खबरों के मुताबिक, कुछ दिनों से बीमार चल रहे जसविंदर भल्ला ने मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में आखिरी सांस ली। जसविंदर भल्ला पंजाब के लुधियाना जिले के छोटे से गांव दोराहा के रहने वाले थे। उन्होंने स्टेज, फिल्मों और पढ़ाई के क्षेत्र में तीन दशकों से ज़्यादा काम किया। उनका अंतिम संस्कार शनिवार (23 अगस्त) को मोहाली के बालोन्गी श्मशान घाट में किया जाएगा, जहां उनके परिवार, इंडस्ट्री के लोगों और प्रशंसकों के आने की उम्मीद है। जसविंदर भल्ला को 1980 के दशक में 'छनकता' नाम के एक कार्यक्रम से पहचान मिली थी। इसमें वो ग्रामीण पंजाब के जीवन, सामाजिक असमानता और राजनीति पर मज़ेदार बातें करते थे। 'चाचा चतर सिंह' और 'भाना' जैसे उनके किरदार पंजाब और दुनिया भर में मशहूर हो गए थे।
इसके बाद उन्होंने पंजाबी फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने 'माहौल ठीक है' (1999), 'जट्ट एंड जूलियट' (2012), 'मिस्टर एंड मिसेज 420' (2014), 'सरदार जी' (2015) और 'जिंद जान' (2019) जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया। 'कैरी ऑन जट्टा' में वकील ढिल्लों के किरदार को लोगों ने खूब पसंद किया। उनकी आखिरी फिल्म 2024 में 'शिंदा शिंदा नो पापा' थी, जिसमें उन्होंने गिप्पी ग्रेवाल और हिना खान के साथ काम किया था।
जसविंदर भल्ला ने पढ़ाई के क्षेत्र में भी खूब नाम कमाया था। उन्होंने एक्सटेंशन एजुकेशन में पीएचडी की थी और 2020 में रिटायर होने तक पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) में प्रोफेसर और हेड ऑफ डिपार्टमेंट के तौर पर काम किया।
जसविंदर भल्ला के निधन पर कई नेताओं और कलाकारों ने दुख जताया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जसविंदर भल्ला का जाना बहुत दुखद है। जसविंदर भल्ला के परिवार में उनकी पत्नी परमदीप, जो चंडीगढ़ में फाइन आर्ट्स की टीचर हैं, और उनके दो बच्चे हैं: पुखराज, जो पंजाबी फिल्मों में एक्टर हैं, और बेटी जैस्मीन, जो नॉर्वे में रहती हैं।
