गूगल का 27वां जन्मदिन: मिलिए रूथ केदार से, ब्राजीलियन अप्रवासी और स्टैनफोर्ड प्रोफेसर जिन्होंने डिजाइन किया गूगल का लोगो!
नई दिल्ली, 28 सितंबर 2025 – दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन कंपनी गूगल आज अपना 27वां जन्मदिन मना रही है। 4 सितंबर 1998 को स्थापित हुए इस दिग्गज को 27 साल पूरे हो चुके हैं, और इस खास मौके पर कंपनी ने अपने मूल 1998 वाले लोगो को फिर से सामने लाकर सभी को सरप्राइज दिया है। यह लोगो न केवल गूगल की पहचान का प्रतीक है, बल्कि एक ऐसी महिला की रचनात्मकता का भी प्रमाण है जो ब्राजील से अमेरिका तक की यात्रा कर एक आइकॉनिक डिजाइन पैदा करने वाली बनीं। हम बात कर रहे हैं रूथ केदार की – एक ब्राजीलियन अप्रवासी, कलाकार, डिजाइनर और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर। आइए, इस ब्लॉग में जानते हैं उनकी प्रेरणादायक कहानी, जो गूगल के जन्मदिन को और भी खास बना देती है।
रूथ केदार: ब्राजील से इजरायल तक की कठिन यात्रा
रूथ केदार का जन्म 27 जनवरी 1955 को ब्राजील के कैंपिनास शहर में हुआ था। बचपन में ही उनके परिवार ने आर्थिक और सामाजिक कारणों से ब्राजील छोड़ दिया, और 16 साल की उम्र में वे इजरायल चली गईं। यह एक बड़ा सांस्कृतिक झटका था – नई भाषा, नई संस्कृति, और नई चुनौतियां। लेकिन रूथ ने हार नहीं मानी। कला और गणित उनके सहारा बने। इजरायल में उन्होंने टेक्नियन – इजरायल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से आर्किटेक्चर में डिग्री हासिल की। यहां से उनकी डिजाइन की नींव पड़ी, जो बाद में दुनिया को बदलने वाली साबित हुई।
अमेरिका पहुंचने के बाद रूथ ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से डिजाइन में मास्टर्स किया। 1988 से 1999 तक वे स्टैनफोर्ड आर्ट डिपार्टमेंट में विजिटिंग प्रोफेसर रहीं, जहां उन्होंने आर्ट और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्रों को डिजाइन सिखाया। आज भी वे स्टैनफोर्ड में प्रोफेसर हैं, और उनकी कक्षाएं रचनात्मकता का प्रतीक हैं। रूथ की जिंदगी अप्रवासन की कहानी है – ब्राजील की जीवंत रंगों और लय से लेकर इजरायल की कठोरता और अमेरिका की नवाचार की दुनिया तक। उनकी कला व्यक्तिगत कहानियों से प्रेरित है, जो अक्सर उनके पुराने कामों से संवाद करती हैं।
गूगल लोगो का जन्म: एक संयोग की कहानी
1998 का साल रूथ के लिए भाग्यशाली साबित हुआ। स्टैनफोर्ड में पढ़ाते हुए उन्हें एक दोस्त सियान तान ने लैरी पेज और सर्जेई ब्रिन से मिलवाया। ये दोनों स्टैनफोर्ड के छात्र थे, जो एक नई सर्च कंपनी 'गूगल' शुरू करने वाले थे। वे लोगो और वेबसाइट डिजाइन के लिए किसी क्रिएटिव को ढूंढ रहे थे। रूथ ने प्रारंभिक स्केच दिखाए, जो पेज और ब्रिन को इतने पसंद आए कि उन्होंने उन्हें प्रोजेक्ट सौंप दिया।
रूथ ने गूगल लोगो को सरल लेकिन प्रभावशाली बनाया। उन्होंने कैटुल फॉन्ट (एक फॉन्ट जो क्लासिकल लगता है लेकिन मॉडर्न फील देता है) चुना। हर अक्षर को प्राइमरी कलर्स – लाल, नीला, पीला, हरा – से रंगा, जो अनंत संभावनाओं का प्रतीक था। आखिरी 'L' को थोड़ा झुका कर प्लेफुल टच दिया, और एक्सक्लेमेशन मार्क (!) से उत्साह जोड़ा। यह लोगो 31 मई 1999 से 1 सितंबर 2015 तक इस्तेमाल हुआ, और इसी ने गूगल की विजुअल आइडेंटिटी की बुनियाद रखी। रूथ कहती हैं, "यह डिजाइन गूगल की 'डूडल' ट्रेडिशन का जनक बना, जो आज भी कंपनी की रचनात्मकता दिखाता है।"
डिजाइन प्रक्रिया आसान नहीं थी। रूथ ने कई वर्जन बनाए, लेकिन अंत में सरलता जीती। पेज और ब्रिन की विजन – "सूचना को आसान बनाना" – को उन्होंने विजुअली कैप्चर किया। यह लोगो न केवल ब्रांडिंग का मास्टरपीस था, बल्कि टेक वर्ल्ड में डिजाइन की ताकत दिखाने वाला। आज जब गूगल अपना 27वां जन्मदिन मना रहा है, तो मूल लोगो का वापस आना रूथ को सलाम है।
रूथ का व्यापक योगदान: कला से आगे
रूथ सिर्फ गूगल तक सीमित नहीं हैं। 1988 में एडोब सिस्टम्स ने उन्हें 'एडोब डेक' – एक प्रमोशनल प्लेइंग कार्ड्स सेट – डिजाइन करने को कहा, जो अवॉर्ड विनिंग बना। बाद में 'एनालॉग डेक' और 'ड्यूलॉग डेक' भी आए। वे आइकिडो की 5th डिग्री ब्लैक बेल्ट हैं और कैलिफोर्निया में पढ़ाती हैं। उनकी आर्ट एक्सपेरिमेंटल है, जो उनके जीवन की यात्रा – साओ पाउलो के रंग, इजरायल की यादें, अमेरिका के इनोवेशन – से प्रभावित। रूथ कहती हैं, "मेरी कला मेरे युवा स्व से बातचीत है।"
निष्कर्ष: प्रेरणा की मिसाल
गूगल का 27वां जन्मदिन सिर्फ केक और डूडल्स का नहीं, बल्कि रूथ केदार जैसी महिलाओं की कहानी का जश्न है। एक ब्राजीलियन अप्रवासी से स्टैनफोर्ड प्रोफेसर बनीं रूथ ने साबित किया कि रचनात्मकता सीमाओं से परे है। आज जब गूगल अरबों यूजर्स को जोड़ता है, तो उनका लोगो हमें याद दिलाता है – सरल डिजाइन बड़ी क्रांति ला सकता है। हैप्पी बर्थडे, गूगल! और थैंक यू, रूथ – आपकी विरासत अमर है।
