कंपनी का परिचय: भारत का नंबर वन हेलमेट ब्रांड
स्टड्स एक्सेसरीज लिमिटेड की स्थापना 1977 में हरियाणा के फरीदाबाद में हुई थी। आज यह भारत का सबसे बड़ा दोपहिया हेलमेट निर्माता है, जो बाजार में 25% से अधिक हिस्सेदारी रखता है। कंपनी न केवल हेलमेट बनाती है, बल्कि मोटरसाइकिल एक्सेसरीज जैसे गॉगल्स, बैग्स और अन्य सेफ्टी प्रोडक्ट्स भी उत्पादित करती है। स्टड्स के उत्पाद 30 से अधिक देशों में निर्यात होते हैं, जो कंपनी की वैश्विक पहुंच को दर्शाता है। फिस्कल ईयर 2025 में कंपनी का राजस्व 584 करोड़ रुपये रहा, जिसमें निर्यात से 22.77% (लगभग 34 करोड़ रुपये) की हिस्सेदारी थी।
कंपनी की सफलता का राज है इसकी इनोवेटिव टेक्नोलॉजी और क्वालिटी फोकस। स्टड्स के हेलमेट्स ISI मार्क वाले होते हैं और वे सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को पूरा करते हैं। भारत में बढ़ते दोपहिया वाहनों की संख्या (वर्तमान में 20 करोड़ से अधिक) के साथ, स्टड्स जैसी कंपनियों के लिए बाजार अनुमानित 5,000 करोड़ रुपये का है, जो सालाना 10-12% की दर से बढ़ रहा है। प्रमोटर्स का होल्डिंग लिस्टिंग के बाद भी 61.8% है, जो कंपनी में उनके विश्वास को दिखाता है। स्टड्स की मार्केट कैप लिस्टिंग के बाद 2,205 करोड़ रुपये हो गई, जो एक मजबूत मूल्यांकन को इंगित करती है।
आईपीओ की मुख्य विशेषताएं: बुक बिल्ट इश्यू का जलवा
स्टड्स एक्सेसरीज आईपीओ एक बुक बिल्ट इश्यू था, जिसमें कोई फ्रेश इश्यू नहीं था – पूरी तरह प्रमोटर्स द्वारा शेयरों की बिक्री। कुल 77.86 लाख इक्विटी शेयर (0.78 करोड़) ऑफर किए गए, जिनकी कीमत बैंड 557 से 585 रुपये प्रति शेयर थी। ऊपरी बैंड पर कुल मूल्य 455.49 करोड़ रुपये आया। लॉट साइज 25 शेयरों का था, यानी न्यूनतम निवेश 14,625 रुपये (ऊपरी बैंड पर)। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए 50% कोटा, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) के लिए 15% और रिटेल के लिए 35% आरक्षित था।
बिडिंग अवधि 30 अक्टूबर से 3 नवंबर तक चली, जो निवेशकों को पर्याप्त समय देती थी। इस दौरान आईपीओ को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला – कुल सब्सक्रिप्शन 73.25 गुना रहा। QIB कैटेगरी में 137 गुना, NII में 153 गुना और रिटेल में 20 गुना ओवरसब्सक्रिप्शन हुआ। यह आंकड़े कंपनी की लोकप्रियता और बाजार की भूख को दर्शाते हैं। लीड मैनेजर्स में कोटक महिंद्रा कैपिटल और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज शामिल थे, जिन्होंने बुक बिल्डिंग प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित किया।
आवंटन 4 नवंबर को फाइनल हुआ, जहां लकी ड्रॉ के जरिए शेयर बांटे गए। कई निवेशकों को लॉट के हिसाब से शेयर मिले, जबकि हाई डिमांड के कारण कुछ को कम या शून्य आवंटन मिला। रिफंड प्रक्रिया तुरंत शुरू हो गई, और क्रेडिट डीमैट अकाउंट में 5-6 नवंबर तक पूरा हो गया।
लिस्टिंग का प्रदर्शन: हल्की गिरावट, लेकिन लॉन्ग टर्म पोटेंशियल
7 नवंबर 2025 को स्टड्स एक्सेसरीज के शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हुए। अपेक्षाओं के विपरीत, लिस्टिंग प्रीमियम कम रहा। एनएसई पर शेयर 565 रुपये पर खुले, जो इश्यू प्राइस 585 रुपये से 3.42% (20 रुपये) की छूट पर था। बीएसई पर भी समान ट्रेंड देखा गया। GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) लिस्टिंग से पहले 10-15 रुपये था, लेकिन बाजार की अस्थिरता के कारण यह फ्लैट रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है। एनालिस्ट अनिल सिंघवी ने सलाह दी कि लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए स्टड्स एक अच्छा बेट है, क्योंकि कंपनी का P/E रेशियो 32x है, जो पीयर्स से तुलनात्मक है। बाजार में वैल्यूएशन 2,205 करोड़ रुपये पर स्थिर है, और कंपनी की ग्रोथ रेट 15-20% सालाना है।
वित्तीय हाइलाइट्स: मजबूत फंडामेंटल्स
स्टड्स की वित्तीय स्थिति ठोस है। फिस्कल ईयर 2025 में राजस्व 584 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 के 457 करोड़ से 28% अधिक है। नेट प्रॉफिट 69.6 करोड़ रुपये (FY24 में 57.23 करोड़) हो गया, जो 22% की वृद्धि दर्शाता है। EBITDA मार्जिन 18-20% के बीच रहा, जो कुशल ऑपरेशंस को दिखाता है। कंपनी के पास 5 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जो सालाना 2 करोड़ हेलमेट उत्पादन क्षमता रखती हैं। डेट-फ्री बैलेंस शीट और 25% ROE कंपनी की आकर्षकता बढ़ाते हैं। हालांकि, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रतिस्पर्धा (जैसे सेफ्टी हेलमेट्स) जोखिम हैं, लेकिन स्टड्स की ब्रांड वैल्यू इन्हें संभाल लेगी।
भविष्य की संभावनाएं और निवेश सलाह
स्टड्स एक्सेसरीज आईपीओ से प्रमोटर्स को लिक्विडिटी मिली, लेकिन कंपनी को फंड्स नहीं। फिर भी, लिस्टिंग से ब्रांड विजिबिलिटी बढ़ेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के उदय और सेफ्टी नियमों के सख्ती से हेलमेट मार्केट 2030 तक दोगुना हो सकता है। निवेशकों को सलाह: अगर आप लॉन्ग टर्म होल्डर हैं, तो 550-600 के दायरे में खरीदारी करें। शॉर्ट टर्म में वोलेटिलिटी रह सकती है।
कुल मिलाकर, स्टड्स एक्सेसरीज आईपीओ ने साबित किया कि मजबूत बिजनेस मॉडल वाले इश्यू बाजार में चमकते हैं। 73 गुना सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग के बावजूद कंपनी की ग्रोथ स्टोरी निवेशकों को आकर्षित करेगी। अगर आपने आवंटन पाया है, तो बधाई! अन्यथा, सेकेंडरी मार्केट में मौका तलाशें। बाजार की दुनिया में सेफ्टी पहनना जरूरी है – स्टड्स की तरह!
संदर्भ: मनीकंट्रोल, लाइवमिंट, ग्रो, आईसीआईसीआई डायरेक्ट आदि। यदि आपके पास आईपीओ अनुभव है, तो कमेंट्स में शेयर करें। निवेश से पहले सलाह लें।