Shubhanshu Shukla arrives in Lucknow to a hero’s welcome: लखनऊ में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का भव्य स्वागत: एक गौरवशाली क्षण

Rajeev
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आज, 25 अगस्त 2025 को, लखनऊ शहर ने अपने बेटे, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत ऐसे किया मानो पूरा शहर अंतरिक्ष से उतरे किसी हीरो का जश्न मना रहा हो। शुभांशु, जो भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के टेस्ट पायलट और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के गगनयात्री हैं, ने हाल ही में एक्सिऑम-4 मिशन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर कदम रखकर इतिहास रचा है। वे राकेश शर्मा के बाद दूसरे भारतीय हैं जिन्होंने अंतरिक्ष की यात्रा की है। उनका आज अपने गृह जनपद लखनऊ में आगमन हुआ, जो न केवल उनके लिए बल्कि पूरे शहर और देश के लिए गर्व का विषय है।

शुभांशु का जन्म 10 अक्टूबर 1985 को लखनऊ में हुआ था। वे तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके पिता शंभू दयाल शुक्ला एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी हैं, जबकि मां आशा शुक्ला गृहिणी हैं। शुभांशु ने अपनी स्कूली शिक्षा लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल (सीएमएस) से पूरी की। वे अपनी पत्नी कामना मिश्रा से स्कूल के दिनों में ही मिले थे, जो अब एक डेंटिस्ट हैं। उनका एक बेटा कियाश है। 2005 में नेशनल डिफेंस एकेडमी से कंप्यूटर साइंस में स्नातक करने के बाद, उन्होंने भारतीय वायु सेना में जॉइन किया। 2006 में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशंड होने के बाद, उन्होंने 2,000 से अधिक घंटों की उड़ान का अनुभव प्राप्त किया, जिसमें मिग-21, सु-30एमकेआई जैसे विमानों पर उड़ान शामिल है। 2019 में इसरो ने उन्हें मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए चुना, और उन्होंने रूस के यूरी गागरिन कोस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग ली।

एक्सिऑम-4 मिशन में शुभांशु मिशन पायलट थे। यह मिशन 25 जून 2025 को लॉन्च हुआ और 26 जून को आईएसएस से जुड़ा। इस दौरान उन्होंने 60 से अधिक प्रयोग किए, जिनमें से सात इसरो द्वारा निर्देशित थे। उन्होंने अंतरिक्ष से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कॉन्फ्रेंस की और स्कूली बच्चों से हैम रेडियो के माध्यम से बात की। 15 जुलाई 2025 को वे पृथ्वी पर लौटे, और 17 अगस्त को भारत पहुंचे। अब, लखनऊ में उनका यह दौरा उनके मिशन की सफलता का जश्न है, जो गगनयान कार्यक्रम को मजबूती प्रदान करेगा।

सुबह 8:30 बजे शुभांशु चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर पहुंचे। यहां उनका भव्य स्वागत हुआ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और महापौर सुषमा खरकवाल ने उनकी अगवानी की। ब्रजेश पाठक ने शुभांशु की उपलब्धि को राज्य के लिए गर्व बताया और कहा कि यह युवाओं के लिए प्रेरणा है। महापौर ने घोषणा की कि शहर में एक पार्क उनके नाम पर रखा जाएगा। एयरपोर्ट पर भारी संख्या में स्कूली बच्चे मौजूद थे, विशेष रूप से सीएमएस के छात्र जो अंतरिक्ष मिशनों और ग्रहों की पोशाकों में सजे थे। वे भारतीय ध्वज लहराते हुए "वंदे मातरम" के नारे लगा रहे थे। एक ड्रम और ट्रंपेट बैंड ने उत्सव का माहौल बनाया। शुभांशु ने अपने परिवार से मुलाकात की – माता-पिता, पत्नी और बेटे ने उन्हें गले लगाया, जो भावुक पल था।

एयरपोर्ट से जी-20 चौराहा तक रोड शो निकाला गया। शुभांशु एक ओपन-टॉप वाहन पर सवार थे, जिसमें उन्होंने गगनयान जैकेट पहनी थी, जिस पर राष्ट्रीय ध्वज और इसरो का लोगो था। हल्की बारिश के बावजूद बच्चे छतरियां लेकर सड़क के किनारे खड़े थे। कई स्थानों पर पुष्प वर्षा की गई, और शहरवासियों ने तालियां बजाकर उनका अभिवादन किया। शहर ने इस मौके के लिए तैयारी की थी – त्रिवेणी नगर स्थित उनके आवास के आसपास सफाई अभियान चला, सड़कें सजाई गईं, और बड़े डिजिटल स्क्रीनों पर उनके मिशन के क्लिप्स दिखाए गए। यह दृश्य देखकर लग रहा था मानो लखनऊ अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छू रहा हो।

शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोक भवन में उनका स्वागत करेंगे। नागरिकों की ओर से एक सम्मान समारोह आयोजित होगा, जिसमें शुभांशु अपने अनुभव साझा करेंगे। वे छात्रों को चंद्रमा पर 2040 तक उतरने का सपना देखने की सलाह देंगे, जैसा कि उन्होंने हाल ही में कहा है। यह समारोह सीएमएस के गोमती नगर एक्सटेंशन ब्रांच में होगा, जहां हजारों लोग जुटेंगे।

शुभांशु की यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की मजबूती का प्रतीक है। लखनऊ, जो पहले से ही अवध की संस्कृति के लिए जाना जाता है, अब एक अंतरिक्ष यात्री का गृहनगर बन चुका है। उनके जैसे युवा हमें सिखाते हैं कि सपने कितने भी ऊंचे क्यों न हों, मेहनत से उन्हें हासिल किया जा सकता है। आज का यह स्वागत लखनऊवासियों के दिलों में हमेशा याद रहेगा। जय हिंद!

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