लेंसकार्ट शेयरों में कमजोर लिस्टिंग के बाद उछाल: निवेशकों को खरीदना चाहिए, बेचना चाहिए या होल्ड करना चाहिए? विस्तार से समझाया
दिनांक: 10 नवंबर 2025
आज के तेजी से बदलते शेयर बाजार में आईपीओ लिस्टिंग एक बड़ा आकर्षण बन चुकी है। निवेशक नई कंपनियों के शेयरों में निवेश करने के लिए उत्सुक रहते हैं, खासकर जब वह कंपनी किसी उभरते बाजार में लीडर हो। लेंसकार्ट सॉल्यूशंस जैसी कंपनी, जो भारत की सबसे बड़ी आईवियर रिटेल चेन है, ने हाल ही में अपना आईपीओ लॉन्च किया था। लेकिन लिस्टिंग डे पर जो कुछ हुआ, वह थोड़ा निराशाजनक था। फिर भी, बाजार की सकारात्मक धारा ने शेयरों को उछाल दिया। क्या यह निवेशकों के लिए खरीदने का सिग्नल है, या फिर मुनाफा बुक करने का समय? आइए, इस ब्लॉग में हम लेंसकार्ट के शेयरों की लिस्टिंग, रिबाउंड, आईपीओ की डिटेल्स और एक्सपर्ट्स की राय को विस्तार से समझते हैं।
लिस्टिंग का कमजोर आगमन और फिर रिबाउंड
11 नवंबर 2025 को लेंसकार्ट सॉल्यूशंस के शेयरों ने स्टॉक मार्केट में डेब्यू किया। आईपीओ प्राइस ₹402 रखे जाने के बावजूद, बीएसई पर शेयर ₹390 पर लिस्ट हुए, जो 3% की डिस्काउंट था। एनएसई पर यह डिस्काउंट थोड़ा कम था – 1.74% पर ₹395। यह कमजोर शुरुआत निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर रही थी, क्योंकि ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) लिस्टिंग से पहले ही गिर चुका था। लेकिन बाजार की सकारात्मक सेंटिमेंट ने जल्द ही रंग दिखाया। सेशन के दौरान शेयर बीएसई पर ₹409.90 के हाई तक पहुंचे, जबकि एनएसई पर यह ₹413.75 तक चढ़ गए। यह रिबाउंड आईपीओ की मजबूत सब्सक्रिप्शन और कंपनी की ग्रोथ स्टोरी को देखते हुए आया।
यह उतार-चढ़ाव बाजार की वोलेटाइल नेचर को दर्शाता है। लिस्टिंग डे पर ट्रेडिंग वॉल्यूम हाई रहा, और रिटेल निवेशकों की भागीदारी ने शेयर को सपोर्ट दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ शॉर्ट-टर्म रिबाउंड है, या लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का संकेत? आइए पहले आईपीओ की डिटेल्स देखें।
लेंसकार्ट आईपीओ(Lenskart IPO): सफलता की कहानी
लेंसकार्ट का आईपीओ 6-8 नवंबर 2025 के बीच खुला था और यह 28.26 गुना सब्सक्राइब हुआ। कंपनी ने कुल ₹7,278.02 करोड़ जुटाए, जिसमें फ्रेश इश्यू के तहत 5.35 करोड़ इक्विटी शेयर ₹2,150 करोड़ के थे, जबकि ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) में 12.76 करोड़ शेयर ₹5,128.02 करोड़ के बिके। यह आईपीओ रिटेल, एनएचआई और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) कैटेगरी में जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। रिटेल कैटेगरी 15 गुना से ज्यादा ओवरसब्सक्राइब हुई, जो कंपनी की पॉपुलैरिटी को दिखाता है।
लेंसकार्ट, जो 2010 में स्थापित हुई, भारत के ऑर्गनाइज्ड आईवियर मार्केट में 80% से ज्यादा शेयर रखती है। कंपनी के पास 2,000 से ज्यादा स्टोर्स हैं, और यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी मजबूत मौजूदगी रखती है। वर्टिकली इंटीग्रेटेड मॉडल – इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डेटा-ड्रिवन सप्लाई चेन तक – ने इसे कॉम्पिटिटर्स से अलग किया है। सब्सक्रिप्शन-बेस्ड रेवेन्यू (जैसे होम आई-ट्राय) और टियर-2, टियर-3 शहरों में एक्सपैंशन ने ग्रोथ को बूस्ट दिया। एफवाई25 में कंपनी का रेवेन्यू ₹6,652 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 23% ऊपर है, और ईबीआईटीडीए मार्जिन 14.6% पर पहुंच गया। यह प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम है।
भारतीय आईवियर मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। स्टेटिस्टा के अनुसार, यह 2025 तक $4 बिलियन का हो जाएगा, और ऑर्गनाइज्ड सेगमेंट 15% सालाना ग्रो करेगा। लेंसकार्ट की स्मार्ट आईवियर और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन कस्टमर एक्सपीरियंस इसे फ्यूचर-रेडी बनाती है। लेकिन वैल्यूएशन का सवाल बड़ा है – पीई रेशियो 238 गुना है, जो हाई ग्रोथ स्टॉक के लिए भी प्रीमियम लगता है।
एक्सपर्ट्स की राय: बाय, सेल या होल्ड?
मिंट ने एक्सपर्ट्स से बात की, और उनकी राय मिक्स्ड है। ज्यादातर लॉन्ग-टर्म के लिए पॉजिटिव हैं, लेकिन वैल्यूएशन और रिस्क्स को लेकर सतर्क। आइए देखें प्रमुख ओपिनियन्स।
शिवानी नयाती, स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट की हेड ऑफ वेल्थ, कहती हैं: "लेंसकार्ट की प्रीमियम ब्रांड परसेप्शन, सब्सक्रिप्शन-बेस्ड रेवेन्यू स्ट्रीम और टियर-2, टियर-3 मार्केट्स में बढ़ती पेनेट्रेशन ने इसे भारत के तेजी से बढ़ते ऑर्गनाइज्ड आईवियर मार्केट में कैटेगरी लीडर बना दिया है।" वह अलॉटेड शेयरों वाले निवेशकों को मीडियम-टू-लॉन्ग टर्म के लिए होल्ड करने की सलाह देती हैं, क्योंकि अर्निंग्स विजिबिलिटी और स्टोर फुटप्रिंट एक्सपैंडिंग है। स्टॉप-लॉस ₹350 रखें। लेकिन शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए, एग्जिट करें और बेहतर ऑपर्च्युनिटी ढूंढें।
सीमा श्रीवास्तव, एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट, कंपनी के रॉबस्ट एफवाई25 परफॉर्मेंस की तारीफ करती हैं: "₹6,652 करोड़ रेवेन्यू और 14.6% ईबीआईटीडीए मार्जिन के साथ, लेंसकार्ट भारत और विदेश में बढ़ते आईवियर मार्केट से फायदा उठाने के लिए अच्छी पोजिशन में है। इनोवेशन, स्मार्ट आईवियर और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन कस्टमर एक्सपीरियंस पर फोकस लॉन्ग-टर्म ग्रोथ आउटलुक को मजबूत करता है।" लेकिन वह वैल्यूएशन को रिच मानती हैं – फ्यूचर ग्रोथ पहले ही प्राइस्ड इन है। हाई-रिस्क अपेटाइट वाले निवेशक होल्ड या करेक्शन पर अक्यूमुलेट करें, लेकिन कंजर्वेटिव निवेशक वैल्यूएशन कम्फर्ट या प्रॉफिटेबिलिटी विजिबिलिटी का इंतजार करें। रिस्क्स जैसे इंपोर्टेड मटेरियल्स पर डिपेंडेंसी, सप्लाई चेन डिसरप्शन, कॉम्पिटिशन और ग्लोबल एक्सपैंशन में मार्जिन चैलेंजेस को हाइलाइट करती हैं।
अभिनव तिवारी, बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट, ज्यादा सतर्क हैं: "शेयर 3% नीचे लिस्ट हुए, जो हाई वैल्यूएशन की चिंता दिखाता है – पीई रेशियो 238 गुना है, जो स्ट्रॉन्ग ग्रोथ को पहले ही फैक्टर कर चुका है।" वह क्यू2 रिजल्ट्स का इंतजार करने और 15-20% प्राइस करेक्शन की सलाह देते हैं। न्यू इनवेस्टर्स बेहतर एंट्री लेवल का वेट करें, क्योंकि लॉन्ग रन में मार्केट स्टॉक की ट्रू वैल्यू से अलाइन होता है। कंपनी का रैपिड एक्सपैंशन और हेवी स्पेंडिंग शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट्स को हर्ट कर सकता है, और वैल्यूएशन में सेफ्टी का कम रूम है।
प्रोस एंड कॉन्स: बैलेंस्ड व्यू
प्रोस:
- मजबूत मार्केट लीडरशिप: 80% शेयर ऑर्गनाइज्ड सेगमेंट में।
- ग्रोथ ड्राइवर्स: स्टोर एक्सपैंशन (2025 तक 3,000 स्टोर्स), इंटरनेशनल फुटप्रिंट (सिंगापुर, मलेशिया)।
- इनोवेशन: एआई-बेस्ड वर्चुअल ट्राय-ऑन, स्मार्ट ग्लासेस।
- प्रॉफिटेबिलिटी ट्रैक: एफवाई25 में पॉजिटिव ईबीआईटीडीए।
कॉन्स:
- हाई वैल्यूएशन: पीई 238x, जो ग्रोथ को ओवरप्राइस्ड बनाता है।
- रिस्क्स: इंपोर्ट डिपेंडेंसी (चाइना से), कॉम्पिटिशन (टाइटन, वार्बी पार्कर), ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन।
- कैपेक्स: एक्सपैंशन पर भारी खर्च, जो मार्जिन्स को प्रेशर दे सकता है।
मार्केट कंडीशंस भी महत्वपूर्ण हैं। निफ्टी 50 हाल ही में 24,000 के ऊपर ट्रेड कर रहा है, लेकिन ग्लोबल क्यूज जैसे यूएस इलेक्शन और इंटरेस्ट रेट्स अनिश्चितता ला सकते हैं।
निष्कर्ष: आपकी स्ट्रैटेजी क्या हो?
अगर आप लॉन्ग-टर्म इनवेस्टर हैं और हाई-ग्रोथ स्टोरी में भरोसा रखते हैं, तो होल्ड करें या डिप पर बाय। लेंसकार्ट का फ्यूचर ब्राइट लगता है, खासकर डिजिटल और हेल्थकेयर ट्रेंड्स के साथ। लेकिन अगर आप रिस्क-अवर्स हैं या शॉर्ट-टर्म ट्रेडर, तो प्रॉफिट बुक करें या एंट्री का इंतजार करें। हमेशा अपनी रिस्क टॉलरेंस और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन को ध्यान में रखें। क्यू2 रिजल्ट्स (फरवरी 2026) तक वेट करना स्मार्ट हो सकता है।
कुल मिलाकर, लेंसकार्ट की जर्नी इंस्पायरिंग है – एक स्टार्टअप से यूनिकॉर्न तक। लेकिन स्टॉक मार्केट में 'बाय लो, सेल हाई' का नियम कभी न भूलें। निवेश से पहले फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।
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