Cyclone Montha to make landfall today, heavy rain batters coastal area:चक्रवात मोन्था आज तट से टकराएगा, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में भारी बारिश!

Rajeev
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चक्रवात मोन्था आज तट से टकराएगा, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में भारी बारिश

बंगाल की खाड़ी में तेजी से मजबूत हो रहा चक्रवात मोन्था आज शाम आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों से टकराने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यह चक्रवात गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में पहुंच चुका है और इसके landfall के समय हवाओं की गति 100-120 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है, जो झोंकों के साथ 130 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। इसकी वजह से दोनों राज्यों के तटीय जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो रही है, जिससे बाढ़, भूस्खलन और संपत्ति के नुकसान का खतरा बढ़ गया है। राज्य सरकारें बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चला रही हैं, ताकि जान-माल की क्षति को न्यूनतम रखा जा सके। आइए, इस चक्रवात की पूरी कहानी, इसके प्रभावों और तैयारियों पर विस्तार से नजर डालते हैं।

चक्रवात मोन्था का उदय और तीव्रता

चक्रवात मोन्था की शुरुआत दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दाब क्षेत्र के रूप में हुई थी। पिछले 48 घंटों में यह तेजी से गहरा अवदाब, फिर डिप्रेशन और अब गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल चुका है। आईएमडी की नवीनतम बुलेटिन के मुताबिक, मोन्था उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है और आज शाम 6 से 8 बजे के बीच श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश) और गोपालपुर (ओडिशा) के बीच तट से टकराएगा।

समुद्र की सतह का तापमान 28-30 डिग्री सेल्सियस होने से चक्रवात को ऊर्जा मिल रही है, जिससे इसकी तीव्रता बढ़ी है। उपग्रह चित्रों में दिख रहा विशाल बादल समूह और आई वॉल की संरचना पुष्टि करती है कि यह एक शक्तिशाली तूफान है। landfall के बाद यह कमजोर पड़ता हुआ आंतरिक इलाकों की ओर बढ़ेगा, लेकिन अगले 24-36 घंटों तक भारी बारिश जारी रहेगी।

तटीय इलाकों में बारिश का कहर

सुबह से ही आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम, विजयनगरम, श्रीकाकुलम और ओडिशा के गंजम, गजपति, पुरी जिलों में मूसलाधार बारिश हो रही है। विशाखापट्टनम में पिछले 12 घंटों में 150 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि गोपालपुर में 200 मिमी पार हो चुकी है। नदियां उफान पर हैं – गोदावरी, वंशधारा और रुषिकुल्या में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

तटीय सड़कें जलमग्न हो गई हैं, मछली पकड़ने वाली नावें बंदरगाहों में सुरक्षित बांधी गई हैं। बिजली आपूर्ति बाधित है और कई गांवों में अंधेरा छा गया है। बारिश के साथ 60-80 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं पेड़ उखाड़ रही हैं, बिजली के खंभे गिरा रही हैं और मकानों की छतें उड़ा रही हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि landfall के समय 3-5 मीटर ऊंची लहरें तटों से टकरा सकती हैं, जिससे समुद्री कटाव और बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो जाएगी।

निकासी और राहत कार्यों की दौड़

आंध्र प्रदेश और ओडिशा सरकारें अलर्ट पर हैं। आंध्र में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 20 टीमों और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की 15 टीमों को तैनात किया गया है। ओडिशा में 30 एनडीआरएफ टीमें और सेना की इकाइयां तैयार हैं। अब तक आंध्र से 1.5 लाख और ओडिशा से 1 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों – स्कूलों, कॉलेजों और राहत शिविरों – में पहुंचाया जा चुका है।

मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी और नवीन पटनायक ने उच्चस्तरीय बैठकें कीं। आंध्र में 500 से अधिक राहत शिविर खोले गए हैं, जहां भोजन, पानी, दवाइयां और कंबल उपलब्ध हैं। ओडिशा में विशेष रूप से कमजोर समुदायों – मछुआरों, आदिवासी गांवों – पर फोकस है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी दी गई है। रेलवे ने कई ट्रेनें रद्द कीं, जबकि विमान सेवाएं प्रभावित हैं। विशाखापट्टनम एयरपोर्ट बंद है।

संभावित प्रभाव और दीर्घकालिक चुनौतियां

landfall के बाद चक्रवात के प्रभाव 200-300 किमी तक फैल सकते हैं। तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। कृषि पर गहरा असर पड़ेगा – धान की फसल, जो कटाई के करीब है, पानी में डूब सकती है। मछली पालन उद्योग को करोड़ों का नुकसान हो सकता है।

बाढ़ से सड़कें, पुल और बिजली ग्रिड क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, जिससे पुनर्वास में सप्ताह लग सकते हैं। स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ेंगे – डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है। पिछले वर्षों के अम्फान, फानी और यास जैसे तूफानों से सबक लेते हुए, इस बार डिजास्टर मैनेजमेंट बेहतर है, लेकिन चुनौतियां कम नहीं।

क्या करें नागरिक?

  • तटीय इलाकों में रहने वाले लोग निकासी आदेशों का पालन करें।
  • घरों में जरूरी सामान – टॉर्च, रेडियो, दवाइयां, सूखा भोजन – रखें।
  • बिजली कटौती के लिए तैयार रहें, मोबाइल चार्ज रखें।
  • फेक न्यूज से बचें, केवल सरकारी सूचनाओं पर भरोसा करें।
  • हेल्पलाइन: आंध्र – 1070, ओडिशा – 1077।

चक्रवात मोन्था एक बड़ी परीक्षा है, लेकिन एकजुटता और तैयारी से हम इसका मुकाबला कर सकते हैं। प्रभावितों के लिए प्रार्थना और प्रशासन के प्रयासों की सराहना। उम्मीद है, न्यूनतम क्षति के साथ यह तूफान गुजर जाएगा। अधिक अपडेट के लिए आईएमडी वेबसाइट या स्थानीय न्यूज चैनल देखें।

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