अमेरिकी रिपोर्ट का झटका: भारत-पाकिस्तान संघर्ष(India-Pakistan War) में पाकिस्तान को 'सैन्य सफलता', कांग्रेस ने सरकार से कड़ी पूछताछ की!

Rajeev
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अमेरिकी रिपोर्ट का झटका: भारत-पाकिस्तान संघर्ष(India-Pakistan War) में पाकिस्तान को 'सैन्य सफलता', कांग्रेस ने सरकार से कड़ी पूछताछ की!

अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट ने भारत की विदेश नीति को लेकर सवालों का दौर खड़ा कर दिया है। यूएस-चीन इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष में पाकिस्तान को सैन्य बढ़त मिली थी। यह दावा न केवल भारत के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गया है, बल्कि चीन की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाओं को भी उजागर कर रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे भारत की कूटनीति के लिए गंभीर झटका बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से जवाब मांगा है, जबकि सत्ताधारी बीजेपी ने परोक्ष रूप से विपक्ष पर ही निशाना साधा है।

इस 745 पृष्ठों वाली रिपोर्ट में दक्षिण और मध्य एशिया में चीन के रणनीतिक प्रभाव पर एक पूरा अध्याय समर्पित है। आइए, इस विवादास्पद रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं, भारत-पाकिस्तान संघर्ष 2025 की सच्चाई, चीन के दुष्प्रचार अभियान और भारतीय राजनीति में मचे हंगामे को विस्तार से समझते हैं।

मई 2025 का संघर्ष: क्या वाकई पाकिस्तान का पलड़ा भारी था?

रिपोर्ट के अनुसार, 7 से 10 मई 2025 तक चले इस संघर्ष की शुरुआत जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए एक घातक हमले से हुई, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। USCC ने इसे 'विद्रोहियों का हमला' बताया है, जो भारत के दावे से अलग है जहां इसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी कार्रवाई कहा गया। दोनों देशों ने एक-दूसरे की सीमाओं में 50 वर्षों में सबसे गहरे हमले किए।

रिपोर्ट के पेज 107-109 पर स्पष्ट रूप से कहा गया है: "पाकिस्तान की सैन्य सफलता ने चीनी हथियारों को प्रदर्शित किया"। पाकिस्तानी सेना ने चीनी निर्मित HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल्स और J-10 फाइटर जेट्स का पहली बार वास्तविक युद्ध में इस्तेमाल किया। ये हथियार न केवल भारत के खिलाफ प्रभावी साबित हुए, बल्कि चीन के लिए एक 'लाइव टेस्टिंग ग्राउंड' बने। 2019-2023 के बीच पाकिस्तान की 82% हथियार आयात चीन से ही हुए हैं।

भारतीय सेना ने दावा किया था कि संघर्ष में उन्होंने पाकिस्तान की सीमा में कई आतंकी ढांचों को नष्ट कर दिया और पूर्ण सफलता हासिल की। लेकिन USCC रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेना के डिप्टी चीफ ने स्वयं स्वीकार किया कि चीन ने पाकिस्तान को 109 भारतीय सैन्य ठिकानों पर 'लाइव इनपुट्स' प्रदान किए। पाकिस्तान ने इन आरोपों का खंडन किया, लेकिन रिपोर्ट इसे चीन की अवसरवादी रणनीति बताती है। संघर्ष के बाद पाकिस्तान ने अपना रक्षा बजट 20% बढ़ाकर 9 अरब डॉलर कर दिया और चीन से 40 J-35 फाइटर जेट्स, KJ-500 एयरक्राफ्ट और बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स खरीदने का सौदा किया।

यह संघर्ष दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को बदलने वाला साबित हुआ। भारत पाकिस्तान संघर्ष 2025 ने न केवल सीमा तनाव को बढ़ाया, बल्कि चीन को क्षेत्रीय शक्ति के रूप में मजबूत किया।

चीन का दुष्प्रचार अभियान: राफेल को बदनाम, J-35 को बढ़ावा

रिपोर्ट का एक चौंकाने वाला हिस्सा चीन के डिसइन्फॉर्मेशन कैंपेन पर है। संघर्ष के बाद चीन ने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स और AI-जनरेटेड इमेजेस का सहारा लेकर फ्रेंच राफेल जेट्स को बदनाम करने का अभियान चलाया। रिपोर्ट के पेज 108-109 पर उल्लेख है कि पाकिस्तान ने चीनी हथियारों से केवल तीन भारतीय जेट्स गिराए, जिनमें से सभी राफेल नहीं थे। फिर भी, चीन ने AI और वीडियो गेम इमेजेस से 'डेब्री' (मलबा) की फर्जी तस्वीरें फैलाईं, जिससे राफेल की बिक्री प्रभावित हुई।

फ्रेंच इंटेलिजेंस के अनुसार, चीन ने इस कैंपेन से इंडोनेशिया को राफेल खरीद रद्द करने पर मजबूर किया, ताकि उसके अपने J-35 फाइटर जेट्स को बढ़ावा मिले। चीनी दूतावासों ने पाकिस्तान की 'सफलता' को प्रचारित कर हथियार बिक्री बढ़ाई। यह घटना चीन दुष्प्रचार राफेल की खोज में रुचि रखने वालों के लिए चेतावनी है कि कैसे AI तकनीक वैश्विक हथियार बाजार को प्रभावित कर रही है।

पहलगाम हमला: 'विद्रोही' या पाकिस्तानी साजिश?

रिपोर्ट में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले को 'इंसर्जेंट अटैक' कहा गया है, जो भारत के 'पाकिस्तान स्पॉन्सर्ड टेरर' दावे से मेल नहीं खाता। SCO की अगस्त 2025 घोषणा में इसे निंदा मिली, लेकिन भारत ने जून 2025 की एक SCO बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया क्योंकि इसमें हमले का जिक्र नहीं था। यह विवाद जम्मू-कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय पटल पर उछाल रहा है।

भारतीय राजनीति में बवाल: कांग्रेस का हमला, बीजेपी का पलटवार

रिपोर्ट आने के बाद भारत में राजनीतिक तूफान आ गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे 'गंभीर कूटनीतिक असफलता' बताया और पूछा: "क्या सरकार ने अमेरिकी आयोग को भारत की सफलता के सबूत नहीं दिए?" उन्होंने पीएम मोदी और ईएएम जयशंकर पर निशाना साधा कि यह रिपोर्ट भारत के सार्वजनिक बयानों का खंडन करती है। कांग्रेस ने संसद में चर्चा की मांग की है।

वहीं, बीजेपी ने विपक्ष को 'राष्ट्रविरोधी' ठहराते हुए कहा कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर बीजेपी समर्थक कांग्रेस को पाकिस्तानी प्रचार से जोड़ रहे हैं। यह कांग्रेस बीजेपी विवाद USCC रिपोर्ट का नया अध्याय है, जो 2024 लोकसभा चुनावों के बाद भी जारी है।

दक्षिण एशिया में चीन का विस्तार: SCO और सीमा वार्ताएं

रिपोर्ट दक्षिण-मध्य एशिया में चीन के प्रभाव पर फोकस करती है। 2025 में चीन-पाकिस्तान ने वॉरियर-VIII काउंटर-टेरर ड्रिल्स और AMAN नेवल एक्सरसाइज कीं। मध्य एशिया में चीन ने रूस को पछाड़कर प्रमुख आर्थिक साझेदार बन गया, व्यापार 10.4% बढ़ा।

भारत-चीन तनाव कम करने के प्रयासों का जिक्र भी है। पीएम मोदी ने अगस्त 2025 में तियानजिन में SCO समिट में हिस्सा लिया – 2020 गलवान संघर्ष के बाद चीन की पहली यात्रा। मोदी-शी जिनपिंग की साइड मीटिंग में सीमा डी-एस्केलेशन, आर्थिक सहयोग, फ्लाइट्स बहाल और तिब्बत तीर्थयात्रा विस्तार पर सहमति बनी। यह भारत चीन SCO बैठक 2025 की दिशा में सकारात्मक कदम है, लेकिन LAC पर चीन की इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्डिंग चिंता बनी हुई है।

निष्कर्ष: क्या सबक लेगा भारत?

USCC रिपोर्ट न केवल भारत पाकिस्तान सैन्य संघर्ष 2025 की सच्चाई उजागर करती है, बल्कि चीन की हाइब्रिड वारफेयर (हथियार + डिसइन्फॉर्मेशन) को भी। भारत को अपनी कूटनीति मजबूत करनी होगी – अमेरिकी आयोगों से तथ्य साझा करना, AI काउंटर-डिसइन्फो टूल्स विकसित करना और क्षेत्रीय गठबंधनों को मजबूत करना। क्या सरकार जवाब देगी? टिप्पणियों में अपनी राय साझा करें। अधिक अपडेट्स के लिए सब्सक्राइब करें!

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