नई दिल्ली: शाकाहारी जीवनशैली को अपनाने वाले लाखों लोग दाल, रोटी, सब्जी और फलों से भरपूर डाइट को संतुलित मानते हैं। यह सरलता और स्वास्थ्य का प्रतीक लगती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस 'स्वस्थ' डाइट के पीछे एक बड़ा खतरा छिपा है? हां, हम बात कर रहे हैं विटामिन B12 की कमी की। AIIMS दिल्ली से ट्रेन्ड न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका सहरावत ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी कि पौधों पर निर्भर शुद्ध शाकाहारी डाइट विटामिन B12 प्रदान नहीं कर पाती। "प्लांट्स B12 प्रोड्यूस नहीं करते क्योंकि उन्हें इसकी जरूरत नहीं पड़ती," डॉ. सहरावत कहती हैं। इससे नसों, खून और डीएनए निर्माण पर बुरा असर पड़ता है। प्यूबमेड स्टडीज और हालिया रिसर्च बताते हैं कि भारत में शाकाहारियों में B12 की कमी 47% से 70% तक आम है। अगर आप भी शाकाहारी हैं, तो सुस्ती, सीढ़ियां चढ़ने में थकान या पैरों में झुनझुनी महसूस कर रहे हैं, तो इसे थकान का बहाना न बनाएं। यह B12 डेफिशिएंसी का संकेत हो सकता है। आइए, इस पोस्ट में विस्तार से समझते हैं - कारण, लक्षण, स्टडीज, रोकथाम और शाकाहारी फूड्स। यह गाइड न केवल आम लोगों के लिए, बल्कि हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए भी उपयोगी है।
विटामिन B12 क्यों है इतना महत्वपूर्ण? नसों और खून का रखवाला
विटामिन B12 कोई साधारण पोषक तत्व नहीं है। यह रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में मदद करता है, जिससे हीमोग्लोबिन लेवल मजबूत रहता है और ऑक्सीजन पूरे शरीर में सही पहुंचता है। इसके अलावा, यह डीएनए बनाने और रिपेयर करने में सेंट्रल रोल निभाता है - यानी जीवन का ब्लूप्रिंट। सबसे क्रूशियल, यह नर्व फाइबर्स के आसपास मायेलिन शीथ बनाता है, जो सिग्नल्स को तेजी से ट्रांसफर करता है। कमी होने पर नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स जैसे सुन्नता या बैलेंस लॉस हो सकता है।
हालिया NIH फैक्ट शीट (2025) के अनुसार, शाकाहारियों में B12 की कमी 3.6% से 12.5% तक होती है, लेकिन भारत जैसे देश में यह आंकड़ा कहीं ज्यादा है। एक मेटा-एनालिसिस (2025) में पाया गया कि भारतीय शाकाहारियों में 65% मामलों में कमी देखी गई, खासकर महिलाओं (55%) और एडोलसेंट्स (49%) में। NIH विटामिन B12 फैक्ट शीट पढ़ें।
शाकाहारी डाइट में B12 कमी के लक्षण: इन्हें इग्नोर न करें
शुरुआत में लक्षण हल्के लगते हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर हो जाते हैं। डॉ. सहरावत के अनुसार, शाकाहारी लोग अक्सर थकान को रूटीन फटीग का नाम देते हैं, लेकिन यह B12 की कमी का अलार्म है। प्रमुख लक्षण:
- शारीरिक: असामान्य थकान, कमजोरी, पीली या पीली त्वचा, सांस फूलना, वजन घटना।
- न्यूरोलॉजिकल: उंगलियों या पैरों में सुन्नता, झुनझुनी (टिंगलिंग), बैलेंस प्रॉब्लम्स, चक्कर आना।
- मानसिक: मूड स्विंग्स, डिप्रेशन, मेमोरी लॉस, चिड़चिड़ापन।
- अन्य: मुंह में अल्सर, जीभ में दर्द, बाल झड़ना, त्वचा सूखना।
एक 2024 स्टडी (Wiley) में पाया गया कि वेजन्स में B12 कमी से एंडोथीलियल फंक्शन प्रभावित होता है, जो हार्ट हेल्थ को रिस्क में डालता है। बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं में यह डेवलपमेंटल डिले और एनीमिया का कारण बनता है। इंटरनल लिंक: हमारी पिछली पोस्ट - शाकाहारी डाइट के हेल्थ बेनिफिट्स। हिंदी सर्च "B12 कमी के लक्षण" पर टॉप रैंकिंग के लिए, हमने बुलेट पॉइंट्स यूज किए, जो रीडेबिलिटी बढ़ाते हैं।
क्यों शाकाहारियों को ज्यादा खतरा? प्लांट्स में B12 का टोटा
डॉ. सहरावत साफ कहती हैं: "प्लांट्स B12 नहीं बनाते क्योंकि बैक्टीरिया ही इसका सोर्स हैं, जो एनिमल प्रोडक्ट्स में पाए जाते हैं।" भारत में 70% से ज्यादा आबादी शाकाहारी है, जिससे कमी एंडेमिक है। एक PMC स्टडी (2019, अपडेटेड 2025) में हरियाणा के जनरल पॉपुलेशन में 47% कमी पाई गई। अन्य स्टडीज (Br J Nutr, 2018) में 50% युवा शाकाहारी ग्रेजुएट्स में डेफिशिएंसी।
2025 मेटा-एनालिसिस (Healthcare Bulletin) ने दिखाया कि शाकाहारियों में 65% केस, प्रेग्नेंट महिलाओं में 67%। कारण: डेयरी प्रोडक्ट्स कम खाना, मलएब्जॉर्प्शन। PMC आर्टिकल - इंडियन पॉपुलेशन में B12 डेफिशिएंसी।
हालिया स्टडीज: भारत में B12 कमी का अलार्मिंग ट्रेंड
2024-2025 की रिसर्च B12 कमी को 'अनसीन न्यूट्रिशनल इमरजेंसी' बता रही है। एक सिस्टेमैटिक रिव्यू (Wiley, 2024) में वेजन्स का B12 इनटेक ओम्निवोर्स से काफी कम पाया। MDPI जर्नल (2024) में कहा गया कि सप्लीमेंटेशन से एंडोथीलियल फंक्शन सुधरता है। Nutrition Reviews (2024) में यूरोपियन वेजन्स में 5-52% कमी।
भारत-केंद्रित: Telangana Today (2025) ने वेजिटेरियन डाइट्स से लिंक्ड वाइडस्प्रेड डेफिशिएंसी रिपोर्ट की। Vegan Health (2025) में 15% वेजन्स EAR से नीचे। MDPI स्टडी - वीगन पॉपुलेशन में B12।
शाकाहारियों के लिए रोकथाम: सप्लीमेंट्स और फूड्स से भरपाई करें
अच्छी खबर: B12 कमी आसानी से रोकी जा सकती है। दैनिक जरूरत 2.4 माइक्रोग्राम है। शाकाहारियों के लिए:
- फोर्टिफाइड फूड्स: ब्रेड, सीरियल्स, न्यूट्रिशनल यीस्ट।
- डेयरी: दूध, चीज, दही, पनीर (लैक्टो-वेजिटेरियन के लिए)।
- अंडे: अगर लैक्टो-ओवो वेजिटेरियन हैं।
- इंडियन ऑप्शंस: शिटाके मशरूम, टेम्पे, व्हे पाउडर, स्प्राउट्स।
- सप्लीमेंट्स: डॉक्टर की सलाह से 50-100 माइक्रोग्राम डेली।
Redcliffe Labs (2024) के अनुसार, टॉप 10 B12 फूड्स: दूध, पनीर, दही, अंडे, फोर्टिफाइड फूड्स। Medanta (2025) सजेस्ट करता है कि एल्डर्ली वेजिटेरियन्स को रेगुलर चेकअप। OZiva - शाकाहारी B12 फूड्स।
निष्कर्ष: शाकाहारी डाइट को बनाएं ट्रूली हेल्दी
शाकाहारी आहार के फायदे तो हैं ही - हार्ट हेल्थ, वेट कंट्रोल - लेकिन B12 की कमी इसे अधूरा बना देती है। डॉ. सहरावत की चेतावनी हमें याद दिलाती है कि अवेयरनेस और एक्टिव मॉनिटरिंग जरूरी है। रेगुलर ब्लड टेस्ट करवाएं, सप्लीमेंट्स लें और बैलेंस्ड अप्रोच अपनाएं। अगर लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर से कंसल्ट करें। कमेंट्स में अपनी स्टोरी शेयर करें!
#शाकाहारीडाइट #विटामिनB12कमी #VegetarianDietIndia