Dhanteras 2025: धनतेरस: सोना, वाहन और सामान खरीद-बेचकर चमकाएं अपनी किस्मत!

Rajeev
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धनतेरस पर भारत में सोना, वाहन और अन्य सामानों की खरीद-बिक्री डेटा: एक आर्थिक चमत्कार

नमस्कार दोस्तों! दीपावली का पावन पर्व आते ही बाजारों में रौनक छा जाती है, और इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। 2025 में धनतेरस 18 अक्टूबर को मनाया गया, जो कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। 'धनतेरस' नाम ही अपने आप में जादू बिखेरता है – 'धन' यानी संपत्ति और 'तेरस' यानी तेरहवीं तिथि। यह दिन न केवल धन्वंतरि, कुबेर और यमराज की पूजा का है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों का भी केंद्र बिंदु। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, इस धनतेरस पर पूरे भारत में कुल व्यापार 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित रहा। इसमें सोना-चांदी की बिक्री अकेले 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रही, जबकि अन्य सामानों ने भी बाजार को चमकाया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऊंची कीमतों के बावजूद खरीदारी क्यों बढ़ी? इस ब्लॉग में हम धनतेरस 2024-2025 की खरीद-बिक्री डेटा पर नजर डालेंगे – सोना, वाहन और अन्य सामान। ये आंकड़े न केवल उत्साह दिखाते हैं, बल्कि आर्थिक रुझानों का भी आईना हैं। चलिए, आंकड़ों की चमक में डूबते हैं!

धनतेरस का जादुई आकर्षण

धनतेरस, जिसे 'धनत्रयोदशी' भी कहते हैं, एक ऐसा दिन है जब बाजारों में रौनक छा जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि इस दिन अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए यह दिन स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख की कामना का प्रतीक है। लोग इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदते हैं, क्योंकि मान्यता है कि यह लक्ष्मी मां को प्रसन्न करता है। लेकिन क्या आपने सोचा कि धनतेरस पुराना सामान बेचकर नया खरीदने का भी शानदार मौका हो सकता है? आइए, इसे और रोचक बनाते हुए देखते हैं कि कैसे आप इस दिन खरीद-बिक्री के खेल में माहिर बन सकते हैं!

सोना और चांदी: ऊंची कीमतों में भी चमक बरकरार

धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है, और यह परंपरा इस बार भी बरकरार रही। लेकिन रिकॉर्ड ऊंची कीमतों ने वॉल्यूम को प्रभावित किया। 2024 में सोने की कीमत 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास थी, जो 2025 में 1,30,000-1,34,800 रुपये तक पहुंच गई – यानी 60-65% की बढ़ोतरी! चांदी भी 98,000 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 1,80,000 रुपये हो गई।

खरीद-बिक्री डेटा:
CAIT के मुताबिक, सोना-चांदी की कुल बिक्री 60,000 करोड़ रुपये से अधिक रही। वॉल्यूम में 10-15% की कमी आई – 2024 के 30-35 टन से घटकर 25-30 टन – लेकिन वैल्यू में 40-45% की वृद्धि हुई। GJC के अनुसार, कुल सोने की बिक्री 20-22 टन रही, जो 16,000 करोड़ रुपये की थी। दिल्ली जैसे बाजारों में 25% ज्यादा बिक्री हुई। उपभोक्ता हल्के गहने, सिक्के और डिजिटल गोल्ड की ओर मुड़े, जबकि निवेशक भारी ज्वैलरी खरीदे। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2024 में कुल गोल्ड डिमांड 802.8 टन थी, जिसमें ज्वैलरी वॉल्यूम कम लेकिन वैल्यू ज्यादा रही।

बिक्री में कमी के बावजूद, यह डेटा दिखाता है कि सोना अभी भी सुरक्षित निवेश का प्रतीक है। ज्वैलर्स ने एक्सचेंज ऑफर्स से पुराने सोने की बिक्री को बढ़ावा दिया, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बनी रही।

वाहन: रफ्तार और समृद्धि का संगम

धनतेरस पर वाहन खरीदना नई शुरुआत का प्रतीक है। इस बार, डिस्काउंट और फाइनेंस स्कीम्स ने बिक्री को रॉकेट की स्पीड दी। गुजरात में अहमदाबाद जिले में 12,000 दोपहिया और 4,000 कारें बिकीं – पिछले साल से 118% और 81% ज्यादा! चंडीगढ़ में 1,000 फोर-व्हीलर (जिनमें 100 EV) और 2,000 टू-व्हीलर (150 EV) बिके।

खरीद-बिक्री डेटा:
मारुति सुजुकी ने धनतेरस पर 42,000 कारें डिलीवर कीं – पिछले साल के 23,000 से 80% ज्यादा! टाटा मोटर्स ने 15,000 से ज्यादा वाहन डिलीवर किए। ह्यूंदै ने 14,000 यूनिट्स की डिलीवरी की – 20% ग्रोथ। MG ने दिल्ली-NCR में 101 EV एक दिन में बेचे। कुल मिलाकर, अक्टूबर 2024 में पैसेंजर व्हीकल रजिस्ट्रेशन 4.25 लाख से ज्यादा हो गया, जो रिकॉर्ड है। लखनऊ में 1,000 फोर-व्हीलर और हजारों टू-व्हीलर बिके।

पुराने वाहनों की बिक्री भी बढ़ी, क्योंकि लोग एक्सचेंज ऑफर्स से नए ले रहे थे। EV सेगमेंट में 20-30% ग्रोथ हुई, सरकारी सब्सिडी के दम पर। यह डेटा बताता है कि मध्यम वर्ग की खरीदारी पावरफुल है!

अन्य सामान: घर-गृहस्थी की चमक

धनतेरस पर बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और पूजा सामग्री खरीदना धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक है। CAIT के अनुसार, कुल अन्य सामानों की बिक्री 40,000 करोड़ रुपये रही।

खरीद-बिक्री डेटा:

  • बर्तन और किचनवेयर: 15,000 करोड़ रुपये – कॉपर, स्टील के नए बर्तन लोकप्रिय।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल गुड्स: 10,000 करोड़ – मोबाइल, लैपटॉप, फ्रिज पर डिमांड। अमेजॉन पर लग्जरी फैशन 5 गुना बढ़ी।
  • डेकोरेटिव आइटम्स, लैंप्स और पूजा सामग्री: 3,000 करोड़ – लक्ष्मी-गणेश मूर्तियां, दीये।
  • ड्राई फ्रूट्स, मिठाई, टेक्सटाइल्स, वाहन और मिसलेनियस: 12,000 करोड़ – कपड़े, फल और झाड़ू (वास्तु के अनुसार गरीबी भगाने वाली)।

पुराने सामानों की बिक्री OLX जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ी, क्योंकि लोग नया खरीदने से पहले स्पेस क्लियर कर रहे थे। यह सेक्टर 15-18% ग्रोथ दिखाता है।

निष्कर्ष: धनतेरस की आर्थिक चमक

धनतेरस 2025 ने साबित कर दिया कि सांस्कृतिक परंपराएं आर्थिक इंजन हैं। 1 लाख करोड़ का व्यापार, ऊंची कीमतों के बावजूद, स्वदेशी अभियान और GST कटौती का नतीजा है। लेकिन सावधानी बरतें – बजट बनाएं, हॉलमार्क चेक करें। यह डेटा न केवल बाजार की ताकत दिखाता है, बल्कि समृद्धि की कामना को मजबूत करता है। अगले धनतेरस पर और चमक आए! शुभ धनतेरस!

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