क्यों वॉरेन बफेट सोने में निवेश नहीं करते? - सोने की सच्चाई और उत्पादक संपत्तियों का महत्व

Rajeev
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क्यों वॉरेन बफेट मानते हैं कि सोना आपको अमीर बनाने वाला निवेश नहीं है?

वॉरेन बफेट, बर्कशायर हैथवे के पूर्व सीईओ, सोने को 'अनुत्पादक' संपत्ति क्यों मानते हैं? जानिए उनकी राय, ऐतिहासिक तुलना और निवेशकों के लिए सलाह। सोना vs स्टॉक्स: कौन बेहतर?

(हमारे अन्य पोस्ट पर क्लिक करें - स्टॉक मार्केट टिप्सबर्कशायर हैथवे की आधिकारिक वेबसाइट।)

वॉरेन बफेट: निवेश की दुनिया का किंग, जो सोने से दूर रहते हैं – क्या वजह है?

नमस्कार, दोस्तों! अगर आप शेयर बाजार में रुचि रखते हैं या निवेश की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं, तो वॉरेन बफेट का नाम तो सुना ही होगा। वे बर्कशायर हैथवे के पूर्व सीईओ हैं, जिन्होंने 2025 के अंत में रिटायरमेंट लिया। लेकिन उनकी निवेश की सलाह आज भी लाखों लोगों को अमीर बनने का रास्ता दिखाती है। आज हम बात करेंगे एक ऐसे टॉपिक पर जो हमेशा डिबेट का विषय रहा है: वॉरेन बफेट क्यों सोचते हैं कि सोना आपको अमीर बनाने वाला निवेश नहीं है?

सोना – वो चमकदार धातु जो सदियों से लोगों को आकर्षित करती आई है। 2025 में तो सोने ने रिकॉर्ड हाई बनाया, मुद्रास्फीति की आशंका, भू-राजनीतिक अस्थिरता और सेंट्रल बैंक की खरीदारी के कारण। फिर भी, बफेट ने कभी सोने को अपने पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा नहीं बनाया। बर्कशायर की मिड-2025 फाइलिंग्स में कोई डायरेक्ट गोल्ड पोजीशन नहीं है। क्यों? क्योंकि बफेट का वैल्यू इनवेस्टिंग फिलॉसफी सोने से मेल नहीं खाता। आइए, इसकी गहराई में उतरते हैं और समझते हैं कि क्या सोना वाकई 'अमीर बनाने वाला' निवेश है या सिर्फ एक 'फियर बेट'।

यह पोस्ट आपको न केवल बफेट की राय बताएगी, बल्कि ऐतिहासिक डेटा, तुलना और निवेश टिप्स भी देगी। अगर आप प्रोफेशनल इनवेस्टर हैं या नौसिखिया, तो यह आपके लिए है। चलिए शुरू करते हैं!

सोना: एक 'अनुत्पादक' संपत्ति – बफेट की मुख्य आपत्ति

वॉरेन बफेट की सोने पर सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि यह अनुत्पादक है। उनके मशहूर 2011 शेयरहोल्डर लेटर में उन्होंने लिखा था कि सोने में दो बड़ी कमियां हैं: यह न तो ज्यादा उपयोगी है और न ही 'प्रजननशील' (प्रोडक्टिव)। आइए, इसे ब्रेकडाउन करते हैं।

  • उपयोगिता की कमी: सोना इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स में इसकी कंडक्टिविटी के कारण, या ज्वेलरी में। लेकिन ये उपयोग सीमित हैं और नई सप्लाई को पूरी तरह अवशोषित नहीं करते। बफेट इसे उत्पादक संपत्तियों से तुलना करते हैं, जैसे खेत जो फसल पैदा करते हैं, फैक्टरियां जो सामान बनाती हैं, या बिजनेस जो सेवाएं देते हैं। सोना बस 'बैठा रहता है' – कोई नया वैल्यू क्रिएट नहीं करता।
  • कैश फ्लो की अनुपस्थिति: स्टॉक्स या बिजनेस से मिलने वाले प्रॉफिट, डिविडेंड, कैपिटल रीइन्वेस्टमेंट या शेयर बायबैक जैसा कुछ सोने में नहीं। बफेट कहते हैं, "एक औंस सोना रखो, सौ साल बाद भी वही एक औंस रहेगा – कोई ग्रोथ नहीं, कोई यील्ड नहीं।" उन्होंने इंटरव्यूज में इसे 'फियर पर लॉन्ग जाना' बताया है। क्राइसिस में डर बढ़ता है, तो सोने की कीमत चढ़ती है; डर कम होता है, तो गिरती है। लेकिन खुद सोना कुछ नहीं पैदा करता।

यह दृष्टिकोण बफेट के वैल्यू इनवेस्टिंग पर आधारित है, जहां वे ऐसी संपत्तियों में निवेश करते हैं जो इंटरनली कंपाउंड होती हैं। क्या आपने कभी सोचा कि क्यों बफेट एप्पल, अमेरिकन एक्सप्रेस या कोका-कोला जैसी कंपनियों पर दांव लगाते हैं? क्योंकि ये कैश जनरेट करती हैं!

ऐतिहासिक प्रदर्शन: सोना vs उत्पादक संपत्तियां – कौन जीता?

बफेट अपनी बात को साबित करने के लिए लॉन्ग-टर्म कंपैरिजन इस्तेमाल करते हैं। चलिए, कुछ उदाहरण देखते हैं जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे।

  • 1960s से अब तक: जब बफेट ने 1960s के मिड में बर्कशायर हैथवे का कंट्रोल लिया, तब सोना $35 प्रति औंस था, जबकि बर्कशायर के शेयर टीन में थे। दशकों में, बर्कशायर की वैल्यू बिजनेस ग्रोथ और रीइन्वेस्टेड अर्निंग्स से कंपाउंड हुई, जो सोने से कहीं ज्यादा थी। 2025 की रैली के बावजूद, लॉन्ग-टर्म में स्टॉक्स ने बाजी मारी।
  • 1900-2000 की सदी: बफेट के 2011 लेटर में उल्लेख है कि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज कई गुना बढ़ा और डिविडेंड भी दिए, जबकि सोने की रिटर्न सिर्फ प्राइस एप्रिशिएशन पर निर्भर रही। यहां तक कि 2025 में सोने की तेजी को मान लें, तो भी बफेट कहते हैं कि बहुत लंबे समय में, इक्विटी और रियल एस्टेट जैसी उत्पादक संपत्तियां बेहतर रिटर्न देती हैं क्योंकि वे इंटरनली ग्रो करती हैं और इनकम जनरेट करती हैं।

बुलेट पॉइंट्स में समझिए अंतर:

  • सोना: सिर्फ प्राइस चेंज पर निर्भर। कोई डिविडेंड नहीं, कोई प्रोडक्शन नहीं।
  • स्टॉक्स/बिजनेस: प्रॉफिट रीइन्वेस्ट, डिविडेंड, ग्रोथ – कंपाउंडिंग का जादू!
  • रियल एस्टेट: रेंट इनकम, वैल्यू एप्रिशिएशन।
  • फार्मलैंड: सालाना फसल, वैल्यू क्रिएशन।

ये तुलनाएं बताती हैं कि सोना शॉर्ट-टर्म हेज हो सकता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए नहीं। क्या आपका पोर्टफोलियो भी ऐसी अनुत्पादक संपत्तियों से भरा है? सोचिए!

2020 का अपवाद: बैरिक गोल्ड स्टेक – क्या बफेट ने अपना मन बदला?

बफेट की सोने पर सख्त राय में एक छोटा सा अपवाद आया 2020 में। पांडेमिक के दौरान, बर्कशायर ने बैरिक गोल्ड में $565 मिलियन का स्टेक लिया। लेकिन कुछ महीनों में ही इसे बेच दिया गया।

क्या यह फिलॉसफी में बदलाव था? ज्यादातर ऑब्जर्वर्स इसे शॉर्ट-टर्म टैक्टिकल मूव मानते हैं – शायद बफेट के अंडर पोर्टफोलियो मैनेजर्स का फैसला या एक्सट्रीम अनसर्टेनिटी में हेज। उसके बाद से, बर्कशायर में कोई गोल्ड-रिलेटेड इनवेस्टमेंट नहीं। फोकस वही रहा: कैश-जनरेटिंग कंपनियां जैसे एप्पल, अमेरिकन एक्सप्रेस और कोका-कोला।

यह घटना हमें सिखाती है कि कभी-कभी मार्केट की अस्थिरता में हेज जरूरी होता है, लेकिन बफेट की कोर बिलीफ नहीं बदलती। सोना उनके लिए 'स्पेकुलेटिव स्टोर ऑफ वैल्यू' है, न कि ट्रू इनवेस्टमेंट।

बफेट की पसंद: उत्पादक संपत्तियां vs 'फियर' पर दांव

बफेट का निवेश अप्रोच हमेशा ऐसी संपत्तियों पर फोकस करता है जो वैल्यू क्रिएट करती हैं। यहां उनकी पसंद की मुख्य बातें:

  1. ड्यूरेबल कॉम्पिटिटिव एडवांटेज वाली बिजनेस: जैसे मोनोपॉली या स्ट्रॉन्ग ब्रांड।
  2. प्रिडिक्टेबल अर्निंग्स और स्ट्रॉन्ग कैश फ्लो: कंपनियां जो लगातार प्रॉफिट बनाती हैं।
  3. रीजनेबल वैल्यूएशंस: जो लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग की अनुमति दें।

सोने को वे फार्मलैंड (जो फसल पैदा करता है), अपार्टमेंट बिल्डिंग्स (जो रेंट कमाती हैं) या ब्रॉड इक्विटी इनवेस्टमेंट्स (जो इकोनॉमिक ग्रोथ से लाभ लेती हैं) से तुलना करते हैं। जैसा उन्होंने कहा, "सोना बस बैठा रहता है और आपको देखता है।"

अगर आप निवेशक हैं, तो पूछिए खुद से: क्या आपका पैसा वैल्यू क्रिएट कर रहा है या सिर्फ 'फियर' पर दांव लगा रहा है?

निवेशकों के लिए क्यों मायने रखती है बफेट की यह राय?

बफेट की क्रिटिसिज्म का मतलब यह नहीं कि सोने का कोई रोल नहीं। कई निवेशक इसे डाइवर्सिफिकेशन, इन्फ्लेशन प्रोटेक्शन या करेंसी डिवैल्यूएशन के खिलाफ इस्तेमाल करते हैं। लेकिन लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए, बफेट कहते हैं कि उत्पादक संपत्तियां – स्टॉक्स, बिजनेस और रियल एस्टेट – कहीं बेहतर हैं।

रिटायरमेंट के बाद भी, बफेट की लिगेसी यही है: सोना खुद वैल्यू नहीं बनाता; उसके रिटर्न्स किसी और के ज्यादा पेमेंट पर निर्भर करते हैं। 2025 की रैली के बावजूद, उनका स्लोगन वही है – "उत्पादक बनो, स्पेकुलेटिव नहीं।"

निष्कर्ष: बफेट की सलाह अपनाकर अमीर बनें

दोस्तों, वॉरेन बफेट की सोने पर राय हमें सिखाती है कि निवेश सिर्फ प्राइस एप्रिशिएशन नहीं, बल्कि वैल्यू क्रिएशन है। अगर आप शेयर मार्केट में सफल होना चाहते हैं, तो उनके फिलॉसफी को अपनाएं: उत्पादक संपत्तियों में निवेश करें। सोना हेज हो सकता है, लेकिन अमीर बनाने वाला नहीं।

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