आयकर विभाग की 'धमकी भरी'(Intimidating tone by I-T dept) ईमेल से टैक्सपेयर्स में हड़कंप: KSCAA ने उठाई आवाज, ITR संशोधन की अनिवार्यता पर सवाल!

Rajeev
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आयकर विभाग की 'धमकी भरी'(Intimidating tone by I-T dept) ईमेल से टैक्सपेयर्स में हड़कंप: KSCAA ने उठाई आवाज, ITR संशोधन की अनिवार्यता पर सवाल


नमस्कार, प्रिय पाठकों! अगर आप एक सैलरीड कर्मचारी हैं, छोटा-मोटा निवेशक हैं या प्रॉपर्टी डीलिंग में रुचि रखते हैं, तो हाल की आयकर विभाग की ईमेल ने आपकी नींद उड़ा दी होगी। "ITR मिसमैच मिला है, 31 दिसंबर तक संशोधन करें वरना जांच होगी!" – ऐसी लाइन पढ़कर कौन न डर जाए? लेकिन रुकिए, यह कोई 'टैक्स नोटिस' नहीं है, बल्कि एक 'इंटिमेशन' है। फिर भी, इसका टोन इतना आक्रामक क्यों है कि ईमानदार टैक्सपेयर्स में घबराहट फैल गई है?

18 दिसंबर 2025 को आयकर विभाग ने स्पष्ट किया कि ये मैसेज केवल अनुपालन के लिए 'नजदीकी' हैं, लेकिन कर्नाटक स्टेट चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एसोसिएशन (KSCAA) ने इसे 'धमकी भरा' बताते हुए विभाग को पत्र लिखा। KSCAA के डायरेक्ट टैक्स कमिटी चेयरमैन दीपक चोपड़ा ने ET वेल्थ को कहा, "हमारी चिंता सत्यापन से नहीं, बल्कि इन ऑटोमेटेड मैसेज के आक्रामक टोन और जल्दबाजी के निष्कर्षों से है। ईमानदार टैक्सपेयर्स को स्पष्टीकरण का मौका मिलना चाहिए, न कि डर।"

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर यह AIS मिसमैच क्या बला है, KSCAA की शिकायत के मुख्य बिंदु क्या हैं, और टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए। चलिए, शुरू करते हैं!

AIS मिसमैच इंटिमेशन: टैक्सपेयर्स के लिए क्या मतलब?

आयकर विभाग ने हाल ही में लाखों टैक्सपेयर्स को ईमेल भेजे हैं, जिनमें AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) मिसमैच का जिक्र है। AIS एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आपके बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी डील, विदेशी संपत्ति, फॉरेन इनकम और अन्य ट्रांजेक्शन को ट्रैक करता है। अगर आपका ITR (इनकम टैक्स रिटर्न) इन डेटा से मैच नहीं करता, तो सिस्टम अलर्ट भेजता है।

उदाहरण के लिए:

  • अगर आपने प्रॉपर्टी बेची लेकिन कैपिटल गेन रिपोर्ट नहीं किया।
  • विदेशी बैंक अकाउंट या एसेट छिपाया।
  • फॉरेन इनकम का खुलासा नहीं किया।

विभाग का कहना है कि ये इंटिमेशन FY 2024-25 के लिए हैं और 31 दिसंबर 2025 तक ITR रिवाइज करने का मौका दे रहे हैं। लेकिन समस्या यह है कि ईमेल का सब्जेक्ट लाइन – "ITR एक्शन रिक्वायर्ड बाय 31st डिसेंबर... ITR मिसमैच आइडेंटिफाइड" – इतना डरावना है कि सीनियर सिटीजन या साधारण सैलरीड लोग पैनिक मोड में चले जाते हैं।

KSCAA के अनुसार, ये मैसेज हजारों को प्रभावित कर रहे हैं, जिनमें से कई ने पहले ही ITR फाइल कर चुके हैं। क्या यह सिस्टम की कमी है या इरादतन डराना? आगे देखते हैं।

(ITR फाइलिंग गाइड 2025 पढ़ें |आयकर विभाग की ऑफिशियल AIS पोर्टल)

KSCAA की शिकायत: 'ट्रस्ट, नॉट फियर' का नारा क्यों?

18 दिसंबर 2025 को KSCAA ने आयकर बोर्ड को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) सौंपी। इसमें कहा गया कि वे वेरिफिकेशन ड्राइव का समर्थन करते हैं, लेकिन ईमेल का टोन, कंटेंट और प्रोसीजरल लॉजिक गलत है। दीपक चोपड़ा ने जोर दिया, "डिजिटल टैक्स सिस्टम का आधार विश्वास होना चाहिए, डर नहीं।"

KSCAA का मुख्य तर्क: ये मैसेज मानते हैं कि विभाग का डेटा 'पूर्ण सत्य' है और टैक्सपेयर का ITR 'गलत'। इससे ईमानदार लोग गलत रिवाइजन करने को मजबूर हो जाते हैं। प्रतिनिधित्व में चार मुख्य चिंताएं हाइलाइट की गईं। आइए, इन्हें विस्तार से समझें।

1. आक्रामक और धमकी भरा टोन: 'डेलिबरेट चॉइस' का आरोप क्यों गलत?

ईमेल में लिखा है: "हमने इस मिसमैच को एरर माना है। लेकिन अगर आप अभी एक्शन नहीं लेंगे, तो इसे डेलिबरेट चॉइस मानेंगे। इससे आपका केस डिटेल्ड इन्वेस्टिगेशन के लिए चुना जा सकता है।"

KSCAA का कहना: यह भाषा थ्रेटेनिंग है और सिटिजन-सेंट्रिक अप्रोच से मेल नहीं खाती। 'डेलिबरेट चॉइस' कहना टैक्सपेयर पर मेंस रिया (गुनाह का इरादा) लगाना है, बिना स्पष्टीकरण के।

प्रभाव:

  • सीनियर सिटीजन या सैलरीड एम्प्लॉयी में मेंटल स्ट्रेस।
  • गलत सेल्फ-कंप्लायंस, जो बाद में पेनल्टी का कारण बनेगा।
  • सिटिजन चार्टर के विपरीत, जो ट्रस्ट पर जोर देता है।

KSCAA सुझाव: टोन को फेसिलिटेटिव बनाएं – 'क्लैरिफिकेशन सीक' कहें, न कि 'इन्वेस्टिगेशन'।

2. 'रिवाइजन' की जल्दबाजी: स्पष्टीकरण का मौका क्यों न दें?

ईमेल सीधे कहता है: "31 दिसंबर 2025 तक ITR रिवाइज करें।" यह मानता है कि टैक्सपेयर गलत है। KSCAA का तर्क: पहले वेरिफिकेशन हो, फिर रिवाइजन। कई केस में मिसमैच इंटरप्रिटेटिव या टेक्निकल होता है।

उदाहरण: अगर TDS डिडक्ट हो गया लेकिन इनकम अभी क्रिस्टलाइज नहीं हुई, तो रिवाइजन गलत होगा। कानूनी रूप से, सही ITR बदलना अनटेनेबल है।

3. एल्गोरिदम की गलतियां: फॉल्स पॉजिटिव्स के कई उदाहरण

यहां KSCAA ने सबसे मजबूत पॉइंट उठाया – ऑटोमेटेड सिस्टम कॉन्टेक्स्ट को इग्नोर करता है। कुछ स्पेसिफिक केस:

  • रेंटल इनकम क्लासिफिकेशन: TDS u/s 194I पर आधारित। सिस्टम मानता है कि सभी रेंट 'हाउस प्रॉपर्टी' के अंदर है। लेकिन:
    • वैकेंट लैंड या प्लांट मशीनरी का रेंट 'अदर सोर्सेज' या 'बिजनेस इनकम' में जाता है।
    • सब-लेटिंग में, टेनेंट (नॉन-ओनर) का इनकम 'अदर सोर्सेज' u/s 56 में।
    समस्या: 'हाउस प्रॉपर्टी' शेड्यूल खाली देख सिस्टम फ्लैग करता है, भले ही 'अदर सोर्सेज' में रिपोर्ट हो।
  • इनवेस्टमेंट vs. इनकम: Rs 1 लाख इनकम लेकिन Rs 50 लाख FD – फ्लैग! सिस्टम पुरानी सेविंग्स या एग्जेम्प्ट इनकम (PPF) को इग्नोर करता है।
  • TDS u/s 194Q ऑन अनलिस्टेड शेयर्स: शेयर्स 'गुड्स' हैं, तो बायर TDS काटता है। लेकिन सिस्टम इसे 'बिजनेस टर्नओवर' मानता है, जबकि इन्वेस्टर के लिए 'कैपिटल गेन' है।
  • पैसिव इनकम क्लासिफिकेशन: कमीशन को हमेशा PGBP (प्रॉफिट्स एंड गेंस ऑफ बिजनेस) में डालने का दबाव। लेकिन ऑकेजनल कमीशन 'अदर सोर्सेज' u/s 56 में सही है।
  • टाइमिंग मिसमैच (Section 194-IA): एग्रीमेंट टू सेल पर TDS, लेकिन सेल डीड नहीं हुई। कैपिटल गेन अभी नहीं, TDS कैरी फॉरवर्ड (Rule 37BA(3))। फिर भी फ्लैग!

ये उदाहरण दिखाते हैं कि सिस्टम रिजिड मैपिंग पर चलता है, लॉ की फ्लेक्सिबिलिटी को नजरअंदाज। KSCAA: "एल्गोरिदम को सभी हेड्स चेक करने दो।"

4. प्रोसीजरल बायस: रिवाइजन आसान, डिस्प्यूट मुश्किल

ईमेल रिवाइजन के स्टेप्स (लॉगिन > e-फाइल > नई फाइलिंग) डिटेल में बताता है, लेकिन डिस्प्यूट के लिए सिर्फ "AIS पोर्टल पर डिस्प्यूट करें"। KSCAA: यह बायस रिवाइजन की तरफ धकेलता है, भले डेटा गलत हो।

सुझाव: डिस्प्यूट गाइड भी ऐड करें, ताकि टैक्सपेयर्स एम्पावर हों।

KSCAA के सुझाव: टैक्स सिस्टम को बेहतर कैसे बनाएं?

KSCAA ने सकारात्मक सुझाव दिए, जो ईमानदार टैक्सपेयर्स के हक में हैं:

  1. भाषा सुधार: 'नजदीकी' और 'इंक्वायरी' टोन अपनाएं। 'डेलिबरेट' या 'इन्वेस्टिगेशन' हटाएं।
  2. कॉल टू एक्शन चेंज: 'रिस्पॉन्स सबमिट करें' कहें, न कि 'रिवाइज मांडेटरी'। रिवाइज वॉलंटरी रखें।
  3. एल्गोरिदम रिफाइन: सभी हेड्स (जैसे रेंट के लिए 'अदर सोर्सेज') चेक करें।
  4. फीडबैक मैकेनिज्म: e-वेरिफिकेशन में 'एग्री/डिसअग्री' बटन + ओपन टेक्स्ट फील्ड। एक्सप्लेनेशन स्वीकार होने पर केस ड्रॉप।
  5. गाइडेंस बराबर: फीडबैक स्टेप्स भी डिटेल में दें।

ये बदलाव लागू हों तो डिजिटल टैक्स सिस्टम ट्रस्ट-बेस्ड बनेगा।

टैक्सपेयर्स के लिए प्रैक्टिकल एडवाइस: घबराएं नहीं, स्मार्ट स्ट्रैटेजी अपनाएं

अगर आपको ऐसी ईमेल मिली है, तो:

  • पहला स्टेप: AIS पोर्टल पर लॉगिन करें और डेटा वेरिफाई करें। AIS चेक करने का तरीका।
  • दूसरा: अगर मिसमैच सही लगे, तो ITR रिवाइज करें। लेकिन अगर गलत, तो फीडबैक सबमिट करें – एक्सप्लेनेशन के साथ डॉक्यूमेंट्स अटैच।
  • तीसरा: CA से कंसल्ट करें। KSCAA जैसे बॉडीज हेल्पलाइन चला रही हैं।
  • चौथा: डेडलाइन मिस न करें, लेकिन जल्दबाजी में गलती न करें। 31 दिसंबर 2025 तक टाइम है।

टिप: विदेशी एसेट के लिए Schedule FA भरना भूलें नहीं। प्रॉपर्टी डील पर Section 194-IA TDS क्लेम करें।

(KSCAA ऑफिशियल वेबसाइट)

निष्कर्ष: ट्रस्ट बिल्डिंग ही टैक्स सिस्टम की कुंजी

आयकर विभाग का उद्देश्य अनुपालन बढ़ाना सराहनीय है, लेकिन KSCAA की शिकायत सही दिशा दिखाती है। डर से नहीं, विश्वास से टैक्स कलेक्शन बेहतर होगा। अगर ये बदलाव आएं, तो FY 2025-26 में टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी।

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