25 अक्टूबर, 2025
भारतीय टेलीविजन और सिनेमा के एक चमकते सितारे ने आज हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 'सराभाई वर्सेज सराभाई' में इंड्रडा मयूर शाह और 'मैं हूँ ना' में प्रोफेसर रसाई की यादगार भूमिकाओं से घर-घर में छा जाने वाले इस कलाकार ने लाखों दर्शकों के दिलों में कॉमेडी का ऐसा जादू बिखेरा था, जो कभी फीका नहीं पड़ेगा।
प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की कहानी
सतीश शाह का जन्म 25 जून 1951 को मुंबई में एक गुजराती परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था। उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे से अभिनय की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की। शुरुआती दौर में उन्होंने थिएटर से करियर की शुरुआत की और कई नाटकों में अपनी कॉमिक टाइमिंग का लोहा मनवाया।
बॉलीवुड में उनका सफर 1980 के दशक में शुरू हुआ। छोटे-मोटे रोल से लेकर सहायक अभिनेता तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन उनकी बेमिसाल कॉमेडी और चरित्र अभिनय ने उन्हें धीरे-धीरे पहचान दिलाई।
टेलीविजन का बेताज बादशाह: सराभाई वर्सेज सराभाई
सतीश शाह को असली पहचान मिली 2004 में शुरू हुए धारावाहिक 'सराभाई वर्सेज सराभाई' से। इसमें उन्होंने इंद्रवदन सराभाई उर्फ इंड्रडा मयूर की भूमिका निभाई थी। एक अमीर, जिद्दी, लेकिन बेहद मजेदार गुजराती बिजनेसमैन का किरदार, जिसकी पत्नी माया सराभाई (रत्नाबाली भट्टाचार्जी) से रोज की नोंक-झोंक दर्शकों को हंसाते-हंसाते लोटपोट कर देती थी।
"माया, तुम्हारी ये आर्ट गैलरी... ये क्या है? ये तो पिकासो का चेहरा भी नहीं पहचानता!"
ये डायलॉग आज भी सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। सतीश शाह की बॉडी लैंग्वेज, गुजराती उच्चारण, और चेहरे के हाव-भाव ने इंड्रडा को अमर बना दिया। शो के दोनों सीजन (2004-06 और 2017) में उनकी परफॉर्मेंस को क्रिटिक्स ने 'मास्टरक्लास इन कॉमेडी' कहा।
बॉलीवुड में कॉमेडी का परचम
सतीश शाह ने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया। चाहे 'जाने भी दो यारो' (1983) में म्युनिसिपल कमिश्नर का रोल हो, 'हीरो हीरालाल' (1988) में वकील, या 'कभी हाँ कभी ना' (1994) में शाहरुख खान के पिता – हर किरदार में उन्होंने कॉमेडी का तड़का लगाया।
लेकिन उनकी सबसे यादगार फिल्म रही 'मैं हूँ ना' (2004)। फराह खान के डायरेक्शन में बने इस ब्लॉकबस्टर में उन्होंने प्रोफेसर रसाई का किरदार निभाया था। कॉलेज का सनकी, लेकिन प्यारा प्रोफेसर, जो 'लव' शब्द सुनते ही नाचने लगता था।
"लव... लव... लव... ये लव क्या होता है?"
शाहरुख खान और सुष्मिता सेन के साथ उनका सीन आज भी यूट्यूब पर लाखों बार देखा जाता है। फिल्म में उनकी एंट्री के साथ ही हॉल में तालियां बजने लगती थीं।
अन्य यादगार किरदार
- 'फिल्मी चक्कर' (1995) – एक पागल प्रोड्यूसर
- 'हम हैं राही प्यार के' (1993) – जूही चावला के पिता
- 'बड़े मियाँ छोटे मियाँ' (1998) – पुलिस इंस्पेक्टर
- 'कल हो ना हो' (2003) – शाहरुख के दोस्त का पिता
उन्होंने कई गुजराती नाटकों में भी अभिनय किया और आवाज अभिनय (डबिंग) में भी हाथ आजमाया।
अंतिम समय और निधन
सूत्रों के अनुसार, सतीश शाह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्हें दिल का दौरा पड़ा और मुंबई के एक निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था। आज सुबह 25 अक्टूबर 2025 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी मधु शाह (जो खुद एक अभिनेत्री और प्रोड्यूसर हैं) और बेटा हैं।
उद्योग की प्रतिक्रिया
उनके निधन की खबर आते ही बॉलीवुड और टीवी जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
- रत्नाबाली भट्टाचार्जी (माया सराभाई):
- शाहरुख खान:"
- फराह खान:
विरासत
सतीश शाह ने कभी लीड रोल नहीं मांगा, लेकिन सहायक किरदारों में भी हीरो बन गए। उनकी कॉमिक टाइमिंग, आवाज का मॉड्यूलेशन, और चेहरे के भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिनय की पाठशाला हैं।
'सराभाई वर्सेज सराभाई' के फैंस आज भी डिज्नी+ हॉटस्टार पर री-रन देखते हैं और इंड्रडा मयूर की हर डायलॉग पर ठहाके लगाते हैं। उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन उनकी फिल्में और शोज हमें हमेशा हंसाते रहेंगे।
सतीश शाह अमर रहें।