सिंगल पापा सीरीज रिव्यू(‘Single Papa’ series review): कुणाल खेमू की हार्टफुल फैमिली ड्रामा जो मर्दानगी को नए अंदाज में पेश करती है | Netflix Single Papa Review Hindi
नमस्कार दोस्तों! अगर आप फैमिली ड्रामा, हल्की-फुल्की कॉमेडी और इमोशनल टच वाली कहानियां पसंद करते हैं, तो नेटफ्लिक्स की लेटेस्ट रिलीज सिंगल पापा आपके लिए एकदम परफेक्ट है। 12 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई यह हिंदी वेब सीरीज कुणाल खेमू की ब्रिलियंट एक्टिंग से सजी हुई है, जो एक सिंगल फादर की जर्नी को इतने क्यूट और रिलेटेबल तरीके से दिखाती है कि आप हंसते-हंसते आंसू बहा देंगे। क्या कभी सोचा है कि एक मर्दानगी का नया रूप क्या हो सकता है? सिंगल पापा ठीक यही सवाल उठाती है - मां की ममता के बाद बाप की बापता कैसे दिखाई जाए?
इस रिव्यू में हम सिंगल पापा सीरीज रिव्यू की हर डिटेल कवर करेंगे - प्लॉट, कास्ट, थीम्स, प्रोस एंड कॉन्स, और क्यों यह वॉचलिस्ट में ऐड करनी चाहिए। अगर आप कुणाल खेमू सिंगल पापा सर्च कर रहे हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए है। चलिए डाइव करते हैं इस फील-गुड सीरीज की दुनिया में! नेटफ्लिक्स पर सिंगल पापा देखें।
सिंगल पापा क्या है? प्लॉट समरी (स्पॉइलर-फ्री)
सिंगल पापा एक कॉमेडी-ड्रामा सीरीज है, जो सिंगल फादरहुड की अनएक्सप्लोर्ड स्टोरी को छूती है। क्रिएटर्स इशिता मोइत्रा और नीरज उदhwani की यह सीरीज डायरेक्टर्स शशांक खेतान, हितेश केवाल्या और नीरज द्वारा डायरेक्टेड है। कहानी गुड़गांव के गबरू लड़के गौरव गहलोत (कुणाल खेमू) की है, जो एक ब्रैश, हरियाणवी मैन-चाइल्ड है। वह पिता बनने का सपना देखता है, लेकिन उसकी इंडिपेंडेंट वाइफ अपर्णा (ईशा तलवार) से अलगाव हो जाता है। अपर्णा को उसकी इमैच्योरिटी पसंद नहीं आती - बॉयिश बिहेवियर, कभी न खत्म होने वाली शरारतें। लेकिन गौरव का जुनून रुकता नहीं।
ट्रबल तब शुरू होता है जब गौरव की कार के बैकसीट पर एक बबली, गुलाबी गालों वाला टॉडलर मिल जाता है। इसे गौरव की लापरवाही कहें या स्क्रिप्ट की कन्वीनियंस - विंडो खुली छोड़ दी थी। गौरव इस बच्चे को अपना बेटा मान लेता है और नाम रखता है अमूल। अब शुरू होती है उसकी जर्नी - फैमिली की खिलाफत, एडॉप्शन ऑफिसर नेहा (जिसका एंटागोनिस्टिक डिमीनर कमाल का है) की चुनौतियां, और सेंट्रल अथॉरिटी ऑफ चाइल्ड एडॉप्शन की रोमिला नेहरू (नेहा धूपिया) जो उसे अनफिट मानती है। गौरव हर हाल में अमूल को अपनाने के लिए लड़ता है।
सीरीज के 6 एपिसोड्स (हर एक 30-45 मिनट का) एक हल्के-फुल्के वाइब के साथ चलते हैं। शुरुआत में राइटिंग थोड़ी स्टंबल करती है, लेकिन जल्दी ही ग्रिप पकड़ लेती है। ह्यूमर के टाइमली डोज और इमोशनल स्विचेस (जैसे पैरेंट्स के साथ आर्ग्यूमेंट जो गन और चाकू तक पहुंच जाता है, लेकिन फिर सीरियस हो जाता है) इसे खास बनाते हैं। IMDb पर सिंगल पापा रेटिंग्स चेक करें।
कास्ट एंड परफॉर्मेंस: कुणाल खेमू का कमबैक जो चुरा लेगा दिल
कुणाल खेमू सिंगल पापा में गौरव गहलोत का रोल उनके करियर का बेस्ट है। वह एक एंटाइटल्ड, चौविनिस्टिक मैन दिखता है, लेकिन अमूल के साथ उसके इंटरैक्शंस में टेंडरनेस झलकती है। कुणाल की अर्नेस्टनेस इन मोमेंट्स में कमाल की है - एक जेनुइन इनोसेंस जो गो गोआ गॉन (2013) या गोलमाल सीरीज के हाई-पिच्ड कॉमेडी से अलग है। उनके प्लेफुल एडवांसेज और फैमिली के साथ क्लैशेस हंसाते भी हैं और सोचने पर मजबूर भी करते हैं।
- मंजो पाहवा जतिन गहलोत (गौरव के डिसग्रंटल्ड, अल्कोहलिक पिता) के रोल में अपनी यूजुअल एलिमेंट में हैं - इरिटेबल लेकिन लविंग।
- आयशा रजा मां के रोल में ओवरली इमोशनल हैं, जो फैमिली डायनामिक्स को रियल बनाती हैं।
- प्रजक्ता कोली नम्रता (गौरव की बहन) के रूप में चिंतित हैं कि एडॉप्शन उनके कंजर्वेटिव इन-लॉज को परेशान न करे। लेकिन उनकी हाई-पिच्ड परफॉर्मेंस थोड़ी आउट ऑफ प्लेस लगती है।
- नेहा धूपिया रोमिला नेहरू के रूप में नो-नॉनसेंस अफसर हैं, जो गौरव को चैलेंज करती हैं।
- स्पेशल मेंशन: दयानंद शेट्टी (CID फेम) एक मेल नanny या "मैनी" के रोल में। उनका डायलॉग "मर्दानगी मेटरनल क्यों नहीं हो सकती?" सीरीज का हाइलाइट है। सुहेल नैय्यर भी सपोर्टिंग रोल में ठीक हैं।
कुल मिलाकर, कास्ट का बैलेंस कॉमेडी और इमोशंस को सही रखता है। बॉलीवुड हंगामा पर सिंगल पापा कास्ट इंटरव्यू पढ़ें।
थीम्स एंड मैसेज: मर्दानगी का अल्टरनेटिव डिस्प्ले
सिंगल पापा हिंदी रिव्यू में सबसे मजबूत पार्ट है इसकी थीम्स। यह सिंगल फादरहुड को एक्सप्लोर करती है - क्या मर्द अकेले बच्चा पाल सकते हैं? अपनापन vs ब्लड रिलेशनशिप ('अपना खून' वाली मान्यता को चैलेंज करती है)। गौरव का अमूल के प्रति प्यार इमोशनल कोर है - वह उसे अपना बच्चा मानता है, भले ही सर्कमस्टांस कन्वीनियेंट हों।
सीरीज मर्दानगी को नए कलेवर में दिखाती है: ब्रैश मैन-चाइल्ड से रिस्पॉन्सिबल फादर तक का ट्रांसफॉर्मेशन। फीमेल कैरेक्टर्स गौरव को एंटाइटल्ड कहती हैं, लेकिन उसके अमूल वाले मोमेंट्स टेंडर हैं। फन, फील-गुड और फेस्टिव वाइब है - क्रिसमस-लाइक सेटिंग्स के साथ। प्रोडक्शन डिजाइन प्लास्टिक लगता है (नेटफ्लिक्स स्टाइल), लेकिन इमोशंस रियल हैं। छोटे मोमेंट्स में ब्लॉसम करती है - थॉट प्रोवोकिंग, टियर-जर्किंग और स्माइल-इंड्यूसिंग। फर्स्टपोस्ट पर थीम्स एनालिसिस।
प्रोस एंड कॉन्स: क्या है खास और क्या सुधार की गुंजाइश?
प्रोस:
- कुणाल खेमू की वर्सेटाइल परफॉर्मेंस - कॉमिक चॉप्स लोअर पिच्ड लेकिन इफेक्टिव।
- ह्यूमर और इमोशंस का बैलेंस - कॉमिकल सीन से हार्टफेल्ट स्विच।
- मैसेजफुल कंटेंट: सिंगल पेरेंटिंग, एडॉप्शन अवेयरनेस।
- शॉर्ट एपिसोड्स - बिंज-वर्थी।
- डायनंद शेट्टी का सरप्राइजिंग रोल।
कॉन्स:
- शुरुआती राइटिंग स्टंबल - गौरव की डेस्परेशन की लिटिल एक्सप्लनेशन।
- प्रजक्ता कोली की परफॉर्मेंस हाई-पिच्ड और डिसजॉइंट।
- सेट्स ओवरली-सैनिटाइज्ड - रियलिज्म की कमी।
- प्लॉट थोड़ा प्रेडिक्टेबल, लेकिन इमोशंस इसे कवर करते हैं।
कुल रेटिंग: 3.5/5 - फैमिली ऑडियंस के लिए मस्ट-वॉच। मनीकंट्रोल पर डिटेल्ड प्रोस-कॉन्स।
सिंगल पापा vs अन्य फैमिली ड्रामास: क्या बनाता है इसे यूनिक?
नेटफ्लिक्स की अन्य सीरीज जैसे लिटिल Things या फैमिली मैन से तुलना करें, तो सिंगल पापा मेल पर्सपेक्टिव से फैमिली डायनामिक्स दिखाती है। जहां ज्यादातर शोज मॉदरहुड पर फोकस करते हैं, यह फादरहुड को हाइलाइट करती है। कॉमेडी थॉट-प्रोवोकिंग है, न कि स्लैपस्टिक। 2025 की बेस्ट हिंदी वेब सीरीज में टॉप 10 में जगह बना सकती है। कोइमोई पर कंपैरिजन रिव्यू।
निष्कर्ष: सिंगल पापा - एक वार्मिंग फैमिली अफेयर
नेटफ्लिक्स सिंगल पापा सीरीज कुणाल खेमू को एक नए अवतार में देखने का मौका देती है, जो हार्टफुल और थॉटफुल है। यह साबित करती है कि कॉमेडी इमोशनल डेप्थ के साथ आ सकती है। अगर आप सिंगल पेरेंटिंग, फैमिली बॉन्ड्स या जस्ट गुड वाइब्स ढूंढ रहे हैं, तो बिंज वॉच करें। क्या आपको सिंगल पापा रिव्यू पसंद आया? कमेंट्स में बताएं - गौरव की जर्नी पर आपकी क्या राय है?
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