बांग्लादेश में 5.2 तीव्रता का भूकंप(Earthquake hits Bangladesh): पश्चिम बंगाल में भी महसूस हुए झटके, कोई नुकसान नहीं
21 नवंबर 2025: बांग्लादेश में शुक्रवार सुबह 5.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके पश्चिम बंगाल(west Bengal) के कई जिलों में महसूस किए गए। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, यह भूकंप सुबह 10:08 से 10:10 बजे के बीच कुछ सेकंड्स के लिए महसूस किया गया। कोलकाता(Kolkatta), मालदा(Malda), नदिया(Nadiya), कूच बिहार(Bihar Kuch) और कई अन्य जिलों में लोगों ने जमीन हिलने का अहसास किया। इस भूकंप का केंद्र बांग्लादेश के ढाका के पास घोरासाल में था, और इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर बताई जा रही है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, झटके पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, यह आज का तीसरा भूकंप था, क्योंकि शुक्रवार की शुरुआत में पाकिस्तान और अफगानिस्तान में दो मध्यम तीव्रता के भूकंप आ चुके थे।
सौभाग्य से, अभी तक कोई जानमाल की हानि या बड़े नुकसान की खबर नहीं आई है। लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने अनुभव साझा करना शुरू कर दिया है। सॉल्ट लेक सेक्टर 3 के एक यूजर ने लिखा, "फैन और सोफा कम से कम सात-आठ सेकंड तक हिलते रहे। लगा जैसे सब कुछ गिर जाएगा।" ऐसे कई पोस्ट्स वायरल हो रहे हैं, जो दर्शाते हैं कि कैसे एक छोटा सा झटका भी लोगों में दहशत फैला देता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि यह भूकंप कैसे आया, इसके प्रभाव क्या रहे, और भविष्य में ऐसी आपदा से कैसे निपटा जाए। अगर आप भी भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
भूकंप का केंद्र और तीव्रता: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
भूकंप विज्ञान के अनुसार, 5.2 तीव्रता का भूकंप मध्यम श्रेणी का माना जाता है। यह इतना मजबूत होता है कि ऊपरी सतह पर हल्के झटके महसूस हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर बड़े नुकसान की संभावना कम होती है। USGS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस भूकंप का एपिसेंटर घोरासाल में था, जो ढाका से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित है। गहराई 10 किलोमीटर होने के कारण झटके सतह तक आसानी से पहुंच गए, जिसकी वजह से पड़ोसी क्षेत्रों में भी कंपन महसूस हुआ।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) और NCS ने भी इसकी पुष्टि की है। विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण एशिया का यह क्षेत्र टेक्टोनिक प्लेट्स की सीमा पर स्थित है, जहां इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव से लगातार भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। बांग्लादेश जैसे देश, जो गंगा डेल्टा पर बसे हैं, भूकंप के लिए अत्यधिक संवेदनशील हैं। हाल के वर्षों में, 2016 में ढाका के पास 5.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसने कई इमारतों को नुकसान पहुंचाया था। आज का यह भूकंप उससे थोड़ा कमजोर था, लेकिन फिर भी सतर्कता बरतने की जरूरत है।
पश्चिम बंगाल में प्रभावित जिलों की बात करें तो कोलकाता सबसे ज्यादा प्रभावित दिखा। यहां के निवासी सुबह के समय चाय-नाश्ते में व्यस्त थे, जब अचानक फर्नीचर हिलने लगा। मालदा और नदिया में स्कूलों और कार्यालयों में हलचल मच गई। कूच बिहार के ग्रामीण इलाकों में लोग बाहर भागे, जबकि दक्षिण और उत्तर दिनाजपुर में भी हल्के झटके दर्ज किए गए। पूर्वोत्तर भारत में असम, त्रिपुरा और मेघालय के कुछ हिस्सों में भी कंपन महसूस हुआ। USGS के डेटा से पता चलता है कि भूकंप की लहरें 200 किलोमीटर के दायरे में फैलीं, जो भारत-बांग्लादेश सीमा को पार कर गईं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं: डर और जागरूकता का मिश्रण
आज के डिजिटल युग में, भूकंप जैसे घटनाओं की पहली खबर सोशल मीडिया से ही आती है। ट्विटर (अब X) पर #BangladeshEarthquake और #WestBengalTremors जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "कोलकाता में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक कमरा घूमने लगा। भगवान भला करे!" वहीं, दूसरी ओर कुछ लोग जागरूकता फैला रहे हैं। एक प्रसिद्ध भूवैज्ञानिक ने पोस्ट किया, "भूकंप आने पर ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन का फॉर्मूला अपनाएं। बाहर न भागें।"
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां लोग अपने घरों के अंदर कैमरे से झटके रिकॉर्ड कर रहे हैं। सॉल्ट लेक के उस यूजर की पोस्ट को हजारों लाइक्स मिल चुके हैं। यह दर्शाता है कि कैसे एक छोटी घटना भी सामूहिक चिंता का विषय बन जाती है। लेकिन सकारात्मक पक्ष यह है कि सोशल मीडिया आपदा प्रबंधन में मददगार साबित हो रहा है। सरकारें और एनजीओ तुरंत हेल्पलाइन नंबर जारी कर रही हैं। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल सरकार ने 112 इमरजेंसी नंबर पर संपर्क करने की सलाह दी है।
हालिया भूकंपीय गतिविधियां: एक चेन रिएक्शन?
आज का यह भूकंप अकेला नहीं था। NCS के अनुसार, शुक्रवार की सुबह पाकिस्तान में 4.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके बाद अफगानिस्तान में 5.1 तीव्रता का झटका महसूस हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि ये घटनाएं हिमालयन बेल्ट से जुड़ी हो सकती हैं, जो दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है। भारत में दिल्ली-एनसीआर से लेकर गुवाहाटी तक, हर साल सैकड़ों छोटे-बड़े भूकंप आते हैं। 2023 में तुर्की-सीरिया भूकंप ने 50,000 से ज्यादा जानें लीं, जो एक सबक है कि तैयारी कितनी जरूरी है।
बांग्लादेश में भूकंप का इतिहास भी दर्दनाक है। 1930 में ढाका में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। आजादी के बाद, 1993 में भी एक बड़ा झटका आया। इन घटनाओं से सीखते हुए, बांग्लादेश सरकार ने भूकंप प्रतिरोधी भवनों के निर्माण पर जोर दिया है। भारत में भी, भूकंप जोन 4 और 5 वाले क्षेत्रों (जैसे पश्चिम बंगाल का उत्तरी हिस्सा) में सख्त बिल्डिंग कोड लागू हैं। फिर भी, पुरानी इमारतें खतरे में हैं।
भूकंप से बचाव: क्या करें और क्या न करें?
भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से पूरी तरह बचना असंभव है, लेकिन सही कदम उठाकर नुकसान कम किया जा सकता है। यहां कुछ महत्वपूर्ण टिप्स हैं:
- भूकंप आने पर: तुरंत ड्रॉप हो जाएं (झुकें), कवर लें (मजबूत टेबल के नीचे छिपें) और होल्ड ऑन करें (हिलने न दें)। खिड़कियों, अलमारियों से दूर रहें।
- घर की तैयारी: आपातकालीन किट तैयार रखें – पानी, दवाइयां, टॉर्च, रेडियो और सूखा राशन। भूकंप रोधी फर्नीचर लगवाएं।
- बाद में: गैस लीक की जांच करें, क्षतिग्रस्त इमारतों में न जाएं। स्थानीय प्रशासन की मदद लें।
स्कूलों और कार्यालयों में ड्रिल करवाना भी जरूरी है। पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में 'भूकंप जागरूकता अभियान' शुरू किया है, जो ऐसे ही घटनाओं के बाद और मजबूत होगा।
निष्कर्ष: सतर्कता ही सुरक्षा है
बांग्लादेश में 5.2 तीव्रता का यह भूकंप एक चेतावनी है कि दक्षिण एशिया का यह क्षेत्र कब क्या कर सकता है, कोई नहीं जानता। पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के निवासियों ने हल्के झटके महसूस कर सिहरन महसूस की, लेकिन कोई बड़ा नुकसान न होना राहत की बात है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कहानियां दर्शाती हैं कि कैसे एक सामूहिक अनुभव हमें एकजुट करता है। लेकिन अब समय है जागरूकता बढ़ाने का। सरकारें, विशेषज्ञ और आम नागरिक मिलकर भूकंप प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा बनाएं। याद रखें, प्रकृति के प्रकोप से लड़ाई तैयारी से जीती जाती है।
अगर आप इस भूकंप से प्रभावित हैं, तो स्थानीय हेल्पलाइन से संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए USGS या IMD की वेबसाइट चेक करें। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें!