आरबीआई ने रेपो रेट 25 आधार अंकों से घटाया: अमेरिकी टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम प्रभाव, गवर्नर संजय मल्होत्रा का बयान!

Rajeev
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परिचय: आरबीआई का ऐतिहासिक फैसला जो अर्थव्यवस्था को नई गति देगा

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 5 दिसंबर 2025 को अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। छह महीने बाद पहली बार रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर ला खड़ा किया गया। यह फैसला आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समीक्षा समिति (एमपीसी) द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया। फरवरी 2025 से अब तक यह चौथा रेट कट है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

गवर्नर मल्होत्रा ने प्रेस इंटरैक्शन में स्पष्ट कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत व्यापारिक टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर "न्यूनतम प्रभाव" पड़ा है। इसके अलावा, आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया, जबकि जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया। यह "गोल्डीलॉक्स पीरियड" का संकेत है, जहां मुद्रास्फीति स्थिर (2.2 प्रतिशत) और विकास दर ऊंची (8.0 प्रतिशत) है।

इस पोस्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि आरबीआई रेपो रेट कट 2025 का क्या अर्थ है, इसका अर्थव्यवस्था पर असर, अमेरिकी टैरिफ की चुनौतियां, और भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन। यदि आप repo rate kya hai या RBI monetary policy December 2025 के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह गाइड आपके लिए है। (स्रोत: आरबीआई आधिकारिक वेबसाइट | भारतीय अर्थव्यवस्था 2025 ट्रेंड्स)

रेपो रेट क्या है? सरल भाषा में समझें

रेपो रेट (Repurchase Rate) वह ब्याज दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से अल्पकालिक ऋण लेते हैं। सरल शब्दों में, जब बैंक पैसों की कमी महसूस करते हैं, तो वे आरबीआई के पास जाकर उधार लेते हैं और कुछ दिनों बाद इसे वापस खरीदते हैं। रेपो रेट कट का मतलब है कि उधार लेना सस्ता हो जाता है, जिससे बैंकों के पास अधिक तरलता (liquidity) आती है।

इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है:

  • होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI घट सकती है।
  • बचत खातों पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं, लेकिन निवेशकों के लिए बॉन्ड और FD रिटर्न प्रभावित हो सकते हैं।
  • कुल मिलाकर, यह उपभोग को बढ़ावा देता है, जिससे मांग बढ़ती है और अर्थव्यवस्था में गति आती है।

आरबीआई ने फरवरी और अप्रैल में 25-25 आधार अंकों की कटौती की थी, जबकि जून में 50 आधार अंकों का बड़ा कट। अब दिसंबर 2025 का यह कट RBI repo rate cut latest news का हॉट टॉपिक बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम त्योहारों के बाद की मंदी को रोकने में मदद करेगा। (इकोनॉमिक टाइम्स - Repo Rate Explained)

मुद्रास्फीति और जीडीपी ग्रोथ: सकारात्मक संशोधन का विश्लेषण

आरबीआई का यह फैसला आंकड़ों पर आधारित है। अप्रैल-सितंबर 2025 (H1 FY 2025-26) में मुद्रास्फीति 2.2 प्रतिशत पर स्थिर रही, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी नीचे है। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा, "यह एक दुर्लभ गोल्डीलॉक्स पीरियड है, जहां न तो मुद्रास्फीति बहुत अधिक है और न ही विकास बहुत कम।"

मुद्रास्फीति पूर्वानुमान: पहले 2.6 प्रतिशत का अनुमान था, जो अब घटकर 2 प्रतिशत हो गया। इसका कारण वैश्विक तेल कीमतों में स्थिरता और घरेलू खाद्य उत्पादन में वृद्धि है। कम मुद्रास्फीति का फायदा यह है कि आम आदमी की क्रय शक्ति बनी रहती है, और आरबीआई को रेट कट की गुंजाइश मिलती है।

जीडीपी ग्रोथ अनुमान: 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत। यह संशोधन भारतीय जीडीपी ग्रोथ 2025 के सकारात्मक संकेतकों पर आधारित है, जैसे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9 प्रतिशत की वृद्धि और सर्विस सेक्टर में रिकवरी। गवर्नर ने जोर दिया, "बाहरी चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है और उच्च विकास के लिए तैयार है।"

पैरामीटरपुराना अनुमाननया अनुमानपरिवर्तन
मुद्रास्फीति (Inflation)2.6%2.0%-0.6%
जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth)6.8%7.3%+0.5%
रेपो रेट (Repo Rate)5.50%5.25%-0.25%

यह तालिका inflation forecast RBI और GDP growth projection को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। (जीडीपी ग्रोथ कैलकुलेटर)

अमेरिकी टैरिफ हाइक: न्यूनतम प्रभाव, लेकिन सतर्कता जरूरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ (जिसमें आधा हिस्सा रूस से तेल खरीदने पर "दंड" के रूप में) ने भारतीय निर्यात को प्रभावित किया है। इस साल भारतीय निर्यात में गिरावट आई, और रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 90 के पार पहुंच गई – एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन।

फिर भी, गवर्नर मल्होत्रा का कहना है कि इसका US tariff on India impact न्यूनतम है। कारण:

  • भारत का निर्यात विविधीकरण: अमेरिका पर निर्भरता घटकर 17 प्रतिशत रह गई।
  • घरेलू मांग मजबूत: उपभोग और निवेश बढ़ रहा है।
  • वैकल्पिक बाजार: यूरोप और एशिया में निर्यात बढ़ा।

भारत ने अपनी संप्रभुता पर जोर दिया है। वर्तमान में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के साथ शिखर वार्ता हो रही है, जो ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि Sanjay Malhotra RBI governor का यह बयान निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा। (बीबीसी - US-India Trade War)

रुपये की गिरावट: आरबीआई की अनदेखी क्यों?

इस हफ्ते रुपये ने 90 डॉलर प्रति की सीमा तोड़ दी, जो साल भर में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। सामान्यतः मुद्रा कमजोरी पर आरबीआई सतर्क होता है, लेकिन इस बार रेट कट के साथ इसे नजरअंदाज कर दिया गया। कारण:

  • निर्यातकों को फायदा: कमजोर रुपये से विदेशी कमाई बढ़ती है।
  • विदेशी निवेश: FII प्रवाह मजबूत, जो स्टॉक मार्केट को सपोर्ट कर रहा।
  • वैश्विक कारक: डॉलर इंडेक्स ऊंचा, लेकिन भारत की फंडामेंटल्स मजबूत।

यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था 2025 को स्थिरता प्रदान करेगा, लेकिन लंबे समय में रुपये को स्थिर करने के लिए हस्तक्षेप जरूरी हो सकता है।

गोल्डीलॉक्स पीरियड: अवसर और चुनौतियां

गवर्नर मल्होत्रा ने H1 2025-26 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2.2 प्रतिशत मुद्रास्फीति और 8.0 प्रतिशत विकास "नायाब संयोग" है। Goldilocks economy India का मतलब है न तो बहुत गर्म (उच्च मुद्रास्फीति) न बहुत ठंडा (कम विकास)।

अवसर:

  • निवेशकों के लिए: सस्ते लोन से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स बढ़ेंगे।
  • उपभोक्ताओं के लिए: EMI में कमी से खर्च बढ़ेगा।
  • उद्योगों के लिए: मैन्युफैक्चरिंग बूस्ट।

चुनौतियां:

  • वैश्विक अनिश्चितता: यूएस चुनाव और जियोपॉलिटिकल टेंशन।
  • घरेलू: मानसून पर निर्भर कृषि।

आरबीआई की यह नीति RBI repo rate cut benefits को अधिकतम करने पर केंद्रित है। (गोल्डीलॉक्स इकोनॉमी गाइड)

निष्कर्ष: भारतीय अर्थव्यवस्था का उज्ज्वल भविष्य

आरबीआई का रेपो रेट कट न केवल एक तकनीकी फैसला है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है। अमेरिकी टैरिफ जैसी बाहरी चुनौतियों के बावजूद, भारतीय जीडीपी ग्रोथ 2025 7.3 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। गवर्नर संजय मल्होत्रा का नेतृत्व एमपीसी को एकजुट रखा, और यह कदम लाखों भारतीयों के जीवन को आसान बनाएगा।

यदि आप repo rate kya hai या inflation forecast RBI पर अधिक जानना चाहते हैं, तो कमेंट्स में बताएं। साझा करें और सब्सक्राइब करें ताकि RBI monetary policy updates आपके पास पहुंचें। भारत की अर्थव्यवस्था विश्व पटल पर चमक रही है – आइए, इस विकास यात्रा का हिस्सा बनें!

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है; निवेश सलाह नहीं। स्रोत: आरबीआई प्रेस रिलीज, AFP।)

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