6.9 magnitude earthquake hits northern Japan: Tsunami warning lifted, but danger remains: उत्तरी जापान में 6.9 तीव्रता का भूकंप; सुनामी की चेतावनी हटी, लेकिन खतरा अभी बरकरार!

Rajeev
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उत्तरी जापान में 6.9 तीव्रता का भूकंप: सुनामी की चेतावनी हटी, लेकिन खतरा अभी बरकरार

दिनांक: 10 नवंबर 2025

नमस्कार पाठकों! प्रकृति की मार कभी भी, कहीं भी आ सकती है, और जापान जैसे देश के लिए यह बात और भी सच्ची है। रविवार शाम को उत्तरी जापान के तटवर्ती इलाके को एक शक्तिशाली भूकंप ने हिला दिया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (जेएमए) के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता शुरुआत में 6.8 बताई गई थी, लेकिन बाद में इसे 6.9 कर दिया गया। यह भूकंप इवाते प्रान्त के तट से लगभग 16 किलोमीटर की गहराई पर 5:03 बजे जापानी समय पर आया। इसके तुरंत बाद कई आफ्टरशॉक्स ने पूरे क्षेत्र को डरा दिया। सुनामी की चेतावनी जारी हुई, लेकिन तीन घंटे बाद इसे हटा लिया गया। फिर भी, एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगले एक सप्ताह तक, खासकर अगले दो-तीन दिनों में, मजबूत भूकंपों का खतरा बना रहेगा। आइए, इस घटना की गहराई से पड़ताल करते हैं और समझते हैं कि जापान की यह 'रिंग ऑफ फायर' वाली स्थिति कितनी चुनौतीपूर्ण है।

भूकंप का आगमन: डरावनी शाम

कल्पना कीजिए, आप शाम के समय घर पर हैं या सड़क पर चल रहे हैं, और अचानक जमीन आपके पैरों तले खिसक जाती है। यही हुआ इवाते प्रान्त के निवासियों के साथ। भूकंप के केंद्र से तट की दूरी महज कुछ किलोमीटर थी, जिसने पूरे उत्तरी तटीय क्षेत्र को प्रभावित किया। जेएमए ने तुरंत सुनामी चेतावनी जारी कर दी, जिसमें कहा गया कि लहरें 1 मीटर तक ऊंची हो सकती हैं। बाद में अपडेट में कुछ जगहों पर 3 मीटर तक की ऊंचाई का अनुमान लगाया गया। लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने, ऊंचे स्थानों पर जाने और आफ्टरशॉक्स से सावधान रहने की सलाह दी गई।

सुनामी की लहरें भूकंप के बाद घंटों तक जारी रह सकती हैं। वे बार-बार तट को चूम सकती हैं और कभी-कभी समय के साथ और तेज हो जाती हैं। इस बार, सौभाग्य से, लहरें ज्यादा घातक साबित नहीं हुईं। ऑफुनाटो शहर में 10 सेंटीमीटर ऊंची लहरें दर्ज की गईं, जबकि ओमिनाटो पोर्ट, मियाको और कामाइशी में भी यही ऊंचाई देखी गई। कूजी तटीय क्षेत्र में यह 20 सेंटीमीटर तक पहुंच गई, और ऑफुनाटो में बाद में भी 20 सेंटीमीटर की लहरें आईं। तीन घंटे की तनावपूर्ण प्रतीक्षा के बाद चेतावनी हटा ली गई, लेकिन राहत महज आधी थी। एजेंसी के अधिकारियों ने संवाददाताओं को बताया कि क्षेत्र में भूकंपों का खतरा एक सप्ताह तक बना रहेगा।

इस श्रृंखला में इवाते प्रान्त में कई और भूकंप दर्ज किए गए। होक्काइडो द्वीप, जो जापान का सबसे उत्तरी प्रमुख द्वीप है, भी इस झटके से नहीं बच सका। जेआर ईस्ट रेलवे ऑपरेटर के अनुसार, क्षेत्र में बुलेट ट्रेनें अस्थायी रूप से रुक गईं, जिससे यात्रियों को असुविधा हुई। अभी तक कोई बड़ी क्षति या हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय निवासी सतर्कता बरत रहे हैं। जापान की उन्नत भूकंप चेतावनी प्रणाली ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित की, जो सेकंडों पहले ही अलर्ट दे देती है।

जापान का भूकंप इतिहास: 2011 की काली यादें

जापान प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार टक्कर से भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और सुनामी जैसी आपदाएं आम हैं। दुनिया के सबसे भूकंप-प्रवण देशों में शुमार जापान में हर साल हजारों छोटे-बड़े झटके महसूस होते हैं। लेकिन उत्तरी-पूर्वी जापान का यह इलाका तो विशेष रूप से संवेदनशील है। 2011 की त्रासदी की यादें अभी भी ताजा हैं – 11 मार्च को फुकुशिमा में 9.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने 40 मीटर ऊंची सुनामी लहरें पैदा कीं। यह त्रिगुट आपदा (भूकंप, सुनामी और फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र का पिघलना) ने लगभग 20,000 लोगों की जान ले ली, ज्यादातर सुनामी से।

फुकुशिमा, जो इवाते के ठीक दक्षिण में है, आज भी एक जख्म है। परमाणु संयंत्र को गंभीर क्षति पहुंची, जिससे रेडियोएक्टिव रिसाव हुआ। एक दशक से ज्यादा बीत जाने के बाद भी हजारों लोग 'नो-गो जोन' से विस्थापित हैं। घर-बार छोड़कर वे कहीं और रहने को मजबूर हैं। परमाणु ऊर्जा के जोखिमों के खिलाफ प्रदर्शन आज भी होते रहते हैं। शनिवार को ही फुकुशिमा में एक ऐसा प्रदर्शन हुआ, जहां प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर परमाणु जोखिमों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। वे कहते हैं कि सरकार अभी भी परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है, जबकि 2011 जैसी घटना सबक न ले।

एजेंसी के एक अधिकारी ने रविवार देर रात संवाददाताओं से कहा कि इस नवीनतम भूकंप का 2011 वाली घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है। हालांकि, क्षेत्र सामान्य रूप से बड़े भूकंपों के लिए जोखिम भरा है। उन्होंने 1992 के एक बड़े भूकंप का भी जिक्र किया, जो इसी इलाके में आया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रशांत प्लेट और उत्तर-अमेरिकी प्लेट की टक्कर से यहां लगातार दबाव बनता रहता है, जो कभी भी फट सकता है।

चुनौतियां और सबक: सतर्कता ही सुरक्षा

यह भूकंप हमें कई सबक देता है। पहला, प्रकृति के प्रकोप से पूरी तरह बचा नहीं जा सकता, लेकिन तैयारी से जान-माल की हानि कम की जा सकती है। जापान की भूकंप-रोधी इमारतें, आपदा प्रबंधन प्रणाली और जन जागरूकता इसकी मिसाल हैं। स्कूलों में बच्चों को बचाव के तरीके सिखाए जाते हैं, और हर घर में इमरजेंसी किट रखना अनिवार्य है। लेकिन क्या पर्याप्त है? विशेषज्ञों का कहना है कि सुनामी की चेतावनी प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत है, क्योंकि लहरें अनुमान से ज्यादा ऊंची हो सकती हैं।

दूसरा, परमाणु ऊर्जा का मुद्दा। 2011 के बाद जापान ने कई परमाणु संयंत्र बंद कर दिए, लेकिन ऊर्जा संकट के कारण कुछ को फिर चालू करने की कोशिश हो रही है। प्रदर्शनकारी चेताते हैं कि भूकंप-प्रवण क्षेत्र में यह जोखिम भरा है। वैश्विक स्तर पर, यह बहस छेड़ती है – क्या नवीकरणीय ऊर्जा ही भविष्य है? भारत जैसे विकासशील देशों के लिए भी यह प्रासंगिक है, जहां भूकंप जोन में कई परियोजनाएं चल रही हैं।

अंत में, यदि आप जापान यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो जेएमए की वेबसाइट और ऐप्स चेक करें। भूकंप अलर्ट ऐप डाउनलोड करें और स्थानीय निर्देशों का पालन करें। यह घटना हमें याद दिलाती है कि जीवन अनिश्चित है, लेकिन सतर्कता से हम इसे सुरक्षित बना सकते हैं।

दोस्तों, आपकी क्या राय है? क्या जापान की आपदा प्रबंधन प्रणाली से हम सीख सकते हैं? कमेंट्स में अपनी विचारधारा साझा करें। इस ब्लॉग को शेयर करें ताकि जागरूकता फैले। सुरक्षित रहें, प्रकृति का सम्मान करें!

स्रोत: जापान मौसम विज्ञान एजेंसी, विभिन्न समाचार रिपोर्ट्स और ऐतिहासिक डेटा!

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