Narak chaturdashi, Choti Diwali Kab hai Date Time: आज छोटी दीवाली, श्रीहनुमत जन्मोत्सव और नरक निवारण चतुर्दशी भी मनेगी; जानें पूजन का शुभ मुहूर्त!

Rajeev
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आज छोटी दीवाली, श्रीहनुमत जन्मोत्सव और नरक निवारण चतुर्दशी भी मनेगी; जानें पूजन का शुभ मुहूर्त

भारत में त्योहारों का मौसम हमेशा उत्साह और उमंग से भरा होता है, और दीवाली का पर्व तो जैसे खुशियों का पर्याय है। आज, कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को, देशभर में छोटी दीवाली, श्रीहनुमत जन्मोत्सव और नरक निवारण चतुर्दशी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। यह दिन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व से भरा हुआ है, जहां भक्त अपने घरों को सजाते हैं, दीप जलाते हैं और पूजा-अर्चना के साथ इस पर्व को उत्सव के रूप में मनाते हैं। आइए जानते हैं इन पर्वों का महत्व और पूजन के शुभ मुहूर्त।

छोटी दीवाली: प्रकाश और समृद्धि का प्रतीक

छोटी दीवाली, जिसे नरक चतुर्दशी या रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है, दीवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और घर में दीपक जलाकर नकारात्मकता को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था, जिसके कारण इसे नरक निवारण चतुर्दशी भी कहा जाता है।

छोटी दीवाली पूजन का शुभ मुहूर्त

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 18 अक्टूबर 2025, रात 11:45 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर 2025, रात 11:30 बजे
  • अभ्यंग स्नान मुहूर्त: सुबह 04:30 बजे से 06:00 बजे तक
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:30 बजे से 07:00 बजे तक

इस दौरान मां काली, भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा की जाती है। घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक जलाकर नकारात्मक शक्तियों को दूर किया जाता है।

श्रीहनुमत जन्मोत्सव: भक्ति और शक्ति का उत्सव

कुछ मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को ही श्रीहनुमान जी का जन्म हुआ था। इस दिन हनुमान भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। हनुमान जी को भक्ति, बल, और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन उनके मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाते हैं, और भक्त उन्हें लड्डू, तेल, और सिन्दूर अर्पित करते हैं।

श्रीहनुमत पूजन का शुभ मुहूर्त

  • हनुमान जी की पूजा का समय: सुबह 06:30 बजे से 08:00 बजे तक
  • हनुमान चालीसा पाठ का समय: शाम 06:00 बजे से 07:30 बजे तक

हनुमान जी की पूजा में लाल फूल, सिन्दूर, और तेल का दीपक विशेष महत्व रखता है। भक्तों को इस दिन व्रत रखकर हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

नरक निवारण चतुर्दशी: नकारात्मकता से मुक्ति

नरक निवारण चतुर्दशी का महत्व इस बात में निहित है कि यह दिन नकारात्मक ऊर्जा और पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। इस दिन सुबह अभ्यंग स्नान (उबटन और तेल से स्नान) करने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि यह स्नान नरक के भय से मुक्ति दिलाता है और स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।

नरक निवारण चतुर्दशी के लिए विशेष टिप्स

  1. अभ्यंग स्नान: सुबह सूर्योदय से पहले उबटन (चंदन, हल्दी, और तेल का मिश्रण) लगाकर स्नान करें।
  2. दीप दान: शाम को यमराज के नाम से दीपक जलाएं और दक्षिण दिशा में रखें।
  3. दान-पुण्य: इस दिन गरीबों को वस्त्र, भोजन, या तेल का दान करना शुभ माना जाता है।

कैसे मनाएं यह पर्व?

  • घर की सजावट: घर को साफ करें और रंगोली बनाकर दीपक जलाएं।
  • पूजा की तैयारी: पूजा स्थल को स्वच्छ करें और मां काली, श्रीकृष्ण, हनुमान जी, और यमराज की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • मंत्र जाप: हनुमान चालीसा, काली मंत्र, या यमराज के मंत्रों का जाप करें।
  • प्रसाद: खीर, लड्डू, और हलवे का भोग लगाएं।

निष्कर्ष

छोटी दीवाली, श्रीहनुमत जन्मोत्सव, और नरक निवारण चतुर्दशी का यह पावन दिन हमें न केवल अपने घरों को प्रकाशमय करने का अवसर देता है, बल्कि हमारे मन और आत्मा को भी शुद्ध करने का मौका देता है। इस दिन पूजा, दान, और स्नान के साथ अपने जीवन को सकारात्मकता से भरें। सभी को इस पवित्र पर्व की शुभकामनाएं!

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