी है।

खास शहरों पर नजर डालें तो:

  • रांची (झारखंड): भारी बारिश जारी, संथाल परगना में बहुत भारी वर्षा संभव। सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा जैसे इलाकों में फ्लैश फ्लड का खतरा।
  • पटना (बिहार): 30-31 अक्टूबर तक मध्यम से भारी बारिश, नदियां उफान पर आ सकती हैं।
  • नागपुर (महाराष्ट्र-विदर्भ): 29-30 अक्टूबर को भारी वर्षा, बाढ़ की आशंका।
  • हैदराबाद (तेलंगाना): फ्लैश फ्लड रिस्क 14 जिलों में, हल्की बारिश जारी।
  • कोलकाता (पश्चिम बंगाल): 29-31 अक्टूबर तक गंगा के तटीय इलाकों में भारी बारिश, जलभराव संभव।
  • भुवनेश्वर (ओडिशा): 30 अक्टूबर को अलग-थलग भारी वर्षा, तटीय इलाकों में हाई अलर्ट।

साउथ सेंट्रल रेलवे ने 30 अक्टूबर को हावड़ा-सेकुंडराबाद फलकनुमा एक्सप्रेस रद्द कर दी है। स्कूल-कॉलेज बंद हैं, और एनडीआरएफ टीमें तैनात।

जलवायु परिवर्तन का आईना: क्यों बढ़ रही आपदाएं?

ये तूफान संयोग नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का नतीजा हैं। गर्म समुद्र तापमान से तूफान तेज हो रहे हैं। 'मोंथा' और 'मेलिसा' दोनों ही देर-सप्टाह के सिस्टम हैं, जो सामान्य से ज्यादा तीव्र बने। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग से चक्रवातों की संख्या भले कम हो, लेकिन तीव्रता बढ़ रही है। भारत में 2019-2025 के बीच 30 से ज्यादा चक्रवात आए, जिनमें से 6 गंभीर थे। कैरेबियन में 'मेलिसा' जैसी घटनाएं गरीब देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही हैं।

निष्कर्ष: सतर्कता ही सुरक्षा

'मोंथा' और 'मेलिसा' ने साबित कर दिया कि प्रकृति के आगे इंसान कितना लाचार है। भारत में सरकारें सतर्क हैं—एवाक्यूएशन, राहत केंद्र और अलर्ट सिस्टम सक्रिय हैं। लेकिन हमें भी जागरूक रहना होगा: मौसम अपडेट चेक करें, सुरक्षित स्थानों पर रहें, और जलवायु संरक्षण में योगदान दें। 30 अक्टूबर को रांची, पटना, नागपुर जैसे शहरों में बारिश का दौर जारी रहेगा, लेकिन अगर हम तैयार रहें, तो नुकसान कम हो सकता है। ये आपदाएं हमें याद दिलाती हैं—पृथ्वी हमारी है, इसे बचाना हमारा फर्ज।

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