बजट 2026(Budget 2026): वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषित किए बड़े डायरेक्ट टैक्स बदलाव, टीडीएस नियमों में सख्ती; इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं!
नमस्कार, दोस्तों! क्या आप भी बजट 2026 का इंतजार कर रहे थे, खासकर इनकम टैक्स से जुड़ी राहतों का? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में अपना नौवां बजट पेश किया, जिसमें डायरेक्ट टैक्स के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की गई। हालांकि, इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अनुपालन को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और छोटे करदाताओं पर बोझ कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इस पोस्ट में हम इन सभी बदलावों को विस्तार से समझेंगे, ताकि आप आसानी से जान सकें कि ये आपके वित्तीय जीवन को कैसे प्रभावित करेंगे।
अगर आप एक सैलरीड एम्प्लॉयी हैं, छोटे व्यवसायी हैं या निवेशक हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। हम यहां बजट 2026 डायरेक्ट टैक्स बदलाव, टीडीएस नियम, इनकम टैक्स स्लैब 2026 जैसे महत्वपूर्ण बदलावों पर फोकस करेंगे, चलिए, शुरू करते हैं!
इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं: पुरानी और नई व्यवस्था क्या है?
सबसे पहले, वह खबर जो कई लोगों को निराश कर सकती है – इनकम टैक्स स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई और पुरानी टैक्स रिजीम दोनों में स्लैब और रेट्स वही रहेंगे जो पिछले साल थे। यह फैसला पिछले साल की बड़ी राहतों को जारी रखने का संकेत है, जहां मिडिल क्लास को काफी फायदा मिला था।
नई टैक्स रिजीम के तहत स्लैब (FY 2026-27):
- 0 से 4 लाख रुपये तक: कोई टैक्स नहीं (बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट की वजह से)।
- 4 लाख से 8 लाख रुपये तक: 5% टैक्स।
- 8 लाख से 12 लाख रुपये तक: 10% टैक्स।
- 12 लाख से 16 लाख रुपये तक: 15% टैक्स।
- 16 लाख से 20 लाख रुपये तक: 20% टैक्स।
- 20 लाख से 24 लाख रुपये तक: 25% टैक्स।
- 24 लाख रुपये से ऊपर: 30% टैक्स (सबसे ऊंची दर)।
पुरानी टैक्स रिजीम के तहत स्लैब:
- 0 से 2.5 लाख रुपये तक: कोई टैक्स नहीं।
- 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक: 5% टैक्स।
- 5 लाख से 10 लाख रुपये तक: 20% टैक्स।
- 10 लाख रुपये से ऊपर: 30% टैक्स।
पुरानी रिजीम में सेक्शन 80C, 80D जैसी डिडक्शन का फायदा मिलता है, लेकिन नई रिजीम सरल और कम दरों वाली है। अगर आपकी सैलरी 12.75 लाख रुपये तक है, तो स्टैंडर्ड डिडक्शन (75,000 रुपये) और सेक्शन 87A रिबेट (60,000 रुपये तक) की वजह से आपका टैक्स जीरो हो सकता है। क्या आप जानते हैं? पिछले साल की तुलना में यह स्थिरता निवेशकों को लंबी अवधि की प्लानिंग करने में मदद करेगी।
नया इनकम टैक्स एक्ट: 1 अप्रैल से लागू, क्या बदलाव आएंगे?
बजट की एक बड़ी घोषणा है नया इनकम टैक्स एक्ट 2025, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा। यह पुराने 1961 के एक्ट को रिप्लेस करेगा, जो अब 60 साल से ज्यादा पुराना हो चुका है। नए एक्ट का फोकस सरलीकरण पर है – कम क्लॉज, आसान भाषा और कम मुकदमेबाजी।
- सरलीकृत नियम और फॉर्म्स: नए टैक्स रिटर्न फॉर्म्स जल्द नोटिफाई किए जाएंगे, ताकि करदाता आसानी से समझ सकें।
- कम मुकदमेबाजी: अपील के लिए प्री-डिपॉजिट को 20% से घटाकर 10% किया गया है।
- टैक्सपेयर्स के लिए राहत: रिफंड प्रोसेस तेज होगा, और छोटे करदाताओं के लिए अनुपालन आसान बनेगा।
यह बदलाव विशेष रूप से छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए फायदेमंद है, क्योंकि पुराना एक्ट जटिल था। अगर आप एक फ्रीलांसर हैं, तो नए फॉर्म्स से आपका समय बचेगा!
टीडीएस नियमों में बड़े बदलाव: अनुपालन को सख्त बनाना
टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) में कई महत्वपूर्ण बदलाव घोषित किए गए हैं, जो अनुपालन को मजबूत करेंगे। मुख्य रूप से, गैर-निवासियों द्वारा अचल संपत्ति की बिक्री पर टीडीएस अनिवार्य होगा, और मैनपावर सप्लाई सर्विसेज को टीडीएस के दायरे में लाया जाएगा।
- गैर-निवासियों पर टीडीएस: अगर कोई एनआरआई प्रॉपर्टी बेचता है, तो खरीदार को टीडीएस काटना होगा। यह कर चोरी रोकने के लिए है।
- मैनपावर सर्विसेज पर टीडीएस: अब ये सेवाएं 1% या 2% टीडीएस के अंतर्गत आएंगी, जो पहले अस्पष्ट थीं।
- मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स पर छूट: ट्रिब्यूनल से मिलने वाले इंटरेस्ट पर कोई टीडीएस नहीं कटेगा, और यह इनकम टैक्स फ्री होगा।
ये बदलाव छोटे करदाताओं पर बोझ कम करेंगे, लेकिन बड़े ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता बढ़ाएंगे। उदाहरण के लिए, अगर आप एक कंपनी हैं जो मैनपावर हायर करती हैं, तो अब टीडीएस का ध्यान रखना जरूरी होगा।
फाइलिंग डेडलाइंस में बदलाव: छोटे करदाताओं को राहत
बजट में टैक्स फाइलिंग की समयसीमाओं में सुधार की घोषणा की गई है, ताकि सिस्टम पर लोड कम हो और करदाता आसानी से फाइल कर सकें।
- नॉन-ऑडिट ट्रस्ट्स के लिए एक्सटेंशन: फाइलिंग डेडलाइन 31 अगस्त तक बढ़ाई गई।
- सैलरीड टैक्सपेयर्स और ITR-1/ITR-2: डेडलाइन 31 जुलाई ही रहेगी।
- रिवाइज्ड रिटर्न्स: अब 31 दिसंबर की बजाय 31 मार्च तक फाइल कर सकेंगे, लेकिन नाममात्र फीस के साथ।
- स्टैगर्ड टाइमलाइंस: सरकार फाइलिंग को फैलाने पर विचार कर रही है, ताकि अंतिम दिनों में भीड़ न हो।
यह बदलाव विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो आखिरी समय में फाइल करते हैं। अगर आप ITR-2 फाइल करते हैं, तो अब ज्यादा समय मिलेगा गलतियां सुधारने का!
टीसीएस में कटौती: विदेश यात्रा और रेमिटेंस पर राहत
टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) में भी राहत दी गई है, खासकर विदेशी खर्चों पर।
- ओवरसीज टूर पैकेजेस पर टीसीएस: अब फ्लैट 2% होगा, पहले 5% से 20% तक था।
- एजुकेशन और मेडिकल रेमिटेंस: 5% से घटाकर 2% किया गया।
- कोई थ्रेशोल्ड नहीं: छोटे अमाउंट पर भी लागू, लेकिन दर कम होने से फायदा।
अगर आप फैमिली के साथ विदेश घूमने जा रहे हैं या बच्चे की पढ़ाई के लिए पैसे भेज रहे हैं, तो यह आपके लिए अच्छी खबर है। इससे मिडिल क्लास की जेब पर कम बोझ पड़ेगा!
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव: बायबैक टैक्सेशन और कोऑपरेटिव डिविडेंड
- बायबैक पर टैक्स: अब सभी शेयरहोल्डर्स के लिए कैपिटल गेंस के रूप में टैक्स लगेगा। यह कंपनियों को डिविडेंड की बजाय बायबैक से बचने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
- इंटर-कोऑपरेटिव डिविडेंड: डिडक्शन की अनुमति दी गई।
- पेनल्टी में सख्ती: नए एक्ट में आय की गलत रिपोर्टिंग पर 200% पेनल्टी लग सकती है।
ये बदलाव शेयर मार्केट निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर आप स्टॉक बायबैक में शामिल हैं, तो अब टैक्स कैलकुलेशन बदल जाएगा।
छोटे करदाताओं और मिडिल क्लास पर प्रभाव: क्या फायदा होगा?
बजट 2026 में बड़े स्लैब बदलाव न होने के बावजूद, छोटे बदलावों से मिडिल क्लास को राहत मिलेगी। उदाहरण के लिए:
- सैलरीड क्लास: कोई स्लैब चेंज नहीं, लेकिन रिवाइज्ड रिटर्न्स का एक्सटेंडेड टाइम फायदेमंद।
- एनआरआई और प्रॉपर्टी ओनर्स: टीडीएस सख्त, लेकिन पारदर्शिता बढ़ेगी।
- व्यवसायी: मैनपावर पर टीडीएस से अनुपालन आसान, लेकिन ट्रैकिंग जरूरी।
कुल मिलाकर, यह बजट स्थिरता पर फोकस करता है। पिछले साल की राहतों (जैसे 12 लाख तक जीरो टैक्स) को जारी रखते हुए, सरकार ने अनुपालन को प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा, और निवेश बढ़ेगा।
निष्कर्ष: बजट 2026 से क्या सीखें और कैसे प्लान करें?
बजट 2026 डायरेक्ट टैक्स में क्रांतिकारी बदलाव नहीं लाया, लेकिन छोटे-छोटे सुधारों से जीवन आसान बनाया है। अगर आप टैक्स प्लानिंग कर रहे हैं, तो नई रिजीम चुनें अगर डिडक्शन कम हैं, वरना पुरानी रहें। टीडीएस और टीसीएस में बदलावों का ध्यान रखें, और समय पर फाइलिंग करें।
अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट्स चेक करें, और अगर कोई सवाल हो तो कमेंट्स में पूछें। यह पोस्ट आपको बजट 2026 इनकम टैक्स अपडेट्स से अपडेट रखने के लिए है – शेयर करें और सब्सक्राइब करें!