IND vs SA: कुलदीप यादव का धमाकेदार रिकॉर्ड, टेस्ट क्रिकेट में स्पिनरों का नया बादशाह बना 'चाइनामैन'!
गुवाहाटी, 24 नवंबर 2025: क्रिकेट के मैदान पर रिकॉर्ड टूटते हैं, लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं जो इतिहास रच देते हैं। भारतीय लेग स्पिनर कुलदीप यादव ने गुवाहाटी के सरसेई क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में न सिर्फ अपनी धमाकेदार गेंदबाजी से दक्षिण अफ्रीका को परेशान किया, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया जो दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को हैरत में डाल गया। कुलदीप ने अब तक 50 या इससे अधिक विकेट लेने वाले सभी स्पिनरों में सबसे बेहतरीन स्ट्राइक रेट का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। सिर्फ 31 पारियों में 36.4 के स्ट्राइक रेट से 75 विकेट हासिल करने वाले कुलदीप अब दुनिया के पहले स्पिनर बन चुके हैं जो इस आंकड़े को पार कर चुके हैं। पूर्व इंग्लिश स्पिनर जॉनी ब्रिग्स का 45.1 का पुराना रिकॉर्ड धूल चाट रहा है। यह उपलब्धि न सिर्फ कुलदीप की काबिलियत का प्रमाण है, बल्कि भारतीय स्पिन आक्रमण की ताकत को भी दुनिया के सामने ला खड़ी करती है।
गुवाहाटी टेस्ट: जहां रिकॉर्ड बने और इतिहास रचा गया
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला गुवाहाटी में खेला जा रहा है, जहां पिच की धीमी प्रकृति ने स्पिनरों को राज करने का मौका दिया। पहले टेस्ट में कोलकाता में 30 रन से हार झेलने के बाद भारत वापसी की कोशिश में उतरा। भारतीय कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी, लेकिन टीम 255 रनों पर ऑलआउट हो गई। अब दूसरे दिन तक दक्षिण अफ्रीका ने अपनी पहली पारी में 489 रन बना लिए, जिसमें सेनुरन मुथुसामी का शानदार शतक (109 रन) और मार्को जानसेन की विस्फोटक 93 रनों की पारी ने भारत को दबाव में डाल दिया। मुथुसामी और वॉरेन बार्ड 56 और 38 रन बनाकर नाबाद लौटे जब खेल समाप्त हुआ। भारत ने अपनी दूसरी पारी शुरू की तो 9 रनों पर बिना विकेट खोए 480 रनों से पीछे था।
इस मुश्किल स्थिति में कुलदीप यादव ने भारतीय गेंदबाजी का बोझ अकेले उठाया। पहली पारी में उन्होंने 4 विकेट झटके (4/115), जिसमें महत्वपूर्ण ब्रेकथ्रू जैसे डेविड मिलर और अन्य बल्लेबाजों को आउट करना शामिल था। कुलदीप की गेंदें पिच से धीरे-धीरे उठ रही थीं, जो दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों के लिए पहेली बनी रहीं। रेयान टेन डोएस्केटे, दक्षिण अफ्रीका के सहायक कोच ने भी कुलदीप की तारीफ की: "उस सतह पर पहले दिन तीन विकेट लेना आसान नहीं था। कुलदीप का स्ट्राइक रेट पहले से ही फेनोमिनल है। वह विकेट लेने वाला गेंदबाज है।" कुलदीप की यह पारी न सिर्फ मैच का टर्निंग पॉइंट बनी, बल्कि उनके करियर का भी एक मील का पत्थर साबित हुई।
स्ट्राइक रेट का जादू: आंकड़ों में कुलदीप की महानता
टेस्ट क्रिकेट में स्पिनरों के लिए स्ट्राइक रेट (प्रति विकेट गेंदों की औसत संख्या) एक महत्वपूर्ण पैमाना होता है। कम स्ट्राइक रेट का मतलब है कि गेंदबाज जल्दी-जल्दी विकेट लेता है, जो आधुनिक क्रिकेट में दुर्लभ है। कुलदीप ने इस सूची में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। यहां देखिए टेस्ट में 50 या अधिक विकेट लेने वाले स्पिनरों में बेस्ट स्ट्राइक रेट की टॉप-5 सूची:
| रैंक | स्पिनर | देश | स्ट्राइक रेट | विकेट | पारियां |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | कुलदीप यादव | IND | 36.4 | 75 | 31 |
| 2 | जॉनी ब्रिग्स | ENG | 45.1 | 118 | 49 |
| 3 | कॉलिन ब्लाइथ | ENG | 45.4 | - | - |
| 4 | अक्षर पटेल | IND | 46.6 | - | - |
| 5 | साइमन हार्मर | SA | 47.2 | - | - |
(नोट: डेटा नवीनतम मैच तक का है।)
कुलदीप ने सिर्फ 15 टेस्ट मैचों में यह मुकाम हासिल किया, जो ब्रिग्स के 49 पारियों से आधे से भी कम है। ब्रिग्स ने 19वीं सदी में इंग्लैंड के लिए खेलते हुए यह रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन कुलदीप ने आधुनिक युग की चुनौतियों के बीच इसे तोड़ दिया। कुलदीप के आंकड़े देखें तो उनका औसत 21.69 है, जो किसी भी स्पिनर के लिए शानदार है। उन्होंने 68 विकेट 15 टेस्ट में लिए, जो भारतीय इतिहास में सबसे तेज 50 विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शुमार है। यह रिकॉर्ड न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय स्पिन परंपरा को मजबूत करता है, जहां राशिद खान या अब्दुल कadir जैसे नाम पहले थे, लेकिन कुलदीप ने इसे नया आयाम दिया।
कुलदीप का सफर: चाइनामैन से विश्व रिकॉर्ड होल्डर तक
कुलदीप यादव का क्रिकेट सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। उत्तर प्रदेश के कानपुर में 14 दिसंबर 1994 को जन्मे कुलदीप को बचपन से ही स्पिन गेंदबाजी का शौक था। 'चाइनामैन' स्टाइल – बाएं हाथ से ऑफ ब्रेक जैसी गेंदें फेंकना – उन्हें खास बनाता है। 2016 में डेब्यू करने वाले कुलदीप ने वनडे और टी20 में जल्दी सफलता पाई, लेकिन टेस्ट में चोटों और असंगत चयन ने उन्हें पीछे धकेला। 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू टेस्ट में 4 विकेट लेने के बावजूद, वे लंबे समय तक बेंच पर रहे।
2022 में इंग्लैंड के खिलाफ वापसी के बाद कुलदीप ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बेंगलुरु टेस्ट में 5/72 की पारी ने उन्हें स्थापित किया। फिर ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 2024-25 में उन्होंने 20 विकेट लिए, जो भारतीय स्पिनरों का रिकॉर्ड है। कुलदीप की ताकत उनकी विविधता में है – गुगली, फ्लिपर, लेग स्पिन और टॉप स्पिन का मिश्रण जो बल्लेबाजों को भ्रमित करता है। कप्तान रोहित शर्मा ने कहा, "कुलदीप हमारी स्पिन इकाई का दिल है। उसका आत्मविश्वास और सटीकता मैच विनर है।" कुलदीप ने खुद कहा, "यह रिकॉर्ड टीम के प्रयासों का नतीजा है। गुवाहाटी की पिच ने मदद की, लेकिन फोकस विकेट लेने पर था।"
भारतीय टीम के बदलाव और दक्षिण अफ्रीका की रणनीति
इस मैच में भारत ने अपनी प्लेइंग इलेवन में दो बदलाव किए। शुभमन गिल की जगह साई सुदर्शन को मौका दिया गया, जबकि अक्षर पटेल के स्थान पर नीतीश कुमार रेड्डी को शामिल किया गया। यह बदलाव बल्लेबाजी को मजबूत करने का प्रयास था, लेकिन गेंदबाजी में कुलदीप और रविचंद्रन अश्विन पर निर्भरता बढ़ गई। दक्षिण अफ्रीका ने पहले टेस्ट की जीत के बाद एक बदलाव किया – कोर्बिन बॉश की जगह सेनुरन मुथुसामी को लिया, जो सही साबित हुआ। मुथुसामी का शतक दक्षिण अफ्रीका की बल्लेबाजी की गहराई दिखाता है।
भारत के लिए चुनौती बड़ी है। 480 रनों का पीछा असंभव लगता है, लेकिन नेम्पी शील्ड के साथ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप पॉइंट्स दांव पर हैं। अगर भारत ड्रॉ कर ले, तो सीरीज 1-1 से बराबर हो जाएगी। कुलदीप की भूमिका दूसरी पारी में भी अहम होगी, जहां वे दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों को जल्दी साफ करने की कोशिश करेंगे।
कुलदीप का योगदान: भारतीय टेस्ट टीम का नया हीरा
कुलदीप की यह उपलब्धि भारतीय टेस्ट टीम के पुनरुत्थान का प्रतीक है। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे तेज गेंदबाजों के साथ स्पिन विभाग में अश्विन, जडेजा और अब कुलदीप का तिकड़ी कोई टीम रोक नहीं सकती। कुलदीप ने साबित कर दिया कि घरेलू पिचों पर स्पिनर राज करते हैं, लेकिन विदेशी दौनों पर भी वे प्रभावी हैं। उनके 75 विकेटों में से 40 घरेलू मैदानों पर आए, लेकिन स्ट्राइक रेट कहीं कम नहीं पड़ा। विश्व क्रिकेट में यह रिकॉर्ड चर्चा का विषय बना हुआ है। पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने ट्वीट किया, "कुलदीप का स्ट्राइक रेट देखकर लगता है जैसे वह जादूगर है। भारत का भविष्य उज्ज्वल है।"
भविष्य की ओर: कुलदीप का सफर जारी
कुलदीप अभी 30 साल के भी नहीं हैं, और उनके पास और कई रिकॉर्ड तोड़ने का मौका है। अगले साल ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वे फिर से चुनौती लेंगे। कुलदीप ने कहा, "मैं सिर्फ रिकॉर्ड के पीछे नहीं हूं, टीम की जीत ही मेरा लक्ष्य है।" गुवाहाटी टेस्ट में उनका प्रदर्शन न सिर्फ रिकॉर्ड बुक में जगह बनाएगा, बल्कि युवा स्पिनरों के लिए प्रेरणा बनेगा।
अंत में, कुलदीप यादव ने साबित कर दिया कि मेहनत और प्रतिभा से कोई भी रिकॉर्ड असंभव नहीं। विश्व क्रिकेट हैरत में है, लेकिन भारत गर्व से निहार रहा है। यह टेस्ट मैच अभी जारी है, लेकिन कुलदीप का यह अध्याय इतिहास के पन्नों में हमेशा चमकता रहेगा। क्या भारत इस मुश्किल हालात से उबर पाएगा? आने वाले दिन बताएंगे। जय हिंद, जय क्रिकेट!