मस्ती 4 रिव्यू(Masti 4 movie review): पुरानी यादें ताजा करती फ्रैंचाइजी की चौथी कड़ी – हंसी, मस्ती और थोड़ी सी क्रिंज!
21 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई मस्ती 4 (Mastiii 4) बॉलीवुड की पॉपुलर कॉमेडी फ्रैंचाइजी की चौथी कड़ी है। 2004 में शुरू हुई इस सीरीज ने मस्ती, ग्रैंड मस्ती और ग्रेट ग्रैंड मस्ती के जरिए दर्शकों को ढेर सारी हंसी और डबल मीनिंग जोक्स से सराबोर किया था। अब 21 साल बाद, निर्देशक मिलाप जावेरी ने एक बार फिर अमर (ऋतिक देशमुख), प्रेम (अफताब शिवदासानी) और मीत (विवेक ओबेरॉय) को स्क्रीन पर उतारा है। क्या यह फ्रैंचाइजी अभी भी अपनी पुरानी चमक बरकरार रख पाई है? या समय के साथ यह थक चुकी है? आइए, मस्ती 4 रिव्यू में हम इसकी हर परत को खोलते हैं – प्लॉट, एक्टिंग, डायरेक्शन, म्यूजिक और ज्यादा से ज्यादा। अगर आप कॉमेडी लवर्स हैं, तो यह रिव्यू आपके लिए है!
मस्ती 4 का प्लॉट: पुरानी शरारतों का नया ट्विस्ट
मस्ती 4 की कहानी यूनाइटेड किंगडम में सेट है, जहां तीन दोस्त – अमर, प्रेम और मीत – अपनी शादियों की जकड़नों से तंग आ चुके हैं। अमर की पत्नी बिंदिया (एलनाज नोरोजी) इतनी दयालु है कि घर में हर कोई आश्रित बन जाता है, मीत की पत्नी अंचल (श्रेया शर्मा) उसकी हर हरकत पर नजर रखती है, और प्रेम की पत्नी गीता (रूही सिंह) हर धर्म-रिवाज को निभाती है। ये तीनों पुराने दिनों की आजादी के लिए बेताब हैं। फिर आता है उनका दोस्त कामराज (अरशद वारसी) और उसकी पत्नी (नरगिस फखरी), जो एक 'लव वीजा' का राज खोलते हैं – जो पतियों को हफ्ते में एक दिन शरारत करने की आजादी देता है।
इंस्पायर्ड होकर तीनों दोस्त अपनी पत्नियों से वैसा ही वीजा मांगते हैं, लेकिन ट्विस्ट तब आता है जब पत्नियां खुद इस 'लव वीजा' का इस्तेमाल करके विदेश घूमने चली जाती हैं! अब पतियों को घर संभालना पड़ता है, और बीच में आते हैं डॉन पाब्लो पुतिनवा (तुषार कपूर), प्रिंस ऑफ गुड टाइम्स (निशांत मलकानी) और इंस्पेक्टर वीरत (शाद रंधावा) जैसे कैरेक्टर्स, जो मस्ती को और हंगामा भरा बनाते हैं। बिना स्पॉइलर दिए कहें तो, यह फिल्म फ्रैंचाइजी की पुरानी थीम को रिवर्स ट्विस्ट के साथ पेश करती है – जहां पत्नियां मस्ती करती हैं और पति परेशान! पहले हाफ में रेसy और इमेजिनेटिव सीन हैं, लेकिन सेकंड हाफ में टॉयलेट ह्यूमर थोड़ा क्रिंज हो जाता है। कुल मिलाकर, अगर आप मस्ती सीरीज के फैन हैं, तो यह नॉस्टैल्जिया से भरपूर है।
कास्ट एंड परफॉर्मेंस: ट्रियो की केमिस्ट्री अभी भी कमाल
मस्ती 4 की जान है इसका ओरिजिनल ट्रियो – ऋतिक देशमुख, विवेक ओबेरॉय और अफताब शिवदासानी। 21 साल बाद भी इनकी केमिस्ट्री वैसी ही फ्रेश लगती है, जैसे पहली फिल्म में। ऋतिक अमर के रोल में अपने शार्प टाइमिंग और फेसियल एक्सप्रेशंस से हंसाते हैं – उनका 'ट्राईड एंड टेस्टेड' कॉमिक रिदम फिल्म को बोरिंग होने से बचाता है। विवेक मीत के किरदार में थोड़ा चार्म दिखाते हैं, लेकिन कुछ ओवर-द-टॉप रिएक्शंस फोर्स्ड लगते हैं। अफताब प्रेम में सबसे ज्यादा स्ट्रगल करते नजर आते हैं, लेकिन उनका अंडररेटेड टैलेंट यहां भी झलकता है।
सपोर्टिंग कास्ट में अरशद वारसी का कैमियो क्वर्की और मजेदार है, लेकिन तुषार कपूर डॉन के रोल में नॉइजी कारिकेचर बनकर रह जाते हैं – उनकी टाइमिंग मिस हो जाती है। नरगिस फखरी और एलनाज नोरोजी पत्नियों के रोल में ठीक हैं, खासकर एलनाज का एक्सेंट और स्क्रीन टाइम इंप्रेस करता है। रूही सिंह और श्रेया शर्मा भी डीसेंट हैं। कुल मिलाकर, कास्ट वीक मटेरियल को भी हैंडल करती है, लेकिन अगर एक्टर्स थोड़े फिटर दिखते, तो 21 साल के गैप को बेहतर जस्टिफाई कर पाते।
डायरेक्शन एंड स्क्रीनप्ले: मिलाप जावेरी का नो-होल्ड्स-बार्ड अप्रोच
मिलाप मिलन जावेरी की डायरेक्शन फ्रैंचाइजी की रॉची और चीकी स्पिरिट को बनाए रखती है। स्क्रीनप्ले (मिलाप और फार्रोख धोंडी द्वारा) पन-फिल्ड है – जैसे 'रोसी रोटी' वाला जोक क्लासिक हिंदी फिल्म्स का रेफरेंस देता है। पहला हाफ रेसी और इमेजिनेटिव है, जिसमें स्लैपस्टिक और डबल मीनिंग डायलॉग्स का तड़का है। लेकिन सेकंड हाफ में 15-20 मिनट का टॉयलेट ह्यूमर क्रिंज इंड्यूस करता है, जो हाउसफुल लेवल से आगे निकल जाता है। फिल्म सोशल मैसेज भी देती है, लेकिन अचानक इंस्पिरेशन की तरह। मिलाप ने फैंस के लिए अनएपोलोजेटिक कॉमेडी बनाई है – हाईब्रो क्रिटिक्स को इग्नोर करते हुए। अगर आप जॉनर के आफिसिनाडोस हैं, तो यह काम करेगी।
म्यूजिक एंड टेक्निकल साइड: गाने पुराने जादू को मिस करते हैं
मस्ती सीरीज के गाने हमेशा हिट रहे हैं, लेकिन मस्ती 4 में म्यूजिक डिसअपॉइंटिंग है। 'ट्विंकल ट्विंकल चमके स्टार, समथिंग ट्रबलिंग मुझको यार' जैसे लिरिक्स जुवेनाइल लगते हैं। हालांकि, 'रसिया बालामा' और 'पकड़ पकड़' जैसे ट्रैक्स कैची हैं और फिल्म के टोन से मैच करते हैं। बैकग्राउंड स्कोर ओवर-द-टॉप है, जो मस्ती को बढ़ाता है। टेक्निकलली, सिनेमेटोग्राफी यूके सेटिंग्स को खूबसूरती से कैप्चर करती है, लेकिन एडिटिंग सेकंड हाफ में ढीली पड़ जाती है।
स्ट्रेंग्थ्स एंड वीकनेसेस: क्या है खास, क्या है कमी?
स्ट्रेंग्थ्स:
- ट्रियो की फेमिलियर केमिस्ट्री और हाई-एनर्जी परफॉर्मेंस, जो वीक जॉक्स को भी बेच देती है।
- पहला हाफ रेसी और पन-पैक्ड, फ्रैंचाइजी फैंस के लिए परफेक्ट मास एंटरटेनर।
- रिवर्स मस्ती ट्विस्ट और कैमियोज (अरशद वारसी, तुषार कपूर) जो नॉस्टैल्जिया जगाते हैं।
- अनएपोलोजेटिक ह्यूमर, जो मल्टीप्लेक्स ऑडियंस को भी गुदगुदाता है।
वीकनेसेस:
- लेजी और रिपीटेटिव जॉक्स, जो फ्रैंचाइजी को टायर्ड फील कराते हैं।
- सेकंड हाफ का क्रिंज टॉयलेट ह्यूमर और बिलो-द-बेल्ट कॉमेडी, जो हेडेक दे सकती है।
- सपोर्टिंग कास्ट (खासकर तुषार) नॉइजी और न्यूएंस-फ्री।
- गाने जुवेनाइल, पुरानी फिल्मों के मुकाबले कमजोर।
कुल मिलाकर, मस्ती 4 नॉस्टैल्जिया पर चल रही है, लेकिन फ्रेश आइडियाज की कमी महसूस होती है। इंडिया टुडे ने इसे 1.5/5 दिया, कहते हुए "लाउड, ल्यूड एंड पेनफुली लेजी", जबकि कोइमोई ने 3/5 रेटिंग दी, इसे "वाइल्ड, पन-फिल्ड एंटरटेनर" बताते हुए।
मेरा रेटिंग: 2.5/5 – फैंस के लिए वॉचेबल, बाकियों के लिए स्किप
मस्ती 4 उन दर्शकों के लिए है जो डबल मीनिंग जोक्स और स्लैपस्टिक पसंद करते हैं। यह फ्रैंचाइजी को जीवित रखती है, लेकिन 'मस्ती 5' का प्रॉमिस एंड में सोचने पर मजबूर कर देता है – क्या यह सीरीज को रेस्ट देना चाहिए? अगर आप थिएटर में हंसना चाहते हैं, तो वीकेंड पर देख लें। अन्यथा, नेटफ्लिक्स पर पुरानी मस्ती देखें।
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