Weather Update: मौसम अपडेट; अब अरब सागर से उठा खतरा, बिहार-बंगाल में IMD का अलर्ट!

Rajeev
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मौसम अपडेट: अब अरब सागर से उठा खतरा, बिहार-बंगाल में IMD का अलर्ट, गैस चैंबर बना दिल्ली-NCR, AQI 400 पार

31 अक्टूबर 2025, नई दिल्ली – भारत का मौसम एक बार फिर अपनी क्रूरता दिखा रहा है। जहां एक ओर अरब सागर में विकसित हो रही डिप्रेशन से पूर्वी तटों पर खतरा मंडरा रहा है, वहीं बिहार और बंगाल में भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी कर दिया है। दूसरी तरफ, दिल्ली-एनसीआर धुंध और प्रदूषण के जाल में फंस चुका है, जहां AQI 400 से ऊपर पहुंच गया है। इसे 'गैस चैंबर' कहना अतिशयोक्ति नहीं लगती, क्योंकि सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। इस ब्लॉग में हम इन मौसमी घटनाओं का विस्तार से विश्लेषण करेंगे, कारणों को समझेंगे और सावधानियों पर चर्चा करेंगे।

अरब सागर का नया खतरा: साइक्लोन 'मोंथा' की छाया

अरब सागर, जो आमतौर पर बंगाल की खाड़ी जितना सक्रिय नहीं होता, इस बार फिर चक्रवाती तूफान का केंद्र बन गया है। IMD के अनुसार, पूर्वी मध्य अरब सागर में विकसित हो रही डिप्रेशन अब तेजी से मजबूत हो रही है। यह सिस्टम मुंबई से लगभग 700 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में स्थित है और अगले 36 घंटों में उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ सकता है। हालांकि, IMD ने स्पष्ट किया है कि यह भारतीय तट पर लैंडफॉल नहीं करेगा, लेकिन इसके प्रभाव से गुजरात, कोंकण और गोवा तटों पर 55 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं चलेंगी।

यह खतरा साइक्लोन 'मोंथा' के अवशेषों से जुड़ा है, जो बंगाल की खाड़ी में आंध्र प्रदेश तट पर लैंडफॉल के बाद कमजोर हो गया। 26 अक्टूबर को गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में सक्रिय 'मोंथा' ने आंध्र के काकीनाडा के पास 90-100 किमी/घंटा की हवाओं के साथ तबाही मचाई। अब इसके अवशेष पूर्वी और मध्य भारत में भारी वर्षा का कारण बन रहे हैं। भारतीय सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है, खासकर तटीय इलाकों में। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अरब सागर में चक्रवातों की संख्या बढ़ रही है, जो पहले बंगाल की खाड़ी तक सीमित थे।

बिहार-बंगाल में IMD का अलर्ट: बाढ़ और तबाही का डर

साइक्लोन 'मोंथा' के कमजोर होने के बावजूद, इसका असर बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और सिक्किम तक फैल गया है। IMD ने 31 अक्टूबर तक इन राज्यों में भारी से अति भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है। पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों और सिक्किम में 31 अक्टूबर को अलग-अलग स्थानों पर अति भारी बारिश (125 मिमी से अधिक) हो सकती है। बिहार में पटना, भागलपुर, दरभंगा जैसे जिलों में ऑरेंज अलर्ट है, जबकि कोलकाता और दक्षिण 24 परगना में भारी बारिश से जलभराव का खतरा है।

इस वर्षा से गंगा के मैदानी इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। IMD के अनुसार, 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम वर्षा होगी। पूर्वी भारत के 18 राज्यों में कुल मिलाकर भारी वर्षा का पूर्वानुमान है, जिसमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा भी शामिल हैं। फ्लैश फ्लड, सड़कों पर पानी भरना और फसल नुकसान की आशंका से स्थानीय प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। बिहार सरकार ने विशेष अधिकारी नियुक्त किए हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में एनडीआरएफ टीमें तैनात हैं।

दिल्ली-एनसीआर: गैस चैंबर में सांसें थम सी गईं, AQI 400 पार

जब पूर्वी भारत पानी-पानी हो रहा है, वहीं उत्तर भारत प्रदूषण के कालो धन में डूबा है। दिल्ली-एनसीआर में AQI 31 अक्टूबर को 400 से ऊपर पहुंच गया है, जो 'गंभीर' श्रेणी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, आनंद विहार में AQI 420, रोहिणी में 415 और द्वारका में 410 दर्ज किया गया। PM2.5 का स्तर 300 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से 15 गुना ज्यादा है।

इस प्रदूषण का मुख्य कारण दिवाली के पटाखों का धुआं, पराली जलाना, वाहनों का धुआं और स्थिर हवा है। ठंडी हवाओं के अभाव में स्मॉग की परत मोटी हो गई है, जिससे विजिबिलिटी 200 मीटर तक गिर गई। स्कूल बंद हैं, निर्माण कार्य रुके हैं और GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के तहत ऑड-ईवन लागू हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह हवा सांस, फेफड़ों और हृदय रोगियों के लिए घातक है। बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है।

कारण और प्रभाव: जलवायु परिवर्तन की चेतावनी

ये मौसमी घटनाएं जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत हैं। ग्लोबल वार्मिंग से समुद्र का तापमान बढ़ा है, जिससे चक्रवात मजबूत हो रहे हैं। अरब सागर में अब चक्रवातों की आवृत्ति बढ़ी है, जबकि दिल्ली का प्रदूषण शहरीकरण और कृषि अवशेष जलाने का नतीजा है। इनसे बाढ़, सूखा, सांस संबंधी बीमारियां और आर्थिक नुकसान हो रहा है। 2025 में ही साइक्लोन 'शक्ति' ने गुजरात को प्रभावित किया था, जो इसी ट्रेंड का हिस्सा है।

सावधानियां और समाधान: क्या करें आम आदमी?

  • चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में: घरों को मजबूत करें, रेडियो पर अपडेट सुनें, ऊंचे स्थानों पर जाएं। बाढ़ के लिए रेत की बोरियां तैयार रखें।
  • प्रदूषण से बचाव: मास्क पहनें (N95), एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें, आउटडोर एक्टिविटी बंद करें। पानी ज्यादा पिएं और ह्यूमिडिफायर चलाएं।
  • लंबे उपाय: सरकार को हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और पराली प्रबंधन पर जोर देना चाहिए। आम जनता पेड़ लगाए, पटाखे न फोड़ें।

निष्कर्ष: प्रकृति का संतुलन बहाल करें

भारत का मौसम अब अनिश्चित हो गया है – एक तरफ बाढ़, दूसरी तरफ धुंध। अरब सागर का खतरा, बिहार-बंगाल की बरसात और दिल्ली का गैस चैंबर हमें चेतावनी दे रहे हैं कि पर्यावरण संरक्षण अब जरूरी है। IMD के अलर्ट को गंभीरता से लें और सुरक्षित रहें। आशा है कि ये विपत्तियां हमें बेहतर भविष्य की ओर प्रेरित करेंगी।

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