मुंबई मेयर बनने के लिए किसी 'खान' को अनुमति नहीं देंगे: मामदानी की जीत के बाद बीजेपी नेता का बयान
मुंबई, 5 नवंबर 2025: मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मेयर पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में हुई आंतरिक चुनाव प्रक्रिया में शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवार इस्माइल मामदानी की जीत ने सत्तारूढ़ महायुति को बैकफुट पर ला दिया है। इस जीत के ठीक बाद मुंबई बीजेपी प्रमुख अमित सताम ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "हम किसी भी 'खान' को मुंबई का मेयर बनने की अनुमति नहीं देंगे। कुछ लोग राजनीतिक सत्ता बनाए रखने के लिए तुष्टिकरण का रास्ता अपना रहे हैं, लेकिन मुंबई की जनता हिंदुत्व और विकास के एजेंडे पर ही विश्वास करती है।"
सताम का यह बयान बीएमसी की जिला स्तरीय समितियों के चुनाव परिणामों के बाद आया है, जहां मामदानी ने शिवसेना (यूबीटी) की ओर से एक महत्वपूर्ण जिला समिति में जीत हासिल की। बीजेपी के अनुसार, यह जीत विपक्ष की 'वोटबैंक पॉलिटिक्स' का हिस्सा है, जो मुस्लिम समुदाय को लुभाने के लिए की जा रही है। सताम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मुंबई हिंदू बहुल शहर है। यहां की सत्ता हिंदुत्व के सिद्धांतों पर टिकी हुई है। मामदानी जैसे नेताओं को बढ़ावा देकर उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी मुस्लिम तुष्टिकरण कर रही है, जो शहर के विकास के लिए घातक साबित होगा। हम महायुति के बहुमत का इस्तेमाल करके मेयर पद पर किसी भी ऐसे उम्मीदवार को आने से रोकेंगे जो सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करे।"
बीएमसी चुनाव की पृष्ठभूमि: मुंबई महानगरपालिका 2022 के आम चुनावों के बाद से ही राजनीतिक घमासान का केंद्र बनी हुई है। महायुति (बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी) ने 227 में से 133 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था, लेकिन मेयर पद पर विवाद लंबे समय से चल रहा है। विपक्षी महाविकास अघाड़ी (शिवसेना-यूबीटी, एनसीपी-एसपी, कांग्रेस) ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ गठबंधन जानबूझकर मेयर चुनाव टाल रहा है ताकि बीजेपी परंपरागत रूप से आरक्षित सीटों पर कब्जा कर सके। हाल के जिला समिति चुनावों में शिवसेना (यूबीटी) को कई जगह सफलता मिली, जिसमें इस्माइल मामदानी की जीत प्रमुख है। मामदानी, जो दक्षिण मुंबई के एक प्रमुख मुस्लिम बहुल इलाके से आते हैं, ने अपनी जीत को "लोकतंत्र की जीत" बताते हुए कहा, "मुंबई सभी समुदायों का शहर है। हम विकास और समावेशी नीतियों के लिए लड़ेंगे, न कि सांप्रदायिकता के लिए।"
अमित सताम, जो मुंबई बीजेपी के कट्टर हिंदुत्व समर्थक माने जाते हैं, ने अपने बयान में विपक्ष पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, "उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व को भुला दिया है। अब वे 'खान' और 'अली' जैसे नामों को आगे बढ़ाकर सत्ता की भूख मिटा रहे हैं। लेकिन मुंबई की सड़कों पर उतरने वाली जनता जानती है कि असली खतरा किससे है। हम बीजेपी कार्यकर्ताओं को निर्देश दे चुके हैं कि वे हर स्तर पर सतर्क रहें। मेयर चुनाव में यदि मामदानी या कोई अन्य 'तुष्टिकरण का प्रतीक' उम्मीदवार आया, तो हम स्ट्रीट प्रोटेस्ट से लेकर विधानसभा तक लड़ेंगे।"
इस बयान ने विपक्षी दलों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "सताम जी की यह भाषा मुंबई के विविधता को ठेस पहुंचाती है। बीजेपी खुद सांप्रदायिक विभाजन की राजनीति कर रही है। मामदानी की जीत मेहनत और जनसमर्थन की जीत है, न कि किसी साजिश की। हम अदालत का रुख करेंगे यदि मेयर चुनाव में हेरफेर हुआ।" इसी तरह, एनसीपी (एसपी) नेता जितेंद्र आव्हाड ने सोशल मीडिया पर लिखा, "बीजेपी का 'खान' विरोध हिंदुत्व नहीं, बल्कि नफरत की राजनीति है। मुंबई को ऐसा नेता चाहिए जो सभी को साथ ले जाए।"
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से ठीक पहले तेज हो सकता है। 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति ने बहुमत हासिल किया था, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में विपक्ष ने वापसी की कोशिश की है। प्रोफेसर रवि शर्मा, जो मुंबई यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञ हैं, ने कहा, "सताम का बयान बीजेपी की कोर वोटबैंक को मजबूत करने की रणनीति है। लेकिन यह मुंबई जैसे कॉस्मोपॉलिटन शहर में उल्टा पड़ सकता है, जहां मुस्लिम वोटर 20 प्रतिशत से अधिक हैं। तुष्टिकरण का आरोप विपक्ष पर लगाना आसान है, लेकिन विकास के मुद्दों पर बहस जरूरी है।"
बीएमसी चुनाव की जटिलताएं: मुंबई महानगरपालिका अधिनियम के अनुसार, मेयर का चुनाव हर साल अप्रैल में होता है, लेकिन कोविड-19 और राजनीतिक विवादों के कारण यह प्रक्रिया ठप हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार हस्तक्षेप किया है। वर्तमान में, महापौर पद पर बीजेपी की इशानी शेट्टी कायम हैं, लेकिन उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला है। विपक्ष का दावा है कि आरक्षण के आधार पर अगला मेयर मुस्लिम समुदाय से होना चाहिए, जो मामदानी जैसे नेताओं को मौका देता है। महायुति ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष लेंगे।
सताम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे कहा, "मुंबई का विकास हमारी प्राथमिकता है। हमने स्लम रिहैबिलिटेशन, मेट्रो प्रोजेक्ट्स और जल जीवन मिशन में रिकॉर्ड निवेश किया है। विपक्ष केवल सांप्रदायिक कार्ड खेलकर जनता को भ्रमित कर रहा है। 'खान' बनाम 'शाह' की राजनीति अब पुरानी हो चुकी है। मुंबईवासी अब केवल परिणाम चाहते हैं।" उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे आगामी दिनों में 'हिंदुत्व जागरण' अभियान चलाएं, जिसमें मंदिरों और हिंदू संगठनों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किए जाएं।
विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता नसीम खान ने भी बयान जारी किया। उन्होंने कहा, "बीजेपी का यह रुख संविधान विरोधी है। नाम के आधार पर भेदभाव अस्वीकार्य है। हम सभी दलों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करेंगे।" इस बीच, मुंबई पुलिस ने संभावित तनाव को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में फोर्स तैनात कर दी है।
यह विवाद मुंबई की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। जहां एक ओर बीजेपी हिंदुत्व के मुद्दे को उछालकर अपनी एकजुटता दिखा रही है, वहीं विपक्ष समावेशी राजनीति का दावा कर रहा है। आने वाले दिनों में मेयर चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला निर्णायक साबित होगा। फिलहाल, सताम का बयान राजनीतिक बहस को और गरमा चुका है, और मुंबई की सड़कें एक बार फिर चुनावी रंग में रंगने लगी हैं।