जेनेरेटिव UI(Generative UI): हर प्रॉम्प्ट के लिए एकदम कस्टम, रिच और इंटरैक्टिव विज़ुअल अनुभव का नया दौर!

Rajeev
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जेनेरेटिव UI(Generative UI): हर प्रॉम्प्ट के लिए एकदम कस्टम, रिच और इंटरैक्टिव विज़ुअल अनुभव का नया दौर!

2025 में गूगल ने एक क्रांतिकारी तकनीक पेश की है जिसे “Generative UI” या “जेनेरेटिव यूजर इंटरफेस” कहा जा रहा है। इसे गूगल के फेलो यानिव लेवियाथन (Yaniv Leviathan), सीनियर स्टाफ सॉफ्टवेयर इंजीनियर दानी वालेव्स्की (Dani Valevski) और गूगल रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट योसी मतियास (Yossi Matias) ने मिलकर विकसित किया है।

यह तकनीक अब Gemini ऐप और Google Search के AI Mode में रोल आउट हो रही है।

जेनेरेटिव UI आखिर है क्या?

साधारण शब्दों में कहें तो अब AI सिर्फ़ टेक्स्ट या इमेज नहीं बनाता — वह आपके हर सवाल या प्रॉम्प्ट के लिए एक पूरा का पूरा कस्टम, इंटरैक्टिव और विज़ुअली आकर्षक यूजर इंटरफेस (वेबपेज, गेम, टूल, सिमुलेशन, ऐप जैसी चीज़) तुरंत जेनरेट कर देता है।

यानी आपने सिर्फ़ एक शब्द लिखा “फ्रैक्टल” या पूरा वाक्य लिखा “5 साल के बच्चे को माइक्रोबायोम सरल तरीके से समझाओ” — AI आपके लिए एक ख़ास इंटरैक्टिव पेज बना देगा जो बिल्कुल उसी यूज़र के हिसाब से डिज़ाइन किया गया हो।

यह पारंपरिक स्थिर (static) चैट इंटरफेस से बिल्कुल अलग है।

असली उदाहरण जो आपको हैरान कर देंगे

  1. प्रॉम्प्ट: “वैन गॉग की पेंटिंग्स की गैलरी बनाओ, हर पेंटिंग के साथ उसका जीवन संदर्भ भी दिखाओ”
    → Gemini ने पूरा इंटरैक्टिव आर्ट गैलरी पेज जेनरेट कर दिया।
  2. प्रॉम्प्ट: “RNA पॉलीमरेज़ कैसे काम करता है? ट्रांसक्रिप्शन के स्टेज बताओ और प्रोकार्योटिक-यूकार्योटिक में अंतर समझाओ”
    → AI Mode में एक एनिमेटेड, इंटरैक्टिव 3D सिमुलेशन बन गया जिसमें आप हर स्टेप को क्लिक करके देख सकते हैं।
  3. प्रॉम्प्ट: “मुझे समर आउटफिट आइडियाज़ चाहिए, मैं 30 साल की कामकाजी महिला के लिए”
    → पूरा फैशन लुकबुक with स्वाइप करने योग्य कार्ड्स, कलर पैलेट और शॉपिंग लिंक।

यह तकनीक कैसे काम करती है?

गूगल के नए पेपर “Generative UI: LLMs are Effective UI Generators” में पूरी तकनीक समझाई गई है। मुख्य तीन कंपोनेंट हैं:

  1. टूल एक्सेस – इमेज जेनरेशन, वेब सर्च आदि टूल्स रियल-टाइम में उपलब्ध।
  2. ख़ास सिस्टम प्रॉम्प्ट्स – AI को बताया गया है कि इंटरफेस कैसा होना चाहिए, क्या गलतियाँ नहीं करनी।
  3. पोस्ट-प्रोसेसिंग – आउटपुट को साफ़-सुथरा और सुरक्षित बनाया जाता है।

इसके लिए Gemini 3 Pro मॉडल का इस्तेमाल हो रहा है जो कोड लिखने (agentic coding) में बहुत मज़बूत है।

कहाँ-कहाँ मिलेगा यह फ़ीचर?

  • Gemini ऐप में:
    • Dynamic View (मुख्य एक्सपेरिमेंट)
    • Visual Layout
(दोनों आज से रोल आउट हो रहे हैं, शुरुआत में कुछ यूज़र्स को एक ही दिखेगा)
  • Google Search के AI Mode में (केवल Google AI Pro और Ultra सब्सक्राइबर्स के लिए, अभी सिर्फ़ USA):
  • मॉडल ड्रॉपडाउन से “Thinking” सिलेक्ट करें।

यूज़र्स इसे कितना पसंद कर रहे हैं?

गूगल ने PAGEN नाम का नया डेटासेट बनाया और ह्यूमन रेटिंग करवाई। नतीजे चौंकाने वाले हैं:

  • ह्यूमन एक्सपर्ट्स द्वारा बनाए गए पेज → सबसे ज़्यादा पसंद
  • जेनेरेटिव UI द्वारा बनाए गए पेज → दूसरे नंबर पर (बहुत करीब)
  • नॉर्मल टेक्स्ट/मार्कडाउन आउटपुट → काफ़ी पीछे

यानी स्पीड को इग्नोर करें तो लोग जेनेरेटिव UI को बहुत ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।

भविष्य में क्या होगा?

गूगल का कहना है कि अभी यह शुरुआत है। आगे चलकर:

  • जेनरेशन स्पीड बहुत तेज़ हो जाएगी (अभी कभी-कभी 1 मिनट से ज़्यादा लगता है)
  • और ज़्यादा सर्विसेज से कनेक्ट होगा
  • यूज़र फीडबैक के हिसाब से रियल-टाइम में खुद को बदलेगा
  • एक दिन पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम या ऐप स्टोर की जगह AI आपके लिए हर बार नया इंटरफेस बनाएगा

निष्कर्ष

जेनेरेटिव UI इंटरनेट और AI के इस्तेमाल के तरीके को हमेशा के लिए बदलने वाला है। अब आपको पहले से बने ऐप्स या वेबसाइट्स में से चुनना नहीं पड़ेगा — AI आपके हर सवाल के लिए एकदम परफेक्ट, ख़ूबसूरत और इंटरैक्टिव अनुभव तुरंत बना देगा।

अगर आप Gemini ऐप या Google AI Pro सब्सक्रिप्शन यूज़ करते हैं, तो आज ही “Dynamic View” या AI Mode में “Thinking” मॉडल ट्राय करें — आप हैरान रह जाएँगे!

क्या आपने अभी तक जेनेरेटिव UI ट्राय किया है? कमेंट में अपना अनुभव ज़रूर शेयर करें।

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