अमेरिकी टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 133.5 अरब डॉलर से ज्यादा रिफंड का खतरा, शेयर बाजार पर बड़ा असर!
परिचय: ट्रंप की टैरिफ नीति पर संकट के बादल
नमस्ते, शेयर बाजार के उत्साही और निवेशकों! अगर आप वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के ट्रेंड्स पर नजर रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ पर अब बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अगर यूएस सुप्रीम कोर्ट इन टैरिफ को अवैध घोषित करता है, तो आयातकों को 133.5 अरब डॉलर से ज्यादा रिफंड देना पड़ सकता है। यह आंकड़ा यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) के दिसंबर 14 तक के डेटा पर आधारित है।
ट्रंप ने फरवरी 2025 से इन टैरिफ को लागू किया था, जो राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान इस्तेमाल होने वाले 1977 के कानून पर आधारित हैं। कोर्ट ने नवंबर 2025 में इस पर बहस सुनी थी, और जस्टिस ने इन टैरिफ पर संदेह जताया था। हालांकि, 10 जनवरी 2026 तक फैसला नहीं आया है – अब उम्मीद है कि 14 जनवरी को रूलिंग आएगी। ऑनलाइन बेटिंग मार्केट्स जैसे कलशी और पॉलीमार्केट पर ट्रंप के जीतने की संभावना क्रमशः 31% और 26% है, जो बहस से पहले 40% से कम हो गई है।(रॉयटर्स आर्टिकल)
एक सीनियर शेयर मार्केट एनालिस्ट के तौर पर, मैं इसकी शेयर बाजार, वैश्विक व्यापार और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर की गहराई से चर्चा करूंगा। चलिए, डिटेल में जाते हैं!
ट्रंप की IEEPA टैरिफ: क्या हैं ये और क्यों विवादास्पद?
ट्रंप प्रशासन ने IEEPA का इस्तेमाल करके वैश्विक आयात पर टैरिफ लगाए, जो राष्ट्रीय आपातकाल जैसे ट्रेड डेफिसिट, फेंटानिल ट्रैफिकिंग आदि को आधार बनाते हैं। ये टैरिफ फरवरी 2025 से लागू हुए, और दिसंबर 14, 2025 तक 133.5 अरब डॉलर के टैरिफ इकट्ठा हो चुके हैं। लेकिन लोअर कोर्ट्स ने इन्हें अवैध माना है, और अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला निर्णायक होगा।
मुख्य विवाद पॉइंट्स:
- कानूनी आधार: IEEPA केवल आपातकाल के लिए है, लेकिन ट्रंप ने इसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया। जस्टिस ने बहस में इस पर सवाल उठाए।
- आर्थिक असर: ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि 600 अरब डॉलर टैरिफ इकट्ठा हुए, लेकिन ट्रेजरी डेटा के मुताबिक फिस्कल 2025 में सिर्फ 195 अरब डॉलर नेट कस्टम्स ड्यूटी आई।
- रिफंड की संभावना: अगर कोर्ट अवैध घोषित करता है, तो रिफंड का फैसला लोअर कोर्ट्स या सरकार पर छोड़ सकता है। CBP ने रिफंड प्रोसेस के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं।
हाल की अपडेट्स से पता चलता है कि फैसला 14 जनवरी को आ सकता है। अगर ट्रंप हारते हैं, तो कंपनियां जैसे कॉस्टको, रीबॉक और जेरॉक्स पहले से ही रिफंड के लिए मुकदमे दायर कर चुकी हैं। यह वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करेगा।
टैरिफ का ब्रेकडाउन: कैटेगरी और देशों के अनुसार आंकड़े
CBP के डेटा से साफ है कि ये टैरिफ विभिन्न कैटेगरी में बंटे हैं। यहां एक टेबल है जो फिस्कल 2026, 2025 और कुल आंकड़े दिखाती है (अरब डॉलर में):
| कैटेगरी | फिस्कल 2026 | फिस्कल 2025 | कुल (फरवरी 2025 से) |
|---|---|---|---|
| चीन और हांगकांग (फेंटानिल) | 7.74 | 30.13 | 37.87 |
| मैक्सिको (फेंटानिल) | 0.92 | 5.56 | 6.48 |
| कनाडा (फेंटानिल) | 0.47 | 1.95 | 2.42 |
| 'रिसिप्रोकल' सभी देश, सभी गुड्स | 27.38 | 54.36 | 81.74 |
| ब्राजील, पुनिटिव | 0.61 | 0.36 | 0.97 |
| भारत, पुनिटिव | 1.58 | 0.41 | 1.99 |
| जापान, पोस्ट-ट्रेड डील टैरिफ | 1.66 | 0.37 | 2.03 |
| कुल | 40.36 | 93.14 | 133.5 |
नोट्स: फेंटानिल से जुड़े टैरिफ चीन पर फरवरी 4 से, कनाडा और मैक्सिको पर मार्च 4 से लागू। रिसिप्रोकल टैरिफ अप्रैल 5 से 10-50% तक, ब्राजील पर अगस्त 6 से 40%, भारत पर अगस्त 27 से 25%, जापान पर अगस्त 7 से।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि चीन सबसे ज्यादा प्रभावित है, लेकिन भारत जैसे देश भी शामिल हैं। भारतीय निर्यातकों के लिए यह चिंता का विषय है।
शेयर बाजार पर असर: निवेशकों के लिए क्या मतलब?
एक सीनियर शेयर मार्केट एनालिस्ट के रूप में, मैं कह सकता हूं कि ये टैरिफ शेयर बाजार को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। 2026 में स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में 82% टैरिफ यूएस कंपनियों और कंज्यूमर्स ने चुकाए। टैक्स फाउंडेशन का अनुमान है कि ये टैरिफ GDP को 0.5% कम कर सकते हैं।
शेयर बाजार की हालिया ट्रेंड्स:
- रैली का दौर: 9 जनवरी 2026 को S&P 500, डॉव और नैस्डैक में बढ़त देखी गई। इंटेल स्टॉक 10.8% ऊपर, ब्रॉडकॉम 3.8%। लेकिन यह जॉब्स रिपोर्ट से प्रभावित है।
- नकारात्मक प्रभाव: इतिहास बताता है कि टैरिफ शॉक्स से स्टॉक प्राइस गिरते हैं, वोलेटिलिटी बढ़ती है। सैन फ्रांसिस्को फेड की स्टडी के मुताबिक, टैरिफ बढ़ने से स्टॉक वैल्यूएशन गिरती है।
- सेक्टर-वाइज असर: मटेरियल्स, इंडस्ट्रियल्स और टेक सेक्टर्स प्रभावित। AI सेक्टर में क्रैश का खतरा। S&P 500 का CAPE रेशियो 39.9 है, जो डॉट-कॉम क्रैश जैसा।
अगर कोर्ट टैरिफ अवैध घोषित करता है, तो शेयर बाजार में राहत रैली हो सकती है, लेकिन ट्रंप प्रशासन अन्य कानूनों (जैसे सेक्शन 232, 301) से टैरिफ दोबारा लगा सकता है। प्रोजेक्ट सिंडिकेट के मुताबिक, 2026 में असेट मार्केट्स में टर्बुलेंस बढ़ेगी।
भारत पर असर: भारतीय निवेशकों के लिए अलर्ट
लखनऊ से यूजर के रूप में, आपको पता होना चाहिए कि भारत पर पुनिटिव टैरिफ 1.99 अरब डॉलर का है। अगर रिफंड होता है, तो भारतीय निर्यातकों को फायदा, लेकिन ट्रंप की नीति से ट्रेड वॉर बढ़ सकता है। भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स, निफ्टी) में अमेरिकी उतार-चढ़ाव का असर पड़ता है। J.P. Morgan की रिसर्च के मुताबिक, अगर टैरिफ बढ़ते हैं, तो ग्लोबल GDP 0.5% गिर सकता है, जो भारत की ग्रोथ को 0.2-0.3% प्रभावित करेगा।
सलाह निवेशकों के लिए:
- डाइवर्सिफाई पोर्टफोलियो: गोल्ड और बॉन्ड्स में निवेश बढ़ाएं, क्योंकि टैरिफ से कमोडिटी प्राइस बढ़ती हैं।
- मॉनिटर बेटिंग मार्केट्स: कलशी पर 31% और पॉलीमार्केट पर 26% चांस ट्रंप के पक्ष में।
- लॉन्ग-टर्म व्यू: अगर टैरिफ रद्द होते हैं, तो एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड स्टॉक्स जैसे टाटा स्टील, रिलायंस में अपसाइड।
सुप्रीम कोर्ट फैसले की संभावनाएं और भविष्य
फैसला आने तक अनिश्चितता बनी रहेगी। अगर ट्रंप जीतते हैं, तो टैरिफ जारी रहेंगे, जो इकोनॉमी को स्लो कर सकते हैं। हारने पर रिफंड प्रोसेस शुरू होगा, लेकिन ट्रंप अन्य तरीकों से टैरिफ लगा सकते हैं। फॉर्ब्स के मुताबिक, कंपनियां पहले से तैयारी कर रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं:
- पॉजिटिव सिनेरियो: टैरिफ रद्द होने से ग्लोबल ट्रेड बूस्ट, स्टॉक मार्केट रैली।
- नेगेटिव सिनेरियो: नए टैरिफ से इन्फ्लेशन बढ़ना, GDP गिरना।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड मार्केट पर असर पड़ेगा, लेकिन इनवेस्टमेंट गोल्ड एग्जेम्प्ट है।
निष्कर्ष: निवेशकों के लिए सतर्कता और अवसर
संक्षेप में, 133.5 अरब डॉलर के टैरिफ रिफंड का खतरा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को हिला सकता है, लेकिन शेयर बाजार में अवसर भी पैदा करेगा। 14 जनवरी को फैसले पर नजर रखें। अगर आप "Trump tariffs stock market impact 2026" सर्च कर रहे हैं, तो यह पोस्ट आपकी मदद करेगी। कमेंट में बताएं, आपका क्या विचार है? शेयर करें और सब्सक्राइब करें!